<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>नौणी विवि Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<atom:link href="https://hindi.himachalwatcher.com/tag/%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A3%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/नौणी-विवि/</link>
	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
	<lastBuildDate>Wed, 29 Dec 2021 05:28:15 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://hindi.himachalwatcher.com/wp-content/uploads/2025/05/HW-Logo-80x80.png</url>
	<title>नौणी विवि Archives - हिमाचल वॉचर</title>
	<link>https://hindi.himachalwatcher.com/tag/नौणी-विवि/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे  76,000 से अधिक सेब के पौधे</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/29/dr-yashwant-singh-parmar-university-of-horticulture-and-forestry-nauni/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Dec 2021 05:28:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[नाबार्ड]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विवि]]></category>
		<category><![CDATA[पहाड़ी कृषि]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=14984</guid>

					<description><![CDATA[<p>शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/29/dr-yashwant-singh-parmar-university-of-horticulture-and-forestry-nauni/">हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे  76,000 से अधिक सेब के पौधे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय  में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।</p>
<p>इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।</p>
<p>संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।</p>
<p> उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।</p>
<p>डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह  भी  कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया। </p>
<p>अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।</p>
<p> डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/12/29/dr-yashwant-singh-parmar-university-of-horticulture-and-forestry-nauni/">हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे  76,000 से अधिक सेब के पौधे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नौणी विवि ने विभिन्न कार्यक्रमों में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ाई</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/13/%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a3%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Oct 2021 09:09:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि]]></category>
		<category><![CDATA[जैव प्रौद्योगिकी]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विवि]]></category>
		<category><![CDATA[विश्वविद्यालय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=13732</guid>

					<description><![CDATA[<p>सोलन-डॉ. वाई एस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए बागवानी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि व्यवसाय और व्यापार प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने के इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय के एडमिशन पोर्टल  पर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/13/%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a3%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d/">नौणी विवि ने विभिन्न कार्यक्रमों में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ाई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>डॉ. वाई एस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए बागवानी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि व्यवसाय और व्यापार प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने के इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय के<a href="https://www.yspuniversity.ac.in/yspuniversity/"> एडमिशन पोर्टल</a> <a href="https://www.yspuniversity.ac.in/yspuniversity/%C2%A0"> </a>पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं।</p>
<p>इस वर्ष, बीएससी (ऑनर्स) बागवानी, बीएससी (ऑनर्स) वानिकी और बीटेक जैव प्रौद्योगिकी की सामान्य सीटों में एडमिशन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ICAR AIEEA (UG) 2021 परीक्षा के स्कोर पर मिलेगी। जबकि एमएससी, एमबीए (कृषि व्यवसाय) और पीएचडी की सामान्य और स्व-वित्तपोषित सीटें पर प्रवेश क्रमशः ICAR AIEEA (PG) और AICE-JRF/SRF में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। जिन उम्मीदवारों ने आईसीएआर परीक्षा नहीं दी है, वह भी स्नातक कार्यक्रमों की स्व-वित्तपोषित सीटों के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p>विश्वविद्यालय ने सभी रजिस्टर्ड छात्रों से आग्रह किया है कि नियत तारीख से पहले ऑनलाइन आवेदन पत्र और ऑनलाइन भुगतान रसीद एडमिशन पोर्टल पर अपलोड कर दें। आईसीएआर परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा वेबसाइट पर ऑनलाइन काउंसलिंग के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। ऑनलाइन मोड के अलावा अन्य किसी भी प्रकार का आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/13/%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%a3%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d/">नौणी विवि ने विभिन्न कार्यक्रमों में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ाई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पहाड़ी खेती की बारीकियां जानने के लिए नौणी विवि के 51 बागवानी छात्र करेंगे किसानों के साथ काम</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/20/51-uhf-nauni-horticulture-students-to-work-with-farmers-in-rawe-programme/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Sep 2021 16:27:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विवि]]></category>
		<category><![CDATA[रुरल अवेयरनेस वर्क एक्सपिरियन्स]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=13479</guid>

					<description><![CDATA[<p>सोलन&#8211; किसानों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और उनके द्वारा अपनाई जाने वाली कृषि तकनीकों से छात्रों को परिचित करवाने के उद्देश्य से डॉ॰ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के बीएससी औद्यानिकी के अंतिम वर्ष के 51 छात्र चार सप्ताह के रुरल अवेयरनेस वर्क एक्सपिरियन्स (Rural Awareness Work Experience (RAWE) प्रोग्राम के लिए रवाना [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/20/51-uhf-nauni-horticulture-students-to-work-with-farmers-in-rawe-programme/">पहाड़ी खेती की बारीकियां जानने के लिए नौणी विवि के 51 बागवानी छात्र करेंगे किसानों के साथ काम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन</strong>&#8211; किसानों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और उनके द्वारा अपनाई जाने वाली कृषि तकनीकों से छात्रों को परिचित करवाने के उद्देश्य से डॉ॰ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के बीएससी औद्यानिकी के अंतिम वर्ष के 51 छात्र चार सप्ताह के रुरल अवेयरनेस वर्क एक्सपिरियन्स (Rural Awareness Work Experience (RAWE) प्रोग्राम के लिए रवाना होंगें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मानदंडों के अनुसार रावे प्रोग्राम, डिग्री का अनिवार्य हिस्सा है और छात्रों को कार्यक्रम के दौरान एक वेतनमान भी दिया जाता है।</p>
<p>छात्रों को दो समूहों में बांटा गया है और यह छात्र राज्य के सभी चार कृषि जलवायु क्षेत्रों में किसानों के साथ काम करेंगे। हिमाचल के चार कृषि जलवायु क्षेत्रों कुल्लू, जाछ, चंबा और कंडाघाट में नौणी विवि के क्षेत्रीय अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्र इन छात्रों की मेजबानी करेंगे। एक सप्ताह की अवधि के बाद, छात्र नए जलवायु क्षेत्र में जाएंगे, जिससे निर्धारित अवधि में सभी जलवायु क्षेत्रों को कवर किया जा सकेगा।</p>
<p>प्रत्येक जोन के अंतर्गत गांवों के एक समूह का चयन किया गया है और छात्रों के छोटे उप समूहों को प्रत्येक गांव से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य संस्कृति को समझने के साथ-साथ ग्रामीण, सामाजिक सांस्कृतिक परिस्थिति, ग्रामीण विकास, जलवायु परिवर्तन, पशुपालन, फल, सब्जियां और सहकारी काम के बारे में सीखना है। वैज्ञानिक और किसानों की बीच बातचीत भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगी।</p>
<p>छात्रों को रवाना करने से पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने सभी छात्रों से बातचीत की। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों से इस कार्यक्रम का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। डॉ कौशल ने छात्रों से कहा कि वह खुले दिमाग से जाए, क्योंकि यह उन लोगों से सीखने का एक शानदार अवसर है जो खेतों में बहुत मेहनत करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अंतिम उपयोगकर्ताओं और हमारे जैसे अन्य संस्थानों में विकसित नई और नवीन तकनीकों के सबसे बड़े हितधारकों के साथ बातचीत करने को यह एक सुनहरा मौका है। विश्वविद्यालय के एंबेसडर होने के नाते, आपको किसानों के साथ बातचीत करके, उनकी समस्याओं का विश्लेषण करने और विशेषज्ञों के परामर्श से उन्हें आसानी से लागू होने वाले वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने के इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।</p>
<p>डॉ. कौशल ने कहा कि यह कार्यक्रम विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बागवानी और संबद्ध गतिविधियों के संबंध में ग्रामीण परिवेश को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों से समूह और उनकी मेजबानी करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कोविड़ की रोकथाम ​​​​प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया।</p>
<p>कार्यक्रम समन्वयक डॉ केके रैना ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण परिस्थितियों को समझना, किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने के साथ-साथ किसानों द्वारा अपनाई गई बागवानी प्रौद्योगिकियों की स्थिति को जानना है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास के लिए किसान परिवारों के साथ काम करने के कौशल और दृष्टिकोण को छात्रों में विकसित करना है और ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के लिए कृषि परिवारों के साथ काम करने का रवैया बनाना है</p>
