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	<title>आरएसएस Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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	<description>एक सामाजिक जागृति</description>
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	<title>आरएसएस Archives - हिमाचल वॉचर</title>
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		<title>विश्वविद्यालय को आरएसएस का अड्डा बनाने का कुलपति सिंकदर को मिला ईनाम:एनएसयूआई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[हिमाचल वॉचर]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Mar 2022 04:53:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
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		<category><![CDATA[कुलपति सिंकदर एनएसयूआई]]></category>
		<category><![CDATA[छात्र राजनीती]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों मे भगवाकरण का आरोप प्रदेश सरकार पर लगाया हैं। भाजपा की ओर से एचपीयू के कुलपति को राज्यसभा का उमीदवार बनाने पर प्रदेश सरकार ओर भाजपा नेतृत्व को आडे़ हाथ लेते हुए एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा की एनएसयूआई बीते [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों मे भगवाकरण का आरोप प्रदेश सरकार पर लगाया हैं। भाजपा की ओर से एचपीयू के कुलपति को राज्यसभा का उमीदवार बनाने पर प्रदेश  सरकार ओर भाजपा नेतृत्व को आडे़ हाथ लेते हुए एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा की एनएसयूआई बीते कई दिनों से प्रदेश विश्वविद्यालय में भगवाकरण को  बढ़ावा दिया जाने के खिलाफ मुखर थी।</p>
<p>छत्तर ठाकुर ने बताया की एनएसयूआई ने लगातार कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था,जिसमें उन्होंने कुलपति  की योग्यता के खिलाफ लगातार प्रश्न चिन्ह उठाए थे। </p>
<p>वहीं कुलपति के बेटे की फर्जी तरीके से यूजीसी के नियमों के खिलाफ जाकर पीएचडी में दाखिले, इसके अलावा प्रदेश विश्वविद्यालय मे 160+ प्रोफेसरों, गैर शिक्षक वर्ग व आउटसोर्स के माध्यम से सैकडो़ भर्तीयां प्रदेश विश्वविद्यालय में की गई, जिनमें यूजीसी के नियमों की धजियां उडा़ई गई, नियमों को ताक पर रख कर गलत तरीके से कई साक्षात्कार किए गए, विश्व विद्यालय के बुनियादी ढांचे के विकास मे कई घोटाले बाजी की गई, सैनिटाइज़र मशीनों के नाम पर घोटालेबाजी की गई,एनएसयूआई ने इन सभी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जिसके लिए एनएसयूआई के तीन पदाधिकारियों को असवैधांनिक तरीके से विश्वविद्यालय से निष्कासित भी किया गया। </p>
<p>उन्होंने कहा कि एनएसयूआई के लगातार इन सभी मुद्दों को उठाने के बाद  चुनावी वर्ष आते ही अब कुलपति को शिक्षा विभाग से हटा दिया गया। </p>
<p>एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष ने बताया की वाईस चांसलर को राज्यसभा भेजा जाए या लोकसभा लेकिन प्रदेश मे सता परिवर्तन तय है और सरकार बदलते ही प्रदेश सरकार से इन सभी गलत तरीके से हुई भर्तियों की ओर विश्वविद्यालय में हुई घोटालेबाजी की जांच करा कर, दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करवाई जाएगी। </p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2022/03/22/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%8f%e0%a4%b8/">विश्वविद्यालय को आरएसएस का अड्डा बनाने का कुलपति सिंकदर को मिला ईनाम:एनएसयूआई</a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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		<title>पहले जो पीएचडी एंट्रेंस पास करने के योग्य नहीं उन्हे बनाया प्रोफेसर, अब शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों को बिना एंट्रेंस के पीएचडी में दाखिला: एसएफआई  </title>
		<link>https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/18/hp-university-phd-admissions-to-children-of-teachers-and-non-teachers-without-entrance-exam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Madan]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Oct 2021 13:57:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैम्पस वॉच]]></category>
		<category><![CDATA[spotlight]]></category>
		<category><![CDATA[आरएसएस]]></category>
		<category><![CDATA[एनएसयूआई]]></category>
		<category><![CDATA[एसएफआई]]></category>
		<category><![CDATA[पीएचडी एडमिशन]]></category>
