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	<title>BJP Pulse Scam Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>भाजपा शासनकाल में राशन की दालों के मालभाड़े में करोड़ाें रुपये का हेरफेर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Oct 2015 06:10:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[BJP Pulse Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में सरकारी राशन की दुकानों में दालों की सप्लाई को लेकर करोड़ों के फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मामले में खाद्य आपूर्ति निगम ने अपने स्तर पर थाना छोटा शिमला में मुकदमा दर्ज करवाया है। एफआईआर में तीन लोगों को नामजद किया गया है। भाजपा शासन काल में साल 2011 के मामले की जांच [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में सरकारी राशन की दुकानों में दालों की सप्लाई को लेकर करोड़ों के फर्जीवाड़ा हुआ है। इस मामले में खाद्य आपूर्ति निगम ने अपने स्तर पर थाना छोटा शिमला में मुकदमा दर्ज करवाया है। एफआईआर में तीन लोगों को नामजद किया गया है। भाजपा शासन काल में साल 2011 के मामले की जांच विजिलेंस भी कर चुका है।</p>
<p>इन फर्मों को करोड़ों का भुगतान करने से पहले निगम ने भी अपने स्तर पर एक जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उक्त तीनों आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। रिपोर्ट के आधार पर निगम के कंपनी सेक्रेटरी अरविंद शर्मा ने संजय गुप्ता, अजय कुमार और साहिल के खिलाफ शिकायत दी। इस आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसकी पुष्टि एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने की है। इस मामले की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई। खाद्य आपूर्ति निगम ने प्रदेश में सरकारी राशन की दुकानों में दालों की सप्लाई को करोड़ों के टेंडर निकाले। इसमें राज्य से बाहर की कई फर्मों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि टेंडर में बेहतर क्वालिटी की दालें सप्लाई करने वालों को ही टेंडर दिया जाना था। जिस फर्म के रेट सबसे कम होते हैं, उसी का टेंडर होता है। इसमें मुंबई से दालों को लाने की बात की गई।<br />
आरोप लगा कि टेंडर धारक ने मुंबई की जगह दिल्ली की ओपन मार्केट से ही दालें उठा लीं और हिमाचल भेज दीं। आरोप है कि टेंडर धारक ने दालों की ट्रांसपोर्टेशन में भुगतान के लिए जो करोड़ों के बिल पेश किए, वे मुंबई के दिखाए गए थे। मुंबई से हिमाचल मालभाड़े का किराया दिल्ली से कई गुना है।</p>
<p>इन बिलों के आधार पर अगर निगम भुगतान करता तो करोड़ों की चपत लगती। इसलिए जब उन बिलों को वेरिफाई किया गया तो फर्जी निकले। सूत्र बताते हैं कि इन कारोबारियों ने दावा किया है कि करीब 10 करोड़ का भुगतान निगम ने रोक रखा है। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शिमला पुलिस इसकी जांच करेगी। विजिलेंस से भी मामले से जुड़ा हुआ रिकॉर्ड लेगी।</p>
<p>पूरा मामला दाल के माल भाड़े से जुड़ा है। निगम का दावा है कि जब दालों की ट्रकों में सप्लाई दिल्ली से की गई तो वह मुंबई का माल भाड़ा इन्हें क्यों दें? पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि असल में यह गोलमाल कितने करोड़ का है। इस गड़बड़ झाले में क्या निगम के तत्कालीन अफसरों की भी कोई भूमिका रही है, इस पहलू पर भी जांच होगी।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं खाद्य आपूर्ति मंत्री</strong></p>
<p>खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले मंत्री जीएस बाली ने कहा कि जो दालों मुंबई से सप्लाई होनी थीं, सप्लायरों ने वे दालें दिल्ली से सप्लाई कर दीं। यह मामला साल 2010-11 का है। मामला पहले ही आर्बिट्रेशन में चल रहा है। डीएम की अध्यक्षता में निगम की टीम को जांच के लिए दिल्ली भेजा था। जांच की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस में मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>गड़बड़झाला</strong><br />
खाद्य आपूर्ति निगम ने छोटा शिमला थाना में दर्ज करवाया मामला<br />
सत्ता परिवर्तन के बाद विजिलेंस कर चुका है मामले की जांच<br />
तीन लोग नामजद, निगम पहले भी बना चुका है जांच कमेटी</p>
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