<p>औदयानिकी महाविद्यालय की डीन डॉ. अंजू धीमान ने बताया कि कोविड़ के कारण पढ़ाई के व्यावहारिक पहलू में थोड़ी परेशानी हुई थी, लेकिन इस अवसर का उपयोग महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाना चाहिए और इससे कक्षाओं में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक दुनिया की स्थितियों में लागू करने और कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान छात्रों को पेशेवर रूप से विकसित होने में मदद करेगा। डॉ. हरीश शर्मा, डॉ. एमके ब्रह्मी, डॉ. रश्मी चौधरी, डॉ. प्रमोद वर्मा और डॉ अदितिका शर्मा ने भी छात्रों को संबोधित किया और उनके साथ सुझाव साझा किए।</p>
<p>प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में विस्तार शिक्षण विधियों के उपयोग से छात्रों में संचार कौशल का विकास और उन्हें विस्तारित और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से परिचित करवाना भी रावे प्रोग्राम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। छात्रों को पहले से ही दो सप्ताह के उन्मुखीकरण कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है। रावे से लौटने के बाद छात्रों को 2 महीने के लिए इंडस्ट्री अटैचमेंट भी करवाई जाएगी जिसके बाद प्रत्येक समूह द्वारा किए गए कार्य की रिपोर्ट जमा करनी होगी।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/20/51-uhf-nauni-horticulture-students-to-work-with-farmers-in-rawe-programme/">पहाड़ी खेती की बारीकियां जानने के लिए नौणी विवि के 51 बागवानी छात्र करेंगे किसानों के साथ काम</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नौणी विवि में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस डिप्लोमा करने का सुनहरा अवसर</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/10/uhf-nauni-admissions-open-for-diploma-in-fruit-vegetable-processing-bakery-products/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Sep 2021 15:05:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विवि]]></category>
		<category><![CDATA[फ़ूड प्रोसेसिंग]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindi.himachalwatcher.com/?p=13468</guid>

					<description><![CDATA[<p>सोलन&#8211; डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस पर आधारित एक साल के डिप्लोमा के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह डिप्लोमा विवि के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग द़वारा करवाया जाता है। इस डिप्लोमा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खाद्य प्रसंस्करण और [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/10/uhf-nauni-admissions-open-for-diploma-in-fruit-vegetable-processing-bakery-products/">नौणी विवि में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस डिप्लोमा करने का सुनहरा अवसर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन</strong>&#8211; डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस पर आधारित एक साल के डिप्लोमा के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह डिप्लोमा विवि के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग द़वारा करवाया जाता है। इस डिप्लोमा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खाद्य प्रसंस्करण और बेकरी आइटम के क्षेत्र में अपने उद्यम शुरू करने के लिए प्रशिक्षित करना है।</p>
<p>इस कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं है जबकि इसमें कोई भी आयु सीमा नहीं रखी गई है। इस साल इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए 20 सितम्बर 2021 तक आवेदन किया जा सकता है। कार्यक्रम में कुल 35 सीटें रखीं गई हैं। विश्वविद्यालय की वैबसाइट <a href="http://www.yspuniversity.ac.in">www.yspuniversity.ac.in</a> पर जाकर प्रोस्पेक्टस और एप्लिकेशन फॉर्म डाऊनलोड़ किया जा सकता है।</p>
<p>इस डिप्लोमा कार्यक्रम की फीस सिर्फ पाँच हज़ार रुपये रखी गई है।  आवेदकों को कक्षा 10वीं एवं 12वीं विस्तृत मार्कशीट की प्रतियां, स्कूल के प्रमुख या किसी राजपत्रित अधिकारी या संबंधित ग्राम पंचायत प्रधान से चरित्र प्रमाण पत्र, आरक्षण प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) की स्व-सत्यापित प्रति, बैंक ड्राफ्ट( सामान्य श्रेणी के लिए 100 रुपये और एससी/एसटी के लिए 50 रुपये) के साथ संलग्न करना होगा।</p>
<p>सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन पत्र पंजीकृत या स्पीड पोस्ट द्वारा सहायक रजिस्ट्रार (अकादमिक), रजिस्ट्रार कार्यालय, डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी-सोलन-173 230 को भेजना होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में फॉर्म जमा करवाए जा सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/09/10/uhf-nauni-admissions-open-for-diploma-in-fruit-vegetable-processing-bakery-products/">नौणी विवि में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस डिप्लोमा करने का सुनहरा अवसर</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रक्षा संस्थान डीआरडीओ ने नौणी विवि से खरीदे 30000 गुठलीदार पौधे</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/12/drdo-planting-temperate-fruit-trees-for-armed-forces-in-high-altitude-areas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Feb 2019 13:43:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[गुठलीदार पौधे]]></category>
