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	<title>FTA Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>FTA Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला : एफटीए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और स्मार्ट मीटर के खिलाफ किसान तेज करेंगे आंदोलन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 07:37:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : केंद्र सरकार के न्यूजीलैंड-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA), भारत &#8211; अमेरिका ट्रेड डील, बिजली संशोधन बिल–2025, स्मार्ट मीटर और मनरेगा जैसे मुद्दों पर प्रदेश के किसानों &#8211; बागवानों में आक्रोष लगातार बढ़ता दिख रहा है। सोमवार को हिमाचल सेब उत्पादक संघ के कोटखाई ब्लॉक का प्रथम सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में इन [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला : </strong>केंद्र सरकार के न्यूजीलैंड-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA), भारत &#8211; अमेरिका ट्रेड डील, बिजली संशोधन बिल–2025, स्मार्ट मीटर और मनरेगा जैसे मुद्दों पर प्रदेश के किसानों &#8211; बागवानों में आक्रोष लगातार बढ़ता दिख रहा है। सोमवार को हिमाचल सेब उत्पादक संघ के कोटखाई ब्लॉक का प्रथम सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में इन सभी मुद्दों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।</p>
<p>सम्मेलन में वक्ताओं ने सेब उत्पादकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित और चरणबद्ध आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने भूमि से बेदखली से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुरूप जमीन आवंटन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बनाती।</p>
<p>सम्मेलन में 27 और 28 फरवरी 2025 को शिमला में प्रस्तावित जिला सम्मेलन के लिए 10 प्रतिनिधियों का चयन किया गया। सम्मेलन में संगठन को और मजबूत करने के लिए गांव स्तर पर कमेटियों का गठन करने का भी निर्णय लिया गया। साथ ही बागवानों की समस्याओं के समाधान हेतु एकजुट होने की बात पर बल दिया गया।</p>
<p>बैठक में कोटखाई क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए प्रतिनिधी, राज्य कमेटी सदस्य संजय चौहान, रोहड़ू इकाई से रमन थरटा तथा जुब्बल इकाई से जय सिंह जैहटा और संजय कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
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		<title>केन्द्र सरकार की मजदूर-किसान विरोधी योजनाओं के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली में होगी बड़ी रैली</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/18/massive-rally-in-delhi-on-march-24-against-centres-anti-farmer-and-anti-worker-policies/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 14:56:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की बैठक में पार्टी राज्य सचिव संजय चौहान ने बताया कि 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली में प्रदेश से एक हजार से ज्यादा लोग भाग लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार की योजनाएं  जनविरोधी और मजदूर-किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की बैठक में पार्टी राज्य सचिव संजय चौहान ने बताया कि 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली में प्रदेश से एक हजार से ज्यादा लोग भाग लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार की योजनाएं  जनविरोधी और मजदूर-किसान विरोधी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में 9 मार्च तक मुक्त व्यापार समझौता, ट्रेड डील व टैरिफ, चार लेबर कोड, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक, मनरेगा को खत्म करने व वीबी – जी राम जी योजना को लाने, प्रदेश की राजस्व घाटा ग्रांट खत्म करने, स्मार्ट मीटर व अन्य मुद्दों पर जत्था चलाया जाएगा और नुक्कड़ नाटक किए जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 9 मार्च को पांवटा साहिब से होगी और 19 मार्च को शिमला में समापन होगा। इसके अंतर्गत पांवटा साहिब, रोहड़ू, रामपुर, टापरी, आनी, कुल्लू, बालीचौकी, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, कांगड़ा के मंड क्षेत्र, खुंडियां, धर्मशाला, चम्बा, सुजानपुर, ऊना, बिलासपुर, दाड़लाघाट, सोलन, शिमला में जनसभाएं व नुक्कड़ नाटक किए जाएंगे।</p>
<p><strong>केन्द्र की योजनाओं से मजदूर -किसान हो रहे बर्बाद</strong></p>
