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	<title>किसान संघर्ष समिति Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>किसान संघर्ष समिति Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>प्रदेश सरकार की विरोधी नीतियों के चलते महंगी व हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने के लिए विवश किसान व बागवान</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2022/02/15/himachal-kisan-sangharsh-samiti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Feb 2022 16:00:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[एचपीएमसी]]></category>
		<category><![CDATA[किसान संघर्ष समिति]]></category>
		<category><![CDATA[संजय चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[हिम्फेड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश में खाद की कमी के चलते किसानों को बाज़ार से महंगी ओर हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी बात की कड़ी निंदा किसान संघर्ष समिति के संयोजक संजय चौहान ने की है। उन्होंने प्रदेश सरकार के किसानों के प्रति उदासीन रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश में खाद की कमी के चलते किसानों को बाज़ार से महंगी ओर हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी बात की कड़ी निंदा किसान संघर्ष समिति के संयोजक संजय चौहान ने की है। उन्होंने प्रदेश सरकार के किसानों के प्रति उदासीन रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद की कमी गंभीर चिंता का विषय है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि किसानों को विशेष रुप से सेब बागवानों को खाद की अत्यंत आवश्यकता है लेकिन सरकार आवश्यकता के अनुसार कोई भी खाद उपलब्ध नहीं करवा रही है और मजबूरन बागवानों को खुले बाजार से महंगी व हल्की गुणवत्ता वाली खाद लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है।</p>
<p>चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से किसान व बागवान विरोधी नीतियों के चलते कृषि व बागवानी के क्षेत्र में सहायता व सब्सिडी में कटौती कर रही है जिससे प्रदेश में कृषि का संकट पैदा हो गया है। सरकार यदि तुरन्त किसानों को उचित कीमत पर मांग अनुसार खाद उपलब्ध नहीं करवाती है तो किसान संघर्ष समिति किसानों को लामबंद कर सरकार की इन किसान व बागवान विरोधी नीतियों व रवय्ये के विरुद्ध संघर्ष करेगी।</p>
<p>समिति ने कहा कि जनवरी व फरवरी माह में हुई बेहतर बर्फबारी के बाद बागवानों को अपने बगीचों में प्राथमिकता से खाद डालने का कार्य करना है। लेकिन आज जिन खादों की आवश्यकता बागवानों को  है सरकार इन्हें उपलब्ध ही नहीं करवा रही है जबकि  खुले बाजार में खादों की कीमतों में गत वर्ष की तुलना में भारी वृद्धि की गई है। </p>
<p>किसान समिति ने बताया कि आज बगीचों में पोटाश, NPK 12:32:16, NPK 15:15:15 डालने का समय आ गया है परन्तु  यह खादें कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है और अब बागवानों को  मजबूर हो कर खुले बाजार से हलकी गुणवत्ता वाली खादें जोकि कृषि व बागवानी विश्विद्यालय या बागवानी विभाग की ओर से अनुमोदित नहीं है उन्हें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।</p>
<p>समीति ने कहा कि  इससे भविष्य में सेब के उत्पादन व उत्पादकता में कमी आएगी जिससे बागवानी का संकट और अधिक गहरा होगा और सेब की आर्थिकी की बर्बादी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी।</p>
<p>संयोजक चौहान ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से आजतक हिम्फेड से  खाद उपलब्ध करवाई जाती रही है,लेकिन सरकार की लचर व्यवस्था के चलते आज हिम्फेड ने समय रहते आवश्यक खादों के आर्डर नहीं दिये गए जिससे आज खाद का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा खाद पर दी जा रही सब्सिडी बन्द करने से खाद की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पिछले साल जो कैल्शियम नाइट्रेट का 25 किलो का एक बैग 1100 ₹ से 1250 रुपये का मिल रहा था वह अब 1300 रुपये से लेकर 1750 रुपए का मिल रहा है।  पोटाश का 50 किलो का एक बैग जो गत वर्ष 1150 रुपए में मिल रहा था उसकी कीमत भी अब 1750 रुपए की जा रही है। NPK 12:32:16 जिसकी कीमत गत वर्ष 1200 रुपए थी उसकी कीमत भी 1750 कर दी गई है बावजूद इसके न तो पोटाश खाद उपलब्ध है और न ही NPK 12:32:16 उपलब्ध है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि एचपीएमसी ने जो बागवानों के बकाया पैसों देना है उसके एवज में वह जबरन जो खाद व अन्य वस्तुएं उपलब्ध करवा रही है वह बाज़ार से भी अधिक कीमतों पर बेचकर बागवानों की लूट कर रही है। सरकार इस पर तुरंत रोक लगाकर बागवानों के बकाया का तुरन्त नकद भुगतान करे।</p>
