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	<title>संयुक्त किसान मोर्चा Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>किसानों के साथ कि जा रही सरकार की वादाखिलाफी नहीं होगी बर्दाश्त, वादे पूरे नहीं हुए तो फिर से आंदोलन का रास्ता इख्तियार करेंगे किसान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Feb 2022 17:05:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि मंत्री वीरेन्द्र कंवर]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ कुलदीप सिंह तंवर हिमाचल किसान सभा]]></category>
		<category><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- कृषि कानून के विरोध ने एक साल से लंबे समय तक आंदोलनरत किसानों ने सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अपना आंदोलन खत्म किया था। आंदोलन तो ख़त्म हो गया लेकिन अभी तक भी सरकार की ओर से जो वादे ओर दावे किसानों से किए गए थे वह अभी तक पूरे नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> कृषि कानून के विरोध ने एक साल से लंबे समय तक आंदोलनरत किसानों ने सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अपना आंदोलन खत्म किया था। आंदोलन तो ख़त्म हो गया लेकिन अभी तक भी सरकार की ओर से जो वादे ओर दावे किसानों से किए गए थे वह अभी तक पूरे नहीं हो किए गए है और सरकार की इस वादाखिलाफी से अब किसान एक बार फिर से रोष में हैं।</p>
<p> इसी रोष को प्रकट करने के लिए आज संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान के तहत विश्वासघात दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री वीरेन्द्र कंवर के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें अनाज, फल, सब्जी एवं दूध पर समर्थन मूल्य देने की भी मांग की गई। </p>
<p>इस ज्ञापन में राष्ट्रपति को सरकार की ओर से लिखित बातों व आश्वासन का पूरा ब्यौरा दिया है जिसमें उन्होंने लिखा कि 21 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर छह मुद्दों को उनके समक्ष रखा था, जिसके जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के नाम एक पत्र (सचिव/ऐएफडब्लू/2021/मिस/1) लिखा जिसमें उन्होंने कुछ मुद्दों पर सरकार की ओर से आश्वासन दिए और आंदोलन को वापस लेने का आग्रह किया था। </p>
<p>चिट्ठी पर भरोसा करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली के बॉर्डर पर लगे मोर्चा और तमाम धरना प्रदर्शनों को 11 दिसंबर से ही खत्म करने का निर्णय किया था लेकिन  सरकार ने उनमें से कोई वादा अभी तक पूरा नहीं किया है।इसी के खिलाफ अब एक बार फिर से किसान संघ अपना रोष जता रहे है।</p>
<p>हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर ने बताया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। चिट्ठी में वादा किया गया था कि किसान आन्दोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमें तत्काल प्रभाव से वापिस लिए जाएंगे। </p>
<p>केस वापिस लेने की सहमति उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार की ओर से प्रदान की गयी है, लेकिन हकीकत यह है कि केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल सरकार की तरफ से आंदोलन के दौरान बनाए गए केस वापिस लेने के आश्वासन पर नाममात्र की कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।  </p>
<p>डॉ तंवर ने कहा कि उन्होंने ज्ञापन में यह भी लिखा है कि केंद्र सरकार ने कहा था कि आन्दोलन के दौरान शहीद परिवारों को हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दी थी जिसके तहत उन्हें मुआवजा मिलना था और इसके  साथ ही एमएसपी (MSP) प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की थी।</p>
<p> वादे के तहत अभी तक ना तो मुआवजा दिया गया है ओर ना ही कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी की गई है. उन्होंने कहा की  मोर्चा उठाने के बाद से केंद्र सरकार अपने किसान विरोधी एजेंडा पर और आगे बढ़ती जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते से डेयरी किसान के अस्तित्व पर और जैव विविधता कानून 2002 में संशोधन से किसान की जैविक संपदा को खतरा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( FSSAI) के नए नियम बनाकर जीएम खाद्य पदार्थों को पिछले दरवाजे से घुसाने की कोशिश हो रही है। एफसीआई (FCI) के नए गुणवत्ता मानक से फसल की खरीद में कटौती की भी कोशिश की जा रही है।</p>
<p>अध्यक्ष डॉ तंवर ने कहा कि हिमाचल किसान सभा ने ज्ञापन में राष्ट्रपति को देश के सबसे बड़े वर्ग अन्नदाता के हितों की रक्षा करने और सरकार को इस धोखाधड़ी के विरुद्ध आगाह करने की अपील की है।</p>
