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	<title>हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा निदेशालय ने प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला निजी स्कूलों पर छोड़ा</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/14/hp-higher-education-department-notification-to-open-school/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Nov 2021 05:25:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[निजी स्कूल]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-प्रदेश में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों की पंद्रह नवंबर से शुरू होने वाली नियमित कक्षाओं के आदेश को सरकार ने बदल दिया है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपायुक्त शिमला, सभी जिला उपनिदेशकों और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-प्रदेश में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों की पंद्रह नवंबर से शुरू होने वाली नियमित कक्षाओं के आदेश को सरकार ने बदल दिया है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपायुक्त शिमला, सभी जिला उपनिदेशकों और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र जारी कर निजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का फैसला स्वयं लेने की छूट दी गई है।</p>
<p>सरकार ने निजी स्कूल प्रबंधन को एसएमसी-पीटीए से चर्चा कर इस संदर्भ में आगामी फैसला लेने की मंजूरी दे दी है। प्रदेश के शीतकालीन छुट्टियों वाले सीबीएसई और आईसीएसई के निजी स्कूलों के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूलों में ना बुलाने पर ऑनलाइन कक्षाएं नियमित तौर पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने यह फैंसला निजी स्कूलों में बच्चे पढ़ाने वाले अभिभावकों के विरोध पर लिया है। पिछले दिन छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने शिमला जिला व अन्य शीतकालीन सत्र के छात्रों की कक्षाओं व ऑनलाइन वार्षिक परीक्षाओं को लेकर उच्चतर शिक्षा निदेशक द्वारा की गई अधिसूचना का स्वागत किया है लेकिन इसे आधा-अधूरा करार दिया है। मंच ने इस अधिसूचना को प्राइमरी कक्षाओं के साथ ही नौंवीं कक्षा तक लागू करने की मांग की है। मंच ने इस आदेश को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के स्कूलों के लिए भी लागू करने की मांग की है।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि शिमला शहर व प्रदेश के अन्य शीतकालीन स्कूलों में केवल पन्द्रह दिन तक चलने वाली कक्षाएं व वार्षिक परीक्षाएं स्कूलों में न करवाकर ऑनलाइन माध्यम से ही करवाई जाएं। उन्होंने इस संदर्भ में तुरन्त ही निर्णय लेने की मांग की है। क्योंकि शिमला के कुछ स्कूलों में दो दिन बाद 15 नवम्बर 2021 से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री के ओएसडी से भी बातचीत की है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि उच्चतर शिक्षा निदेशक के आदेशों में ऑनलाइन परीक्षाओं का कोई जिक्र नहीं है। ऑनलाइन कक्षाओं का आदेश भी स्कूल प्रबंधन व पीटीए पर छोड़ दिया गया है। यह आदेश भी केवल सीबीएसई व आईसीएससी के प्राइमरी स्कूलों के लिए है, जिसे नौंवीं कक्षा तक लागू करना चाहिए था। यह आदेश आधा-अधूरा है जिसे मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करके बेहतर बनाना चाहिए।</p>
<p>मेहरा ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन स्कूलों के सत्र में काफी अंतर है। ग्रीष्मकालीन स्कूलों का साढ़े तीन महीने का सत्र अभी शेष है जबकि शिमला के शीतकालीन स्कूलों में पांच दिन की कक्षाओं के बाद छात्रों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में शिमला में केवल दस से पन्द्रह दिन के लिए स्कूलों को खोलने का कोई औचित्य नहीं बनता है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि जब पूरा वर्ष भर छात्रों ने सौ प्रतिशत पढ़ाई ऑनलाइन कक्षाओं से की है तो फिर दस दिन की वार्षिक परीक्षाओं को ऑफलाइन माध्यम से स्कूलों में करवाने का कोई भी ठोस कारण नहीं बनता है। सरकार के इस निर्णय से छात्रों व अभिभावकों को बेवजह आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अभिभावक कोरोना महामारी से पहले ही काफी घबराए हुए हैं। शिमला शहर में कोरोना व अन्य वायरल संक्रमण के मामले भी लगातार बड़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों के कोरोना संक्रमण की जद में आने का काफी गम्भीर खतरा बना हुआ है। स्कूल खुलने से अभिभावकों पर नई ड्रेस खरीदने का भी हज़ारों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ने वाला है जबकि इसके बाद तीन महीने के लिए स्कूल शीतकालीन अवकाश के लिए बंद रहेंगे। इस तरह छात्रों व अभिभावकों को बेवजह आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।</p>
