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	<title>रामसिंह Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>हिमाचल के दुर्गम गाँव में 25 वर्ष से मानसिक और शारीरिक अपंगता से जूझ रही मासूम की सरकार से एक आशियाने की फरियाद</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2016/12/05/story-of-a-disabled-himachal-village-girl-seeking-shelter/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Dec 2016 14:02:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- बचपन कैसे बीता और कब वह 25 वर्ष की हो गई, उसे पता ही न चला। अविवाहित माँ ने जन्म देने बाद उसे नाना -नानी के हवाले कर कहीं और घर बसा लिया। वह खड़ी भी नहीं हो सकती, कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलना ही उसकी नियति है। सुनती सब है [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> बचपन कैसे बीता और कब वह 25 वर्ष की हो गई, उसे पता ही न चला। अविवाहित माँ ने जन्म देने बाद उसे नाना -नानी के हवाले कर कहीं और घर बसा लिया। वह खड़ी भी नहीं हो सकती, कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलना ही उसकी नियति है। सुनती सब है पर ठीक से बोल नहीं पाती, आँखें विकृत हैं और ठीक से देख नहीं पाती। 4 फुट X 3 फुट के ढारे में उसे अलग इसलिए रखा जाता है कि बुजुर्ग हो चुकी नानी अब उसे शौच आदि कराने में असमर्थ है।</p>
<p>यह कोई कहानी नहीं एक हकीकत है अपने कमज़ोर हाथों के सहारे घिसट घिसट कर चलने वाली अपनी उमीदों और भविष्य को अपने विकृत आँखें से देखने वाली यह कहानी है मासूम अनीतू (उर्फ़ नूनी) की है! अनीतू  मंग फाउंडेशन ने उसे सुरक्षित किसी नारी निकेतन में भिजवाने का बीड़ा उठाया है।<br />
शिमला से करीब 110 किलोमीटर दूर 40 किलोमीटर का कच्चा रास्ता तय कर ननखड़ी उप तहसील के दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी में मासूम अनीतू उर्फ़ नूनी का हाल जानने उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, महासचिव यशवंत राय और तरुण शारदा पहुंचे तो हैरान रह गए। नूनी जुर्ग नाना राम सिंह और नानी केम्पू देवी के साथ रहती है।  </p>
<p>नाना रामसिंह ने बताया कि अनीतू का नाम पंचायत के परिवार रजिस्टर में भी दर्ज नहीं है। उसके पिता के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम और माँ ने कहीं और घर बसा लिया। गांव के लोग कहते हैं कि उसे पोलियो है पर गरीबी, अज्ञानता और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण उसे कभी किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया गया। उसे एक नहीं, कई विक्लांगताएं हैं। अनीतू पहाड़ी बोली समझती तो है पर बोलने में असमर्थ है। आखों में विकृति है और मुंह से हर समय लार निकालती रहती है। </p>
<h3>विडियो </h3>
<p><iframe width="691" height="346" src="https://www.youtube.com/embed/ex9Ty_Yxt1U" frameborder="0" allowfullscreen></iframe></p>
<p>रामसिंह ने यह भी बताया की अनीतू हर बात को बहुत ध्यान से समझती है और याद रखती है जब कभी उसकी माँ उसे मिलने आती है तब वह अपनी माँ को सारी बातें बताती है। अनीतू की बुजुर्ग नानी केम्पू देवी बताती हैं कि उनकी दोती को खाने में चपाती पसन्द है और वो  चावल नहीं खाती  वह अपनी माँ को भी याद करती है।</p>
<p>अनीतू की हालात पर उसके नाना रामसिंह ने कहा कि वे अब उसकी संभाल नहीं सकते। अजय श्रीवास्तव और हिमाचल वॉचर से बात करते हुए  अनीतू की नानी केम्पू देवी और नाना रामसिंह ने कहा कि  वे चाहते हैं कि अनीतू को किसी आश्रम या उस जगह में भेज दिया जाये जहाँ उसका ध्यान रखा जाये। अपनी पोती के प्रति उन्होंने अपनी नम आँखों से चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मृत्यु के बाद उस मासूम का दायित्व कौन संभालेगा।  </p>
<p>उमंग फाउंडेशन के चेयरमैन ने सामजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सचिव को पत्र लिखकर अनीतू की व्यथा बताई है और माँग की है कि 15 दिसंबर से पहले उसे गाँव से निकालकर उसकी डाक्टरी जांच कराई जाए और किसी नारी सेवासदन में रखा जाए। 15 दिसंबर के बाद कभी भी बर्फ पड़ सकती है और रास्ते बंद हो जाएंगे। उन्होंने संवेदनशील एडवोकेट बलवंत ठाकुर कास धन्यवाद किया जो यह मामला उनके ध्यान में लाये।</p>
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