<p>उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा के खत्म होने से प्रदेश में पंजीकृत 28 लाख लोग आर्थिक तौर पर बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार पूंजीपतियों के हितों की रखवाली कर रही है और किसानों मजदूरों को बर्बाद करने वाली नीतियों को आगे बढ़ा रही है। इन नीतियों से महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड, यूरोपियन यूनियन व अमरीका से किए गए हालिया समझौतों से प्रदेश के किसान व बागवान बर्बाद हो जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों व ट्रेड डील से सेब, नाशपाती, कीवी व अन्य फलों की खेती में लगे तीन लाख बागवान व किसान परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के घरेलू उत्पाद में 13 प्रतिशत का योगदान देने वाली साढ़े 5,000 करोड़ रुपए की आर्थिकी की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी। उन्होंने कहा कि लेबर  कोड लागू होने से बंधुआ मजदूरी व गुलामी प्रथा कायम होगी। देश के 75 प्रतिशत मजदूर श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे।</p>
<p><strong>स्मार्ट मीटर से जनता पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ </strong></p>
<p>उन्होंने बिजली के निजीकरण के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि इससे न केवल जनता प्रभावित होगी बल्कि प्रदेश के लगभग 50,000 से ज्यादा कर्मचारियों व पेंशनरों के आर्थिक हित प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर से जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ना तथा महंगी बिजली मिलना व जनता को मिलने वाली सब्सिडी खत्म होना तय है।</p>
<p>मोदी सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की राजस्व घाटा ग्रांट बंद करने से हिमाचल के आर्थिक हित बुरी तरह प्रभावित होंगे तथा जनता, कर्मचारी व पेंशनर भारी दिक्कत में आ जाएंगे। पार्टी ने इन सभी मुद्दों पर प्रदेशव्यापी जत्था के जरिए जनता को लामबंद करके जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है।</p>
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		<title>शिमला: रोहड़ू में किसानों-बागवानों का प्रदर्शन, हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने MSP लागू करने, विदेशी सेब पर शुल्क और लेबर कोड रद्द करने की उठाई मांग</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/13/rohr-himachal-seb-utpadak-sangh-demands-msp-guarantee-higher-duty-on-imported-apples-and-repeal-of-labour-codes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 06:21:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : वीरवार को रोहड़ू बस स्टैंड परिसर में राष्ट्रव्यापी किसान–मज़दूर हड़ताल के तहत आयोजित सभा में जुब्बल, कोटखाई, रोहड़ू और छुहारा क्षेत्र के किसान–बागवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभा के दौरान किसानों और मजदूरों से जुड़ी कई प्रमुख मांगें उठाई गईं। इनमें मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, किसानों की भूमि व घरों से [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/13/rohr-himachal-seb-utpadak-sangh-demands-msp-guarantee-higher-duty-on-imported-apples-and-repeal-of-labour-codes/">शिमला: रोहड़ू में किसानों-बागवानों का प्रदर्शन, हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने MSP लागू करने, विदेशी सेब पर शुल्क और लेबर कोड रद्द करने की उठाई मांग</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला </strong><strong>: </strong>वीरवार को रोहड़ू बस स्टैंड परिसर में राष्ट्रव्यापी किसान–मज़दूर हड़ताल के तहत आयोजित सभा में जुब्बल, कोटखाई, रोहड़ू और छुहारा क्षेत्र के किसान–बागवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभा के दौरान किसानों और मजदूरों से जुड़ी कई प्रमुख मांगें उठाई गईं।</p>
<p>इनमें मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करने, किसानों की भूमि व घरों से बेदखली पर रोक लगाने, भूमिहीन और गरीब किसानों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने, किसान विरोधी टैरिफ नीतियों व मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर रोक लगाने, विदेशी सेब पर पर्याप्त आयात शुल्क सुनिश्चित करने, सभी फसलों पर कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने तथा प्राकृतिक आपदाओं व विकास कार्यों से हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं।</p>
<p>सेब उत्पादक संघ के वरिष्ठ नेता संजय चौहान ने आरोप लगाया कि देश के नीति-निर्धारक और केंद्र सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को संरक्षित करने में लगे हैं, जबकि किसानों, मजदूरों और आम जनसाधारण के अधिकारों को लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी क्षेत्र को कमजोर करने वाली नीतियां अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगी।</p>
<p>उन्होंने सभी मांगों को न्यायोचित बताते हुए सरकार से तत्काल सकारात्मक कदम उठाने की अपील की तथा चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक व तेज़ किया जाएगा।</p>