		<category><![CDATA[हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला- सभी छात्र संगठनों ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों बिना एंट्रेंस या नेट/जेआरफ पास किये पीएचडी (Ph.D) में एडमिशन देने पर घेर लिया है। याद दिल दें के इन बच्चों में कुलपति का अपना लाड़ला भी शामिल है।  इसके अलावा यूआईआईटी के निदेशक, डीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के बच्चों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/18/hp-university-phd-admissions-to-children-of-teachers-and-non-teachers-without-entrance-exam/">पहले जो पीएचडी एंट्रेंस पास करने के योग्य नहीं उन्हे बनाया प्रोफेसर, अब शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों को बिना एंट्रेंस के पीएचडी में दाखिला: एसएफआई  </a> appeared first on <a href="https://hindi.himachalwatcher.com">हिमाचल वॉचर</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला-</strong> सभी छात्र संगठनों ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों बिना एंट्रेंस या नेट/जेआरफ पास किये पीएचडी (Ph.D) में एडमिशन देने पर घेर लिया है। याद दिल दें के इन बच्चों में कुलपति का अपना लाड़ला भी शामिल है।  इसके अलावा यूआईआईटी के निदेशक, डीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के बच्चों को सीधे पीएचडी में प्रवेश दे दिया गया है।</p>
<p>आज एसएफआई (SFI) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पीएचडी में विश्वविद्यालय के शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों व विश्वविद्यालय में जो शिक्षक भर्ती हुए हैं उनको बिना प्रवेश परीक्षा के पीएचडी में प्रवेश देने के निर्णय का विरोध किया है।</p>
<p>एचपीयू कुलपति और निदेशक के बच्चों को नियमों के खिलाफ पीएचडी में दाखिले के खिलाफ एनएसयूआई (NSUI) ने भी मोर्चा खोला दिया है। दाखिलों को रद्द करने की मांग को लेकर एनएसयूआई नें सोमवार को कुलसचिव व डीन स्टडीज की अनुपस्थिति में परीक्षा नियंत्रकक को ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई नें चेतावनी दी है कि अगर फ़र्ज़ी दाखिले रद्द न हुए तो उग्र आंदोलन होगा।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें :</strong> <a href="https://hindi.himachalwatcher.com/2021/10/17/hp-university-phd-admission-2021-21-irregularities/">विश्वविद्यालय का नया कारनामां, पीएचडी में अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट/जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा दिया दाखिला, अभाविप (ABVP) नें किया विरोध   </a></p>
<p>एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 अगस्त 2021 को हुई EC की मीटिंग में निर्णय लिया था कि  विश्वविद्यालय मे जो शिक्षक है वो बिना एंट्रेंस टेस्ट दिए सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते है । इसके साथ साथ इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चो को एक लाख फीस के साथ बिना एंट्रेंस के पीएचडी में एडमिशन दी जाएगी।</p>
<p>विश्वविद्यालय में मिनिमम क्राइटेरिया (minimum criteria) के आधार पर शिक्षकों की भर्तियां करवाई गई है जिसमें बीजेपी व आरएसएस के लोगो को जो प्रोफेसर भर्ती के लिए क्राइटेरिया पूरा नहीं करते थे उनको धांधलियां कर विश्वविद्यालय में भर्ती किया गया है। अब इस निर्णय के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन उन शिक्षकों को बिना एंट्रेंस टेस्ट क्वालीफाई किए पीएचडी करवाना चाहता है । इन शिक्षकों पर सवाल उठता है कि क्या यह शिक्षक पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए एंट्रेंस क्वालीफाई करने के योग्य है या नहीं है यदि नहीं तो ये शिक्षक किस तरह आने वाले समय में जो छात्र एंट्रेंस क्वालीफाई करके पीएचडी में एडमिशन लेगा तो ये शिक्षक उन्हें किस तरह की पीएचडी करवाएंगे ।</p>
<p>दूसरी ओर शिक्षक व गैर शिक्षकों के बच्चों को बिना एंट्रेंस के पीएचडी में एडमिशन दिलवाकर शोध के स्तर को गिराया जा रहा है व जो छात्र पीएचडी में एडमिशन लेने के लिए मेहनत कर रहा है नेट/जेआरएफ/सेट क्वालीफाई कर रहा है उनके साथ दोगला व्यहवार किया जा रहा है । एसएफआई मांग करती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने EC की मीटिंग में जो निर्णय लिए है उन्हें तुरंत वापिस लिया जाए व जिन छात्रों की एडमिशन इस निर्णय के माध्यम से करवाई गई है उन्हें तुरंत रद्ध किया जाए। अगर इन निर्णयों को वापिस नहीं लिया जाता तो एसएफआई आम छात्रों को लामबंद करते हुए पूरे प्रदेश में एक उग्र आंदोलन करेगी जिसका खामियाजा प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को भुगतना पड़ेगा।</p>
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