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	<title>Aman Sood Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>रिपोर्ट में खुलासा, रोहड़ू में जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़, शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों का सफाया</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/07/19/deodar-felling-in-rohru-shimla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Jul 2016 09:44:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला- </strong>  किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव शालन में शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों को काट दिया गया।</p>
<p>शवदाह के लिए नियमानुसार कैल के पेड़ काटने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं किया गया। धर्मशाला में कई जगह पेड़ों को इसलिए काटा गया कि पेड़ गाड़ी पार्किं ग में दिक्कतें पैदा कर रहे थे। धर्मशाला में अपर धर्मकोट इलाके में सिडार हिमालयन पैराडाइस का निर्माण तो पूरी तरह नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। पेड़ों को कंक्रीट में दबाया जा रहा है। नगर निगम धर्मशाला एवं वन विभाग की ओर से न के बराबर कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने इसी मामले में मंडी के कटौला वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई दो अगस्त को निर्धारित की है।</p>
<p>सरकार के लिए आंखें खोलने वाली है रिपोर्ट एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने पर कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए आंखें खोल देने वाली है। कोर्ट ने प्रदेश में लगातार हो रहे अवैध वन कटान की शिकायतों के मद्देनजर प्रदेश सरकार से इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए चार</p>
<p>सप्ताह का समय दिया है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वन काटुओं के खिलाफ कोर्ट के आदेशानुसार आपराधिक मामले दर्ज कर संबंधित न्यायालयों में अभियोजन चलाएं। पुलिस अधीक्षकों को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है।</p>
<p><strong>जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़</strong> </p>
<p>रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहडू़ तहसील के तहत टिक्कर कॉलेज भवन निर्माण के लिए जबरन भूमि चयन करवाने के लिए वन भूमि से 51 पेड़ काट लिए गए थे। पुलिस चौकी टिक्कर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर काटे गए इन पेड़ों में 49 पेड़ कैल के और एक-एक देवदार और रई के थे।</p>
<p>ये पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र कशैनी में बिना अनुमति केवल इसलिए काट लिए गए, जिससे उस भूमि पर कम से कम पेड़ नजर आएं और कॉलेज के लिए भूमि का चयन आसानी से हो जाए। इस क्षेत्र में डीएफओ की ओर से टीडी अधिकारों को निलंबित करने के निर्णय को एमिकस क्यूरी ने सही और तर्कसंगत ठहराया है।</p>
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