<p>हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने स्पष्ट किया कि किसानों और मजदूरों की मांगों पर ठोस निर्णय लिए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा। संघ ने प्रदेश के किसानों-बागवानों से एकजुट रहकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/02/13/rohr-himachal-seb-utpadak-sangh-demands-msp-guarantee-higher-duty-on-imported-apples-and-repeal-of-labour-codes/">शिमला: रोहड़ू में किसानों-बागवानों का प्रदर्शन, हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने MSP लागू करने, विदेशी सेब पर शुल्क और लेबर कोड रद्द करने की उठाई मांग</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<item>
		<title>यूरोपीय संघ से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क घटने से बागवानों को सता रहा बाजार में सस्ते विदेशी सेब का डर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2026/01/31/himachals-apple-growers-concerned-about-eu-india-free-trade-deal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:41:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Apple Growers]]></category>
		<category><![CDATA[Apple Industry]]></category>
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<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/01/31/himachals-apple-growers-concerned-about-eu-india-free-trade-deal/">यूरोपीय संघ से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क घटने से बागवानों को सता रहा बाजार में सस्ते विदेशी सेब का डर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> केन्द्र सरकार ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए है जिसे &#8216;Mother of All Deals&#8217;  कहा जा रहा है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए यह एग्रीमेंट चिंता का विषय बना हुआ है। यूरोपिय संघ के 27 देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 20% कर दिया गया है। जिसका असर हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों पर पड़ेगा।</p>
<p>इस फैसले से भारतीय बाजारों में सस्ते विदेशी सेब की बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआत में आयात की सीमा 50,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तय की गई है। अगले 10 सालों में यह मात्रा बढ़कर एक लाख टन सालाना हो जाएगी। सेब पर न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है।</p>
<p><strong>बागवानों में क्यों है रोष ?</strong></p>
<p>केन्द्र सरकार के इस फैसले से हिमाचल के बागवानों में काफी रोष है। बागवानों को डर है कि न्यूजीलैंड और EU की आड़ में दूसरे देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बनाएंगे, जिससे घरेलू सेब उत्पादकों को सही दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। बागवानों का कहना है कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने हमीरपुर की एक रैली में सेब पर आयात शुल्क 50% से बढ़ाकर 100% करने का वादा किया था। लेकिन सरकार वादा पूरा करने के बजाय अब शुल्क घटा रही है। 19 जनवरी 2026 को बागवानों ने इस मुद्दे पर राज्य सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था।</p>
<p><strong>केन्द्र सरकार का इस पर क्या कहना है</strong></p>
<p>वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि यूरोपीय संघ से केवल लगभग 50,000 टन सेब 20 प्रतिशत शुल्क के साथ आएंगे, जिसका न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) 80 रुपये प्रति किलोग्राम होगा। यूरोपीय संघ से आने वाले सेबों को 96 रुपये प्रति किलोग्राम की न्यूनतम प्रभावी भूमि मूल्य का सामना करना पड़ेगा, जिससे घरेलू मूल्य स्थिरता बनी रहेगी और किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री सुक्खू ने मुद्दे पर जताई चिंता</strong></p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सेबों पर आयात शुल्क में कमी से राज्य के सेब उत्पादकों पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी मुलाकात केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से हुई थी, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा राज्य सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से चर्चा करने के लिए एक टीम भेजेगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2026/01/31/himachals-apple-growers-concerned-about-eu-india-free-trade-deal/">यूरोपीय संघ से आयात होने वाले सेब पर आयात शुल्क घटने से बागवानों को सता रहा बाजार में सस्ते विदेशी सेब का डर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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