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	<title>आशीष कोहली Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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		<title>शिमला: कच्ची घाटी हादसे के बाद क्या होगा इलाके की बहुमंजिला इमारतों का भविष्य, निगम आयुक्त से खास बातचीत</title>
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		<pubDate>Sat, 09 Oct 2021 16:20:26 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला</strong>&#8211; शिमला के कच्चीघाटी में कुछ दिनों पहले एक बहुमंजिला ईमारत गिर गई थी। जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र में काफी अफरा तफरी मच गयी थी। इस बहुमंजिला इमारत के गिरने से कई लोग घर से बेघर हो गए थे, और आस पास की इमारतों को भी काफी नुकसान पहुंचा था। इस इमारत को गिरने से पहले ही खाली करवा दिया गया था, क्योंकि इसमें दरारें आ गयी थी। भवन में रह रहे आठ परिवारों के लोगों को दूसरी जगह स्थांनांतरित कर दिया था। नगर निगम ने वहां पर कुछ भवनों को गिराने के आदेश भी दिए हैं। सवाल ये उठता है कि क्या ये भवन वैध हैं और नगर निगम की पूरी अनुमति लेकर बनाये गए हैं ? ऐसे कई तरह के सवालों को लेकर हिमाचल वॉचर ने नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली से बातचीत की।</p>
<p>आशीष कोहली ने बताया कि कच्ची घाटी में जो इमारत गिरी है उस इमारत के ऊपर की तरफ दो ऐसी इमारतें हैं जिनकी नींव खराब हो चुकी है। उनके गिरने का भी काफी खतरा बना हुआ है, इसलिए इन इमारतों को गिराने के आदेश दिए गए हैं। कोहली ने कहा कि सरकार की तरफ से भी एक कमेटी गठित की गयी है जिसमे जिलाधीश ,डायरेक्टर टीसीपी ,एमसी  कमिशनर, एसइ पीडब्ल्यूडी शामिल हैं।</p>
<p><iframe title="कच्ची घाटी हादसे के बाद क्या होगा इलाके की बहुमंजिला इमारतों का भविष्य, निगम आयुक्त से खास बातचीत" width="740" height="416" src="https://www.youtube.com/embed/vWOvDVcVykY?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>उन्होंने कहा कि इस कमेटी ने कच्ची घाटी क्षेत्र का सर्वे किया और उसके उपरांत एक टेक्निकल टीम ने भी इस क्षेत्र का सर्वे किया। सर्वे के उपरांत पाया गया कि चार इमारतों को गिराया जाना चाहिए, ताकि जो आस पड़ोस में लोग रह रहे हैं उनको भी कोई खतरा न हों। साथ ही एक भवन को खाली करने के आदेश भी दिए गए थे।</p>
<p>कोहली ने कहा कि नगर निगम ने भवन मालिकों को अपने स्तर पर असुरक्षित भवन गिराने के नोटिस दिए थे और यह भी कहा गया था कि अगर भवन मालिक भवनों को नहीं गिराते हैं तो सरकार अपने स्तर पर इन असुरक्षित भवनों को गिराएगी। उन्होंने कहा है कि इसके खिलाफ भवन मालिकों ने अपनी तरफ से टेक्निकल रिपोर्ट दी है कि उनके भवन सुरक्षित हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भवन मालिकों को मुआवजा नहीं दिया जायेगा क्योंकि एमसी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अगर कोई भवन असुरक्षित हो जाता है तो उसे तोडा ही जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भवनों को तकनीकी तरीके से गिराया जायेगा ताकि आस-पास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे। कोहली ने कहा है कि इन भवनों को गिराने के लिए पीडब्ल्यूडी को शामिल करके ही यह काम पूरा किया जायेगा क्योंकि उन्ही के पास उपकरण तथा विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रक्चर इंजनीयर, आईआईटी मंडी (IIT Mandi), एनआईटी हमीरपुर (NIT Hamirpur) और पीडब्ल्यूडी (PWD) के आर्किटेक्टर से भी यहां मूल्यांकन  करवाया जा रहा है।</p>
<p>जब आयुक्त से पूछा गया कि क्या कच्ची घाटी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि जब शिमला शहर का निर्माण हो रहा था तो शिमला का सारा मलबा वहां फेंका जाता था,तो  इस सवाल का जवाब देते हुए कोहली ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के हिसाब से उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। अगर बीस साल पहले देखा जाये तो यह क्षेत्र पहले नगर निगम में रहा उसके बाद नगर पंचायत टूटू में चला गया और उसके बाद साडा (SADA) में चला गया।  ऐसे ही यह क्षेत्र बदलता रहा। उन्होंने यह भी कहा कि इस खतरे वाले क्षेत्र का पता लगाने के लिए राज्य भूविज्ञान विभाग के कुछ भू-वैज्ञानिकों को भी इसमें शामिल किया गया है लेकिन अभी उनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। आयुक्त से पूरी बातचीत ऊपर दिए वीडियो में देखी जा सकती है।</p>
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