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	<title>कालीबाड़ीशिमला Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>कालीबाड़ीशिमला Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>हिमाचल में कृषि संकट के चलते विभिन्न किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मंच बना की सभा, सरकार के सामने रखी ये 10 मांगें</title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/08/30/hp-farmers-organizations-unite-in-fight-against-hp-govt/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Mahender]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Aug 2021 16:45:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला &#8211;विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच के द्वारा आज बैठक शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों व बागवानों की समस्याओं के बारे में चर्चा की गई। इस बैठक में संयुक्त किसान मंच के हरीश चौहान, संजय चौहान, दीपक सिंघा, कुलदीप सिंह तंवर, के. एन. शर्मा, राजेश चौहान, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला &#8211;</strong>विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच के द्वारा आज बैठक शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों व बागवानों की समस्याओं के बारे में चर्चा की गई।</p>
<p>इस बैठक में संयुक्त किसान मंच के हरीश चौहान, संजय चौहान, दीपक सिंघा, कुलदीप सिंह तंवर, के. एन. शर्मा, राजेश चौहान, राजिंदर चौहान, सुशील चौहान, डिम्पल पांजटा, सन्दीप मस्ताना, सोहन ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, एस. एस. जोगटा, जिला परिषद सदस्य विशाल शांगटा, पूर्व जिला परिषद सदस्य, नीलम सेरेक, हरीश जनारथा आदि ने भाग लिया। इस बैठक में विधायक विक्रमादित्य सिंह व राकेश सिंघा ने भी अपने विचार रखे।</p>
<p>आम सहमति से इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि मंच 13 सिंतबर, 2021 को किसान तहसील, ब्लॉक व उपमण्डल स्तर पर प्रदर्शन करेगा। यदि सरकार फिर भी मांगे नहीं मानती है तो 26 सिंतबर, 2021 को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
<p>बैठक में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने  कहा कि प्रदेश में लगभग 89 प्रतिशत जनता गांव में रहती है तथा इसमे अधिकांश का रोजगार व आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि व बागवानी ही है। आज देश मे कृषि संकट के चलते प्रदेश के किसानों व बागवानों का संकट भी बढ़ रहा है। खेती में उत्पादन लागत क़ीमत निरन्तर बढ़ रही है और किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित दाम प्राप्त नहीं हो रहा है। जिससे इनके रोजगार व आजीविका का संकट और अधिक बढ़ रहा है। मौजूदा व्यवस्था में किसानों व बागवानों के उत्पाद की कॉरपोरेट व बागवानी क्षेत्र का संकट और अधिक गहरा हो गया है।</p>
<p>चर्चा के दौरान ये भी कहा गया कि आज सेब प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्थिकी है और इसका करीब 5000 करोड़ रुपए का योगदान प्रदेश की अर्थव्यवस्था में है। इसके मद्देनजर प्रदेश में मंडियों की संख्या तो बढ़ रही है परन्तु सरकार द्वारा जिन संस्थाओं जिनमें ए पी एम सी मुख्य है, को मंडियों के विकास व किसानों के हितों की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है वह अपने दायित्व के निर्वहन में विफल रही है। जिसके फलस्वरूप आज भी मंडियों में किसानों व बागवानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और इनका शोषण बढ़ा है।</p>
<p>वक्ताओं ने  कहा कि आज इन मंडियों में किसानों व बागवानों को एक तो उचित दाम नहीं मिलता है और ए पी एम सी की लचर व्यवस्था के कारण किसानों व बागवानों को कानून के अनुसार समय पर भुगतान भी नहीं किया जाता है। कई किसान व बागवानों को आज भी कई वर्षों से आढ़तियों व खरीददारो द्वारा भुगतान नहीं किया गया है।</p>
<p>बैठक में चर्चा के दौरान वक्ताओं ने हाल ही में शहरी विकास मंत्री द्वारा पराला मण्डी में दिए गए किसान विरोधी उस बयान की भी निंदा की जिसमे उन्होंने कहा कि बाज़ार में दाम सप्लाई व डिमांड ही तय करती है। यह किसान विरोधी बयान है और अदानी, आढ़ती व लदानी के पक्ष का बयान है। प्रदेश के बागवानी मन्त्री इस संकट में बिल्कुल नदारद है उन्हें इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है मुख्यमंत्री को तुरंत उन्हें पद मुक्त कर किसी जिम्मेवार को मंत्री बनाया जाए।</p>
<p>किसानों व बागवानों की समस्याओं के कारण पैदा हुए इस कृषि संकट के चलते संयुक्त किसान मंच द्वारा निम्न मांगो पर सहमति बनाई गई:</p>
<ol>
<li>प्रदेश में अदानी व अन्य कंपनियों तथा मण्डियों में किसानों के शोषण पर रोक लगाए व हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाये।</li>
<li>प्रदेश की विपणन मण्डियों में ए पी एम सी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए। जिन किसानों से यह वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।</li>
<li>किसानों के आढ़तियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में ए पी एम सी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।</li>
<li>सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस की जाए।</li>
<li>प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार मुआवजा देकर राहत प्रदान करे।</li>
<li>बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए।</li>
<li>प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य फसले वजन के हिसाब से बेची जाए।</li>
<li>HPMC और HIMFED द्वारा गत वर्षों में लिए गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए।</li>
<li>खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।</li>
<li>कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की बकाया सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाये।</li>
</ol>
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