<p>उन्होंने पत्र में राष्ट्रपति से यह भी अपील की है कि वह केंद्र सरकार को उसके लिखित वादों की याद दिलाएं और इन्हे जल्द से जल्द पूरा करवाया जाए. यदि सरकार अपने लिखित आश्वासन से मुकर जाती है तो किसानों के पास आंदोलन को दोबारा शुरू करने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।</p>
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		<title>संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन किया स्थगित, 11 दिसम्बर को करेंगे घर वापसी</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/10/sanyukt-kisan-morcha-postponed-the-farmers-movement/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Dec 2021 06:33:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[किसान आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[भारत सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[संयुक्त किसान मोर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला-भारत सरकार ने, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव के माध्यम से, संयुक्त किसान मोर्चा को एक औपचारिक पत्र भेजा है जिसमें विरोध कर रहे किसानों की कई लंबित मांगों पर सहमति व्यक्त की गई है। इसके जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली सीमाओं पर राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य स्थानों पर चल रहे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/10/sanyukt-kisan-morcha-postponed-the-farmers-movement/">संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन किया स्थगित, 11 दिसम्बर को करेंगे घर वापसी</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>-भारत सरकार ने, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव के माध्यम से, संयुक्त किसान मोर्चा को एक औपचारिक पत्र भेजा है जिसमें विरोध कर रहे किसानों की कई लंबित मांगों पर सहमति व्यक्त की गई है। इसके जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली सीमाओं पर राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य स्थानों पर चल रहे विभिन्न मोर्चों को हटाने की औपचारिक घोषणा की है। वर्तमान आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।</p>
<p>किसान मोर्चा ने कहा है कि लड़ाई जीत ली गई है और किसानों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए, विशेष रूप से सभी किसानों के लिए एमएसपी के कानूनी अधिकार को सुरक्षित करने के लिए सँघर्ष जारी रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन के लगभग 715 शहीदों को इस संघर्ष की शानदार और ऐतिहासिक जीत समर्पित की है।</p>
<p>किसान मोर्चा ने कहा है कि सीडीएस बिपिन रावत और उनके सहकर्मियों के निधन पर पूरा देश शोक मना रहा है, इसलिए एसकेएम ने भी किसानों की जीत के संबंध में आज सभी समारोहों को स्थगित किया है। जश्न की रैलियां अब परसों ( 11 दिसंबर ) को निकाली जाएंगी,उस दिन किसान विजय रैलियां निकाल कर मोर्चा स्थलों को एक साथ छोड़ देंगे।</p>
<p>किसान मोर्चा ने कहा है कि भारत सरकार विरोध कर रहे किसानों से की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रही है और भविष्य की कार्रवाई का खाका तैयार करने के लिए, यह सुनिश्चित करने के लिए एसकेएम की अगली बैठक 15 जनवरी को दिल्ली में आयोजित की जाएगी।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने लंबे आंदोलन के दौरान धैर्य और समर्थन के लिए मोर्चा स्थलों के स्थानीय निवासियों का धन्यवाद किया है और उन्हें हुई असुविधाओं के लिए माफी भी मांगी है।</p>
<p>संयुक्त किसान मोर्चा ने इस आंदोलन में किसानों के साथ संघर्ष करने वाले श्रम संगठनों, महिला संगठनों और युवा/छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ,वकीलों जिन्होंने कानूनी सहायता और एकजुटता बढ़ाई, डॉक्टरों जिन्होंने चिकित्सा शिविर स्थापित किए और अपनी अथक सेवाएं दीं, विभिन्न धार्मिक निकायों जिन्होंने लंगर स्थापित किया और प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त और निर्बाध रूप से खिलाया, मानवाधिकार संगठनों सहित विभिन्न प्रगतिशील संगठनों जो समर्थन में खड़े थे, कई कलाकार जो लगातार आंदोलन के साथ थे, कई संगठन जिन्होंने एसकेएम के आह्वान का लगातार और निरन्तर जवाब दिया, राजमार्ग ढाबा मालिकों और किसान आंदोलन को अपनी संगठनात्मक बैठकें चलाने के लिए जगह देने वाले लोगों, एनआरआई और अंतर्राष्ट्रीय किसान संगठनों और अन्य लोगों जिन्होंने अपने अपने स्थानों पर एकजुटता की कार्रवाई की, सैकड़ों स्वयंसेवकों जिन्होंने अपनी सेवा देकर भाग लिया, और अन्य शुभचिंतकों का धन्यवाद किया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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