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		<title>हिमाचल के स्कूलों में अब नहीं पढ़ाए जाएंगे पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन और साइकोलॉजी विषय, जानिए क्योँ लगी  इन विषयों पर रोक</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/24/psychology-and-public-administration-in-himachal-schools/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jan 2017 11:19:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन]]></category>
		<category><![CDATA[साइकोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2002 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय को डाइंग कैडर (dying cadre) कर दिया था। इसके बाद स्कूलों में इन विषयों के पद नहीं भरे गए हैं, वर्ष 2008 में साइकोलॉजी और फिलोस्फी विषयों को डाइंग कैडर कर दिया, उम्मीदवार राजनीतिक शास्त्र विषय के लिए आवदेन कर सकतें हैं शिमला- हिमाचल प्रदेश [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2002 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय को डाइंग कैडर (dying cadre) कर दिया था। इसके बाद स्कूलों में इन विषयों के पद नहीं भरे गए हैं, वर्ष 2008 में साइकोलॉजी और फिलोस्फी विषयों को डाइंग कैडर कर दिया, उम्मीदवार राजनीतिक शास्त्र विषय के लिए आवदेन कर सकतें हैं</strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>  हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के 60 स्कूलों में भविष्य में इन दोनों विषय में एडमिशन देने पर भी रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार ने राज्य के 60 स्कूलों में पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन (लोक प्रशासन) और साइकोलॉजी के पीजीटी के पद समाप्त कर दिए हैं। अब इन पदों पर सरकार नई भर्ती नहीं करेगी। मौजूदा समय में इन स्कूलों में उक्त विषय के जो पद भरे गए हैं, शिक्षक की सेवानिवृत्ति होने के बाद ही ये पद समाप्त कर दिए जाएंगे। </p>
<p>शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की सूची जारी कर दी है। इस समय राज्य के 41 स्कूलों में पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन और 19 स्कूलों में साइकोलॉजी विषय पढ़ाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति के बाद ये पद समाप्त कर दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>वर्ष 2002 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय को कर दिया था डाइंग कैडर</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2002 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय को डाइंग कैडर कर दिया था। इसके बाद स्कूलों में इन विषयों के पद नहीं भरे गए हैं। इसके बाद सरकार ने वर्ष 2008 में साइकोलॉजी और फिलोस्फी विषयों को डाइंग कैडर (dying cadre) कर दिया। अभी केवल उक्त स्कूलों में ही ये विषय पढ़ाए जा रहे हैं। ये उम्मीदवार राजनीतिक शास्त्र विषय के लिए आवदेन कर सकतें हैं। ऐसा प्रावधान सरकार ने पब्लिक एडमिनस्टे्रशन विषय के पदों को समाप्त करने के बाद किया है। सरकार का तर्क है कि इन दोनों विषय में छात्रों की संख्या कम रहती हैं और पब्लिक एडमिनस्टे्रशन विषय का सिलेबस राजनिति शास्त्र में पूरा कवर हो रहा है। ऐसे में छात्र राजनीति शास्त्र पढ़ सकते हैं।</p>
<p><strong>इन जिलों के स्कूलों में पढ़ाए जा रहे ये विषय</strong> </p>
<p>इस समय पब्लिक एडमिनस्टे्रशन विषय बिलासपुर के 2 स्कूलों में, चंबा के 1, हमीरपुर के  5, कांगड़ा के 3, कुल्लू के 3, मंडी के 9, शिमला के 8, सिरमौर के 3, ऊना के 3, हमीरपुर के 2, सोलन के 1 स्कूलों में पढ़ाए जा रहे हैं। इसके अलावा साइकोलोजी विषय कांगड़ा के 7, शिमला के 6, सोलन के 2, चंबा के 1, हमीरपुर के 2 व ऊना के 1 स्कूल में पढ़ाया जा रहा है।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2017/01/24/psychology-and-public-administration-in-himachal-schools/">हिमाचल के स्कूलों में अब नहीं पढ़ाए जाएंगे पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन और साइकोलॉजी विषय, जानिए क्योँ लगी  इन विषयों पर रोक</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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