ऊना के युवा उद्यमी ने मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों से बनाई जैविक अगरबत्ती, न चारकोल, न सिंथेटिक रसायन

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Organic incense from flowers by Himachal start-up

सोलन-जल्द ही लोग बाज़ार से धार्मिक स्थलों पर चढ़ाए गए फूलों से तैयार शुद्ध जैविक अगरबत्ती खरीद पाएगें। ऊना के युवा उद्यमी रविंदर प्राशर ने अपने ‘युवान’ अभियान के तहत डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में मंदिरों में चढ़ने वाले पवित्र फूलों से जैविक अगरबत्ती विकसित की है।

मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत समर्थित इस आइडिया का उद्देश्य पूजा स्थलों पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए फूलों के निपटान की समस्या का एक समाधान प्रदान करना है। इसके अलावा,धार्मिक स्थलों और समारोह में इस्तेमाल होने वाले इन फूलों को भी अगरबत्ती में बदलकर एक नया रूप मिल जाता है और यह व्यर्थ नहीं होते।

Dr HC Sharma, UHF VC launching the organic incense sticks

बिट्स पिलानी से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी कर चुके रविंदर ने एमबीए के अंतिम सेमेस्टर के दौरान- युवान वेंडरस के नाम से कंपनी को पंजीकृत किया था। इसके बाद उन्होंने अपने इस आइडिया को लेकर मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना में आवेदन किया और अनुमोदन पर नौणी विवि के फ्लॉरिकल्चर और लैंडस्केप आर्कीटेकचर विभाग उन्हें इनक्यूबेटर के रूप में आवंटित किया गया। विश्वविद्यालय में उन्होनें अपने मैंटर डॉ भारती कश्यप, डॉ वाईसी गुप्ता और डॉ मनोज वैद्य के वैज्ञानिक इनपुट और सलाह से इस अगरबती का विकास किया गया। उत्पाद का परीक्षण विश्वविद्यालय के फ्लोरल क्राफ्ट लैब में किया गया।

इस प्रक्रिया में फूलों से प्राकृतिक भागों और आवश्यक तेलों का उपयोग किया जाता है ताकि जैविक अगरबती तैयार की जा सके। इसमें कोई चारकोल या किसी अन्य सिंथेटिक रसायन नहीं डाले जाते। इसके अलावा अगरबती बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कार्बन नेऊट्रल है क्योंकि इस प्रक्रिया से कोई अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है और यहां तक ​​कि फूलों के अप्रयुक्त भागों का उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने गुलाब, चन्दन और लैवेंडर सहित पांच तरह की अगरबती का विकास किया है जो ग्राहकों को बाज़ार में जून से उपलब्ध होंगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एचसी शर्मा ने हाल ही में रोज़ फेस्टिवल के दौरान इस अगरबत्ती का प्रमोचन किया। रविंदर ने इस उत्पाद को बनाने में उनके मार्गदर्शन और समर्थन करने के लिए मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना, विश्वविद्यालय और इसके वैज्ञानिकों और अपने परिवार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके ‘युवान’ अभियान का उद्देश्य मंदिरों में चढ़ाए गए पवित्र फूलों को खुले क्षेत्रों और नालों में फेंकने का एक विकल्प प्रदान करना है।  विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एचसी शर्मा ने रविंदर और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि युवा उद्यमियों को नवीनतम विचारों के साथ आगे आते देखना बहुत ही सराहनीय है।

इन नए विचारों से न केवल नए रोजगार मिलते हैं बल्कि समाज की कई समस्याओं का भी समाधान होता है। डॉ शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय नियमित रूप से किसानों को सूचना के प्रसार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से नए उद्यम स्थापित करने में मदद करता है और भविष्य में भी इस तरह की पहल का समर्थन करता रहेगा। उनके अनुसार कृषि पेशे को और अधिक सम्मान देने के लिए लोगों, विशेष रूप से युवाओं को, इस क्षेत्र में उद्यमिता अपनानी होगी।

मुख्यमंत्री की स्टार्टअप योजना में संभावित उद्यमियों को व्यावहारिक ज्ञान,अभिविन्यास प्रशिक्षण और उद्यमी मार्गदर्शन दिया जाता है। मेजबान संस्थान द्वारा परियोजना की सिफारिश और अधिकारित समिति द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद एक वर्ष के लिए मासिक समर्थन भत्ता भी दिया जाता है। वर्ष 2017 में नौणी विवि में इस योजना के तहत एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया था। इनक्यूबेशन सेंटर सलाहकार सेवाएं प्रदान करके स्टार्टअप और नवाचार का समर्थन करते हैं और इसकी प्रयोगशालाओं और सुविधाओं को भी मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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