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	<title>उठाऊ पेयजल योजना Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>अश्वनी खड्ड में दोगड़ा पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के विरोध में आए स्थानीय लोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Feb 2022 11:56:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[अश्वनी खड्ड]]></category>
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		<category><![CDATA[डॉ कुलदीप सिंह तंवर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- पुजारली, ढमेची, क्वालग-मझार, क्यार, सेरी, सिंयुठा, भाट गावों को पानी की सप्लाई देनी वाली अश्वनी खड्ड में दोगड़ा पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को लेकर स्थानीय लोगों ने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड के फैसले पर आपत्ति जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर स्थनीय देव बड़मू देवता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong>  पुजारली, ढमेची, क्वालग-मझार, क्यार, सेरी, सिंयुठा, भाट गावों को पानी की सप्लाई देनी वाली अश्वनी खड्ड में दोगड़ा पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने को लेकर  स्थानीय लोगों ने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड के फैसले पर आपत्ति जताई है।</p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर स्थनीय देव बड़मू देवता और काली माता का मंदिर है और साल में दो बार यहां 4-5 पंचायतें मिलकर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करती हैं। वहीं ट्रीटमेंट प्लांट की प्रस्तावित जगह के आसपास ही शमशानघाट और उठाऊ पेयजल योजना भी है।</p>
<p>लोगों ने बताया कि उठाऊ पेयजल योजना से पुजारली, ढमेची, क्वालग-मझार, क्यार, सेरी, सिंयुठा, भाट गावों को पानी की सप्लाई होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड (एसजेपीएनएल) से भी इस बारे में आग्रह किया था लेकिन कंपनी स्थान बदलने के लिए तैयार नहीं हुई।</p>
<p>हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने बताया कि किसान सभा की टीम ने मौके का दौरा किया है और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रस्तावित स्थान का जायज़ा लेने के बाद ग्रामीणों की ओर सेजताई गई आपत्तियों को भी सुना।</p>
<p>डॉ. तंवर ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में कोई भी सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने या वहां के जल स्रोतों से उठाऊ पेयजल योजना बनाने के लिए स्थानीय लोगों और पंचायत की सहमति लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी या सरकार ऐसा नहीं करती तो वन अधिकार कानून के तहत पंचायत को अधिकार है कि वह ऐसी कोई भी परियोजना अपने क्षेत्र में लगाने से रोके।</p>
<p>किसान सभा ने कहा कि शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड कम्पनी के रुख से ऐसा लगता है कि वह ठेकेदार की सुविधा और उसको फायदा पहुंचाने की मंशा से निर्धारित स्थान पर ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए अडी़ है।</p>
<p>सभा ने यह भी बताया कि कम्पनी को स्थानीय जनता की धार्मिक, सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनी से बात करके मसले को हल करने की कोशिश की जाएगी अगर कम्पनी अपनी ज़िद्द नहीं छोड़ती तो इसके लिए कानून का भी सहारा लिया जाएगा।</p>
<p>डॉ. तंवर ने कहा कि किसान सभा चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों की भी सिवरेज क्नेक्टिविटी हो इसलिए सिवरेज किसान सभा इसके खिलाफ नहीं है लेकिन स्थान का निर्धारण स्थानीय लोगों की सहमति से होना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने बताया कि शिमला नगर निगम की ओर से स्थापित किए गए 6 सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ( बड़ागांव-रझाणा, बडेयां-ढली, मल्याणा, बर्मू, गोल्छा-भौंट, समरहिल) का अनुभव है कि इससे प्लांट के इर्दगिर्द के बाशिंदों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p>विशेषतौर पर बरसात के दिनों में बिना ट्रीटमेंट के टैंकों से पानी छोड़ दिया जाता है जिससे न केवल बदबू उठती है बल्कि यह जलस्रोतों को दूषित करके बीमारियां भी फैलाता है।इसलिए तमाम सुरक्षा उपायों और स्थानीय जनता की राय का ध्यान रखते हुए ही ऐसे फैसले लिए जाए।</p>
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