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	<title>Him Bus Card Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>शिमला: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं ने हिम बस कार्ड के विरोध में किया प्रदर्शन</title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:09:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया। इस दौरान महिला समिति ने हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा शुरू किए गए हिम बस कार्ड का कड़ा विरोध किया। हिम बस कार्ड से बढ़ रहा आर्थिक बोझ समिति का कहना [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया। इस दौरान महिला समिति ने हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा शुरू किए गए हिम बस कार्ड का कड़ा विरोध किया।</p>
<p><strong>हिम बस कार्ड से बढ़ रहा आर्थिक बोझ</strong></p>
<p>समिति का कहना है कि महिलाओं के लिए शुरू किया गया हिम बस कार्ड सुविधा देने के बजाय आर्थिक बोझ में डाल रहा है। समिति ने कहा कि सभी महिलाएं रोजाना बस से सफर नहीं करतीं और दूसरी ओर कई क्षेत्रों में सरकारी बसों की आवाजाही बेहद कम है। महिला समिति का कहना है कि महिलाओं को काम पर जाने, बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अक्सर शिमला आना पड़ता है, लेकिन बसों की कमी के कारण हिम बस कार्ड उनके लिए उपयोगी साबित नहीं हो रहा।</p>
<p>समिति ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब में महिलाओं को आधार कार्ड के आधार पर राज्यभर में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है, जबकि हिमाचल में किराए में दी जा रही रियायत भी समाप्त होने की कगार पर है।</p>
<p><strong> कहीं सीमित आवाजाही, कहीं रास्ते में खराब हो रही बसें</strong></p>
<p>महिला समिति की राज्य सचिव फलना चौहान ने कहा कि जिन परिवारों में तीन से चार महिलाएं हैं, उनके लिए यह कार्ड बनवाना काफी महंगा पड़ रहा है। साथ ही लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया में भी लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। कई मामलों में आवेदन रद्द होने पर दोबारा आवेदन के लिए फिर से शुल्क देना पड़ता है, जो आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।</p>
<p>समिति की जिला सचिव सोनिया शबरवाल ने कहा कि शिमला शहर में सरकारी बसों की कमी के कारण महिलाओं को बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने के लिए अक्सर निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में हिम बस कार्ड का लाभ उन्हें नहीं मिल पाएगा। पाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार हिम बस कार्ड के जरिए सिर्फ महिलाओं से 50% की छूट को खत्म करना चाहती हैं, जो महिलाओं के साथ सरासर धोखा है।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कार्यकर्ता हिम्मी ने कहा कि गांवों में बसों की आवाजाही पहले से ही सीमित है। कई बार लोगों को आधा रास्ता पैदल या छोटी गाड़ियों से तय करना पड़ता है, इसलिए वहां के लिए भी यह योजना व्यावहारिक नहीं है।</p>
<p>महिला समिति की शहरी कोषाध्यक्ष रमा रावत ने आरोप लगाया कि कई बार खराब बसों को ग्रामीण रूटों पर भेजा जाता है, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p>इस दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य अध्यक्ष सनी सेकता ने भी प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों से पढ़ने आने वाले छात्रों को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने में बसों की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>योजना बंद न करने पर करेंगी आंदोलन</strong></p>
<p>प्रदर्शन के बाद महिला समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने एचआरटीसी के प्रबंधक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। समिति ने यह भी मांग की कि बंद पड़े बस रूटों को तुरंत बहाल किया जाए। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बस कार्ड योजना को तुरंत वापस लेकर महिलाओं को पहले की तरह किराए में छूट जारी नहीं रखी, तो आने वाले समय में पथ परिवहन निगम के खिलाफ प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन और घेराव किया जाएगा।</p>
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