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		<title>प्रदेश में कार्टन की कीमतों में भारी वृद्धि से बागवानों में रोष, 20 दिन बाद अपने ही बयान से पलटे बागवानी मंत्री</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/23/himachal-pradesh-fruit-carton-price-hike-burdens-horticulturists/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Jun 2021 08:04:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[किसान संघर्ष समिति]]></category>
		<category><![CDATA[बागवानी]]></category>
		<category><![CDATA[बागवानी मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[सेब]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- प्रदेश के किसान व बागवान अत्यंत संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उसपर सरकार के उपक्रम एच पी एम सी  (HPMC) व अन्य एजेंसियों के द्वारा सेब व अन्य फलों की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन की कीमतों में  भारी वृद्धि कर दी गयी है। याद रहे कि इस वर्ष [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/06/23/himachal-pradesh-fruit-carton-price-hike-burdens-horticulturists/">प्रदेश में कार्टन की कीमतों में भारी वृद्धि से बागवानों में रोष, 20 दिन बाद अपने ही बयान से पलटे बागवानी मंत्री</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> प्रदेश के किसान व बागवान अत्यंत संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उसपर सरकार के उपक्रम एच पी एम सी  (HPMC) व अन्य एजेंसियों के द्वारा सेब व अन्य फलों की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन की कीमतों में  भारी वृद्धि कर दी गयी है।</p>
<p>याद रहे कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदा जैसे भारी ओलावृष्टि, वर्षा व बर्फबारी से पहले ही सेब व अन्य फसलों को करीब 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। बागवानों का कहना है कि सरकार ने इसका कुछ आंकलन किया परन्तु आजतक एक भी रुपये का मुआवजा व राहत किसानों व बागवानों को नहीं दी गई है। इस संकट के दौर ने सरकार ने कार्टन व अन्य लागत सामग्री की कीमतों में वृद्धि कर और अधिक आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। बागवानों का कहना है कि यदि सरकार इस प्रकार की किसान विरोधी नीतियां लागू करती रही और किसान की गाढ़ी कमाई को बाज़ार की ताकतो के मुनाफे के लिए बढ़ाती रही तो प्रदेश के लाखों किसान परिवारों का रोजी रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।</p>
<p>गत वर्ष बाज़ार में कार्टन 45 रुपये से 55 रुपये के दामों पर उपलब्ध था। इस वर्ष सरकार ने इसकी कीमत बढ़ाकर 55 रुपये से 75 रुपये तक कर दिया है जोकि 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि है। इससे बागवानों पर करीब 80 से 90 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। बागवानों का कहना है कि इस संकट के दौर में सरकार का कार्टन की दामों में की गई अप्रत्याशित वृद्धि का निर्णय बिल्कुल किसान व बागवान विरोधी है।</p>
<p>किसान संघर्ष समिति ने  इस भारी वृद्धि की कड़ी निंदा की है तथा सरकार से मांग की है कि इस वृद्धि को तुरन्त वापिस ले तथा बागवानों को सस्ती दरों पर समय रहते कार्टन उपलब्ध करवाया जाए।</p>
<p>समिति ने याद दिलाया  कि प्रदेश सरकार के बागवानी मंत्री ने कहा था कि इस वर्ष कार्टन के दामों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी और सरकार बागवानों को पिछले वर्ष के दाम पर ही कार्टन उपलब्ध करवाएगी। परन्तु इस बयान के 20 दिनों बाद ही सरकार ने कार्टन के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि कर बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। समिति का कहना है कि कार्टन के दामों में की गई इस अप्रत्याशित वृद्धि से स्पष्ट हो गया है कि सरकार कार्टन निर्माताओं के दबाव में आकर कार्य कर रही है और सरकार इस तरह के किसान व बागवान विरोधी निर्णय ले रही है।</p>
<p>&#8220;अब जब कार्टन के दामों में भारी वृद्धि की गई है तो ऐसी स्थिति में विशेष रूप से मन्त्री के कार्टन के दामों में वृद्धि न करने का बयान आज बिल्कुल औचित्यहीन हो गया है और इस प्रकार के हल्के बयान से सरकार व मंत्री पद दोनो की ही गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।&#8221; समिति ने कहा।</p>
<p>समिति ने सरकार से मांग की है कि इन किसान विरोधी निर्णयों को तुरन्त बदला जाए और कार्टन व अन्य लागत वस्तुएं सब्सिडी पर सस्ते दामो पर किसानों व बागवानों को उपलब्ध करवाए तथा किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा व सहायता तुरन्त प्रदान कर अपना दायित्व निभाए।</p>
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