Annual Private School Business in Himachal pradesh

शिमला-छात्र अभिभावक मंच नें आज एक प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी कर कहा कि निजी स्कूल हिमाचल प्रदेश में सालाना 1000 हज़ार 200 करोड़ रुपये के व्यापार कर रहे हैं।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के नाम पर खुला व्यापार चल रहा है। प्रदेश में निजी स्कूलों में फीसों के नाम पर व्यापार लगभग 1000 हज़ार 200 करोड़ रुपये का है जिसमें शुद्ध मुनाफा लगभग 525 करोड़ रुपये का है।

मेहरा ने कहा कि अभिभावकों पर हर वर्ष किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों के नाम पर भी अभिभावकों को बुरी तरह से ठगा जा रहा है। इन चीजों की बिक्री पर कम से कम 10 से लेकर 300 प्रतिशत तक की कमीशनखोरी है।

निजी स्कूलों में किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों में प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये अभिभावकों से किताबों,ड्रेस व स्कूल कार्यक्रमों की कमीशन के रूप में वसूले जा रहे हैं। इस तरह फीसों के रूप में निजी स्कूलों द्वारा 525 पच्चीस करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी में कमीशनखोरी के 100 करोड़ जोड़ दिए जाएं तो प्रतिवर्ष शुद्ध मुनाफा 625 करोड़ रुपये हो जाता है। मंच का का कहना है कि इस तरह पूरा शिक्षा तंत्र एक बाजार में तब्दील हो गया है जिसे प्रदेश सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को संचालित करने के लिए निजी शिक्षण स्थान(नियामक आयोग) अधिनियम 2010 लागू किया गया लेकिन निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए कोई रेगुलेटरी कमीशन नहीं बनाया गया। अगर शिक्षा के इस बाजार पर रोक लगानी है ताकि शिक्षा अधिकार के बजाए विशेषाधिकार न बने तो फिर ठोस कानून ही इस शिक्षा माफिया पर नकेल लगा सकता है।

अभिभावकों कि मांग है कि इसलिए प्रदेश सरकार को अगले विधानसभा सत्र में हर हाल में निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए ठोस कानून पटल पर प्रस्तुत करना चाहिए ताकि शिक्षा के व्यापारीकरण पर रोक लग पाए।

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