		<category><![CDATA[डीआरडीओ]]></category>
		<category><![CDATA[नौणी विवि]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.himachalwatcher.com/?p=12285</guid>

					<description><![CDATA[<p>सोलन-हर साल डॉ वाई.एस.परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सेविभिन्न फलों की गुणवत्ता रोपण सामग्री खरीदने के लिए किसानों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। पिछले पाँच वर्षों से कृषक समुदाय के अलावाभारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी॰आर॰डी॰ओ॰)भी विश्वविद्यालय से सेब व अन्य गुठलीदार पौधे [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/12/drdo-planting-temperate-fruit-trees-for-armed-forces-in-high-altitude-areas/">रक्षा संस्थान डीआरडीओ ने नौणी विवि से खरीदे 30000 गुठलीदार पौधे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलन-</strong>हर साल डॉ वाई.एस.परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सेविभिन्न फलों की गुणवत्ता रोपण सामग्री खरीदने के लिए किसानों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। पिछले पाँच वर्षों से कृषक समुदाय के अलावाभारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी॰आर॰डी॰ओ॰)भी विश्वविद्यालय से सेब व अन्य गुठलीदार पौधे कोजम्मू और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के सैन्य क्षेत्रोंमें लगाने के लिए खरीद रहा है।</p>
<p>पिछले पांच वर्षों से डीआरडीओ की एकसंघटक प्रयोगशाला,लेह स्थितउच्च उन्नतांश अनुसंधान रक्षा संस्थान (दिहार),विश्वविद्यालय से सेब एवं गुठलीदार पौधों को खरीद रहा है। इस वर्ष इस प्रतिष्ठितअनुसंधान प्रयोगशाला ने सेब,नाशपती और आड़ू के 6070 पौधे विश्वविद्यालय से खरीदेहैं। पिछले पांच वर्षों में खरीदे गए पौधों की संख्या 30,000 को पार कर गई है। इस रोपण सामग्री का उपयोग जम्मू और कश्मीर के अत्यधिक ठंड और ऊंचाई वाले सैन्य क्षेत्रोंमें किया जाता है।</p>
<p>डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ आनंद कुमार कटियारने बताया कि अत्यधिक ठंड व कठिन इलाकों में सेना के जवानों को ताजे फलों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह पौधे उन स्थानों पर रौपे गए हैं। इसके अलावा, कुछ पौधों को इन क्षेत्रों के किसानों को वितरितभी किया जाता है ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। किसानों द्वारा उनके फलों को आर्मी के काउंटर पर भी बेचा जा सकता है।</p>
<p>डॉ कटियार ने बताया कि परंपरागत रूप सेइन उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत कम फलदार वृक्ष थे। सेब की कुछ जंगली प्रजातियां मौजूद थींलेकिन इनकाफल खराब गुणवत्ता और जल्दी खराब होने वालाथा। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए पौधे अच्छी किस्मों के हैंजो इन परिस्थितियों में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर के नुब्रा घाटी,लेह,कारगिल,कारू क्षेत्रों सहित अन्य स्थानों पर विश्वविद्यालय से खरीदी हुए पौधे रौपे गएहैं। इसके अलावाअरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में भीयह पौधेलगाए गए हैं।</p>
<p>सुरक्षा बलों को ताजे फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावासमुद्र तल से 11000 से 13000 फीट की ऊँचाई पर रौपे गए पौधों पर वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधानकिया जा रहा है जिससे अत्यंत ठंडे क्षेत्रों में किस्मों का निर्धारण करने में मदद मिल सके। इसके अलावा डीआरडीओ के वैज्ञानिक, रक्षा कर्मचारियों और किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।</p>
<p>नौणी विवि के फल विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्षडॉ॰ जे॰एस चंदेल ने बताया कि जिन क्षेत्रों में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा फलों के पौधों का रोपण किया हैं वहाँ विश्वविद्यालय द्वारा आपूर्ति किए पौधेविशेषरूप से सेब ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं। उन्होनें कहा कि विश्वविद्यालय न केवल पौधों की आपूर्ति कर रहा हैबल्कि उच्च उन्नतांश अनुसंधानरक्षा संस्थानके साथ मिलकर शोध कार्य भी कर रहा हैं। </p>
<p>विभिन्न ऊंचाई पर विभिन्न प्रकार के परीक्षणों और दिहार में शून्य ऊर्जा कोल्ड स्टोरेज सेलर जैसे अध्ययनों ने भी इन फलों के पौधों की उत्तरजीविता को बढ़ाने में मदद की है। डॉ॰ चंदेल ने कहा कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों ने संयुक्त शोध प्रत्र भी प्रकाशित किए हैं।</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2019/02/12/drdo-planting-temperate-fruit-trees-for-armed-forces-in-high-altitude-areas/">रक्षा संस्थान डीआरडीओ ने नौणी विवि से खरीदे 30000 गुठलीदार पौधे</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
