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	<title>मकलोडगंज Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>प्रदेश में धड़ल्ले  से बिक रहा नकली  हिमाचली ब्रांड का सामान , पर्यटको को 600 रुपए का सामान बेचा जा रहा 4500 में</title>
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		<pubDate>Thu, 15 Dec 2016 06:03:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>कुल्लू- हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार को बाहरी प्रदेशों के लोगों द्वारा बदनाम करने के लिए हिमाचली ब्राड़ों को भी निशाना बनाया जा रहा है। कुल्लू शॉल की देश सहित विदेशों में भी अधिक मांग है। हिमाचल के पर्यटन स्थलों में ग्राहक को बाहरी राज्यों में बने शॉल, जैकेट, पहाड़ी टोपी, गर्मसूट व अन्य वस्तुओं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुल्लू- </strong>हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार को बाहरी प्रदेशों के लोगों द्वारा बदनाम करने के लिए हिमाचली ब्राड़ों को भी निशाना बनाया जा रहा है। कुल्लू शॉल की देश सहित विदेशों में भी अधिक मांग है। हिमाचल के पर्यटन स्थलों में ग्राहक को बाहरी राज्यों में बने शॉल, जैकेट, पहाड़ी टोपी, गर्मसूट व अन्य वस्तुओं को हिमाचली ब्रांड के नाम पर बेचा जा रहा है। प्रदेश में आने वाले लाखों देश-विदेश के पर्यटक पहाड़ी राज्य का सामान समझकर खरीद रहे हैं, जिससे दूसरे प्रदेशों सहित विदेशों में भी हिमाचली ब्रांड का नाम खराब किया जा रहा है। </p>
<p>शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान पाया कि लुधियाना, अमृतसर सहित पड़ोसी राज्यों के किसी दूसरे शहर में बने शॉल सहित अन्य वस्तुओं को हिमाचली ब्रांड के नाम पर बेचने के मामले भी सामने आए हैं। इसमें उन्होंने पाया कि दिल्ली में जिस शॉल या गर्म सूट की कीमत 600 रुपए के करीब है। हिमाचली पर्यटन स्थलों में बाहरी प्रदेशों और विदेशों के पर्यटकों को सूट को 4500 रुपए के करीब में बेचा जा रहा है। शोधार्थियों के शोध में सामने आया है कि यह समस्या प्रदेश की पर्यटन कारोबार में आर्थिक स्थिति को दीमक की तरह अंदर से खोखला कर रही है। </p>
<p>इसके अलावा बाहरी राज्यों के कारोबारियों ने हिमाचल के पर्यटन स्थलों में गेस्ट हाउस व मध्यम वर्ग के होटलों को लीज पर ले लिया है। इसमें बौद्ध नगरी धर्मशाला-मकलोडगंज, कुल्लू-मनाली, शिमला और डलहौजी के 50 फीसदी से अधिक होटल व गेस्ट हाउस बाहरी लोगों ने लीज पर लिए हैं। इनमें कार्य करने वाले लोग भी बाहरी प्रदेशों के ही रखे जाते हैं। इसमें प्रदेश के स्थानीय लोगों का कारोबार छिन रहा है।</p>
<p>पर्यटन सीजन के दौरान बाहरी राज्यों के कारोबारियों की संख्या तीन गुना से अधिक हो जाती है। सीजन के दौरान बाहरी प्रदेशों और देशों के पर्यटकों को ठगने का काम किया जाता है, जिससे हिमाचल आने वाले पर्यटकों की नज़रों में प्रदेश की गलत छवि बन रही है, जिससे आने वाले समय में अब पर्यटक दूसरे राज्यों का रुख करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।</p>
<p><strong>ट्रैकिंग रही अछूती</strong></p>
<p>वर्तमान में ट्रैकिंग ही ऐसा कारोबार रह गया है, जिसे बाहरी प्रदेशों के लोग नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा पर्यटन स्थलों पर होटल, रेस्तरां, दुकानें, आर्टिफिशियल, आभूषणों  का कारोबार, कपड़े का  कारोबार, अन्य छोटे-बड़े कारोबार वे धड़ल्ले से कर रहे हैं।</p>
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