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	<title>पहाड़ी भाषा Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>पहाड़ी भाषा Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>पहाड़ी (हिमाचली) को राज्य की आधिकारिक भाषा बनाने की फिर उठी मांग, प्रदेश हाई कोर्ट नें जारी किया जनहित याचिका के सन्दर्भ में आदेश</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/12/pil-filed-in-hp-high-court-pahari-himachali-as-hill-states-official-language/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Nov 2021 08:39:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एच डब्ल्यू कम्युनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[कला और संस्कृति]]></category>
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		<category><![CDATA[पश्चिमी पहाड़ी]]></category>
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		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग, जबकि पहाड़ी बोलने वाले 40 लाख से अधिक लोग, फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया। शिमला-प्रदेश सरकार ने संस्कृत को तो दूसरी भाषा घोषित कर दिया लेकिन पहाड़ी को भाषा का दर्जा देने के लिए कोई कदम [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/12/pil-filed-in-hp-high-court-pahari-himachali-as-hill-states-official-language/">पहाड़ी (हिमाचली) को राज्य की आधिकारिक भाषा बनाने की फिर उठी मांग, प्रदेश हाई कोर्ट नें जारी किया जनहित याचिका के सन्दर्भ में आदेश</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग, जबकि पहाड़ी बोलने वाले 40 लाख से अधिक लोग, फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया। </strong></p>
<p><strong>शिमला-</strong>प्रदेश सरकार ने संस्कृत को तो दूसरी भाषा घोषित कर दिया लेकिन पहाड़ी को भाषा का दर्जा देने के लिए कोई कदम अभी तक क्यों नहीं उठाया। ये कहना  है अर्श धनोटिया का जिन्होंने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और मांग राखी थी कि पहाड़ी को हिमाचल प्रदेश की आधिकारिक भाषा घोषित किया जाए। याचिका कर्ता के वकील भवानी प्रताप कुठलेरिया नें इस बारे में उन्होंने कई तथ्य कोर्ट के सामने रखे। 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश में संस्कृत बोलने वाले सिर्फ 936 लोग हैं जबकि पहाड़ी 40 लाख से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। पर फिर भी पहाड़ी को राज्य में भाषा का दर्जा न देकर संस्कृत को दे दिया गया।</p>
<p>याचिका में नई शिक्षा निति 2020 के तहत पहाड़ी (हिमाचली) और अन्य स्थानीय भाषाओँ को पाठशालाओं में प्राथमिक और माध्यमिक  स्तर पर शिक्षा का माध्यम बनाये जाने, 2021 की जनगणना में पहाड़ी (हिमाचली) को अलग श्रेणी में रखने और साथ ही साथ लोगों, खासकर के युवा वर्ग को जागरूकता शिविरों के द्वारा पहाड़ी को प्रोत्साहन देने और उसे राज्य की मातृ भाषा बनाने की मांग रखने के बारे में भी कहा गया। जिसके जवाब में हाई कोर्ट ने इस संधर्भ में सोमवार को आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>न्यामूर्ति मुहम्मद रफ़ीक और न्यायमूर्ति सबीना की पीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा  “कोर्ट राज्य सरकार को तब तक कोई निर्देश नहीं दे सकते जब तक यह साबित न हो कि पहाड़ी (हिमाचली) की अपनी एक संयुक्त लिपि है और पूरे राज्य में एक ही पहाड़ी बोली प्रचलित है। हालांकि, याचिकाकर्ता को एक सामान्य पहाड़ी (हिमाचली),  सामान भाषा के ढांचे और सामान टांकरी लिपि को बढ़ावा देने की दृष्टि से एक शोध करने के लिए  हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा कला और संस्कृति विभाग से संपर्क करने की स्वतंत्रता है और यदि याचिकाकर्ता प्रतिवादी-राज्य के पास, भाषा एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त प्रमुख सचिव के माध्यम से पहुँचता है, तो यह कथित विभाग के ऊपर है कि वह उसका निवारण कानून के हिसाब से करें।”</p>
<h3><strong>क्या है पहाड़ी भाषा का मतलब </strong></h3>
<p>अर्श धनोटिया का कहना है कि पहाड़ी (हिमाचली), हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली पश्चिमी पहाड़ी बोली शृंखला के लिए इस्तेमाल होने वाला संयुक्त पारिभाषिक शब्द है तथा इसमें मुख्यतः कांगड़ी, मंडयाली, चम्बयाली, कुल्लवी, म्हासुवी पहाड़ी और सिरमौरी आती है। उसके अनुसार हिमाचल प्रदेश के गठन के समय से ही पहाड़ी (हिमाचली) को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग होती रही है। इसे आधिकारिक तौर पर 37 ऐसी अन्य भाषाओं के साथ सूचीबद्ध किया गया है जिन्हें अनुसूचित श्रेणी में रखने की पहले से ही माँग है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वर्ष 1970 और 2010 में इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पारित किए जा चुके हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>युवाओं में विलुप्त हो रही पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जरूरी- डॉ. कौशल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Nov 2021 15:24:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[कुलपति]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विश्वविद्यालय]]></category>
