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	<title>दयानंद पब्लिक स्कूल Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>दयानंद पब्लिक स्कूल Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>शिमला के निजी स्कूल पर निदेशक के पत्र का झूठा जबाव देकर शिक्षा विभाग को गुमराह करने का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jun 2021 05:45:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- दयानंद पब्लिक स्कूल पर शिक्षा विभाग को गुमराह करने का आरोप लगा है। आरोप है कि  स्कूल ने बिना पीटीए/आम सभा करवाए ही 50% से अधिक फ़ीस वृद्धि कर दी है। यह  आरोप अभिभावक मंच ने लगाए हैं और शिक्षा विभाग से मांग की है कि वह दयानंद स्कूल पर विभाग को गुमराह करने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> दयानंद पब्लिक स्कूल पर शिक्षा विभाग को गुमराह करने का आरोप लगा है। आरोप है कि  स्कूल ने बिना पीटीए/आम सभा करवाए ही 50% से अधिक फ़ीस वृद्धि कर दी है।</p>
<p>यह  आरोप अभिभावक मंच ने लगाए हैं और शिक्षा विभाग से मांग की है कि वह दयानंद स्कूल पर विभाग को गुमराह करने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।और साथ में यह भी कहा है कि अगर शिक्षा विभाग ने दयानंद स्कूल पर कार्रवाई नहीं की तो मंच शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलेगा। मंच ने इस मुद्दे पर 18 जून को शिक्षा निदेशालय के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि दयानंद स्कूल ने शिक्षा निदेशक के पत्र के जबाव का जो उत्तर दिया है,वह झूठा व शिक्षा विभाग को गुमराह करने का प्रयास  है। दयानंद स्कूल को शिक्षा विभाग ने जबाव देने के लिए पांच दिन का समय दिया था परन्तु स्कूल ने जबाव नहीं दिया। इसके बाद मंच की मांग पर शिक्षा विभाग ने दोबारा से पत्र भेज कर जबाव मांगा जिसके बाद ही डेढ़ महीने के बाद स्कूल प्रबंधन ने जबाव दिया।</p>
<p>मंच ने दयानंद स्कूल प्रबंधन के उस तर्क पर गम्भीर सवाल खड़ा किया हैं जिसमें उसने कहा है कि फीस वृद्धि पर पीटीए से सहमति ली गयी है। उन्होंने कहा है कि जब अभिभावकों का जनरल हाउस ही नहीं हुआ है तो पीटीए कब, कैसे और कहां बनी। अगर स्कूल ने सच में ही पीटीए का गठन किया है तो पीटीए के गठन के लिए अभिभावकों को भेजे गए पत्र को सार्वजनिक किया जाये। और स्कूल प्रबंधन पीटीए गठन वाले दिन के जनरल हाउस की कार्यवाही के रजिस्टर को सार्वजनिक किया जाये।</p>
<p>मंच ने कहा है कि यह पीटीए अभिभावकों की अनुपस्थिति में स्कूल प्रिंसिपल के कार्यालय में बनी है जो वास्तव में अभिभावकों की पीटीए नहीं है। यह पीटीए शिक्षा निदेशक के वर्ष 2019 के निर्देशानुसार नहीं बनी है व यह पूर्णतः अमान्य है व अभिभावकों को मंजूर नहीं है।</p>
<p>शिक्षा निदेशक ने 5 दिसम्बर 2019 को फीसों की बढ़ोतरी को लेकर जो अधिसूचना जारी की थी,उसमें केवल अभिभावकों के जनरल हाउस को ही फीसों के संदर्भ में निर्णय लेने की शक्ति दी गयी है व पीटीए को ऐसी कोई भी शक्ति नहीं दी गयी है। स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को यह कह कर गुमराह किया है कि उसने केवल 6  प्रतिशत वृद्धि की है जबकि स्कूल ने पचास प्रतिशत तक फीस वृद्धि की है। स्कूल ने जान बूझ कर यह पचास प्रतिशत वृद्धि टयूशन फीस में की है ताकि टयूशन फीस वसूली में ही स्कूल ज़्यादातर फीस वसूल सके।</p>
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