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		<category><![CDATA[भाषा और संस्कृति विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचली बोलियाँ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोलन-हिमाचल प्रदेश भाषा और संस्कृति विभाग ने आज डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल मुख्य अतिथि रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात लेखक और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता विद्यानंद सरैक ने की। राज्य के विभिन्न हिस्सों से [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/01/pahari-language-event-at-uhf-nouni/">युवाओं में विलुप्त हो रही पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जरूरी- डॉ. कौशल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन</strong>-हिमाचल प्रदेश भाषा और संस्कृति विभाग ने आज डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल मुख्य अतिथि रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात लेखक और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता विद्यानंद सरैक ने की। राज्य के विभिन्न हिस्सों से 40 से अधिक लेखक और विद्वान इस दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, जिसके दौरान पहाड़ी भाषाओं के प्रचार पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p>कुसुम सँगैक, सहायक निदेशक ने पहाड़ी दिवस समारोह के बारे में एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि दी और पूरे हिमाचल प्रदेश के आए लेखकों और विद्वानों का स्वागत किया। सहायक निदेशक अलका कैंथला ने हिमाचली परंपरा में मुख्य अतिथि का स्वागत किया और उन्हें एक पुस्तक भेंट की।</p>
<p><a href="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/11/Dr-Parvinder-Kaushal-addressing-the-gathering-during-state-level-Pahari-divas-celebrations.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-14134 size-full" src="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/11/Dr-Parvinder-Kaushal-addressing-the-gathering-during-state-level-Pahari-divas-celebrations.jpg" alt="Dr Parvinder Kaushal addressing the gathering during state level Pahari divas celebrations" width="1000" height="667" srcset="https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/11/Dr-Parvinder-Kaushal-addressing-the-gathering-during-state-level-Pahari-divas-celebrations.jpg 1000w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/11/Dr-Parvinder-Kaushal-addressing-the-gathering-during-state-level-Pahari-divas-celebrations-300x200.jpg 300w, https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2021/11/Dr-Parvinder-Kaushal-addressing-the-gathering-during-state-level-Pahari-divas-celebrations-768x512.jpg 768w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" /></a></p>
<p>इस अवसर पर डॉ. परविंदर कौशल ने कहा कि राज्य के विद्वान नियमित रूप से स्थानीय भाषाओं में साहित्य प्रकाशित कर रहे हैं  लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि अब सभी एक साथ स्थानीय भाषाओं को लोगों, खासकर युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए कार्य करें । उन्होंने उन पहाड़ी भाषाओं पर भी प्रकाश डाला जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया और अपने घर में स्थानीय बोलियां सिखाने का आग्रह किया। डॉ. कौशल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों के साथ-साथ हमें स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर पहाड़ी भाषा में अधिक से अधिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट मीडिया के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।</p>
<p>डॉ. सूरत ठाकुर ने &#8216;वर्तमान संदर्भ में हिमाचली बोलियाँ और नई शिक्षा नीति&#8217; पर एक शोध पत्र प्रस्तुत किया। डॉ. ठाकुर ने कहा कि पहाड़ी भाषा में साहित्य का प्रकाशन हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी विदेशी भाषा सीखने के लिए उत्सुक है लेकिन स्थानीय भाषाओं और बोलियों की स्थिति उदासनीय है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से स्थानीय भाषाओं में पढ़ाने में मदद मिलेगी। मदन हिमाचली ने अपने संबोधन में कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य के लेखक और विद्वान पहाड़ी भाषा पर आम सहमति बनाने के लिए एक साथ कार्य करें। कार्यक्रम के दौरान अमर देव अंगिरस द्वारा लिखित दो पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर डीआरओ सोलन केशव राम भी मौजूद रहे। लेखक डॉ प्रत्यूष गुलेरी, रमेश मस्ताना, प्रभात शर्मा, प्रेम लाल गौतम, कमल के प्यासा, कृष्ण चंद महादेविया, रामलाल पाठक, डॉ ओ पी शर्मा, कुलदीप शर्मा, डॉ अश्वनी गर्ग, अनंत आलोक, अरुण डोगरा रितु, दिवेन्द्र गौड़, जगजीत आजाद, जगदीश कश्यप, डॉ हुक्म शर्मा, रविंदर कुमार ठाकुर, सविता ठाकुर, हरिप्रिया भी इस कार्यक्रम में शामिल हुये।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/11/01/pahari-language-event-at-uhf-nouni/">युवाओं में विलुप्त हो रही पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जरूरी- डॉ. कौशल</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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