Private schools in Shimla interviewing parents before admission

शिमला- छात्र अभिभावक मंच ने आज सेंट एडवर्ड स्कूल हिमलैंड पर प्रदर्शन किया। छात्र अभिभावक मंच ने कहा कि सेंट एडवर्ड स्कूल न केवल फीसों,यूनिफॉर्म,किताबों,पिकनिक,ट्रिप,टूअर,एनुअल फंक्शन के नाम पर भारी लूट कर रहा है अपितु यह स्कूल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णयों की भी खुली अवहेलना कर रहा है जोकि उच्च न्यायालय की हाल ही कि लताड़ से भी स्पष्ट है।

मंच ने कहा कि यह स्कूल हर वर्ष हज़ारों रुपये की फीस बढ़ोतरी कर रहा है। इसके अलावा शिक्षा का अधिकार कानून 2009 व मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वर्ष 2014 की गाइडलाइनज़ का खुला उल्लंघन कर रहा है तथा बच्चों व उनके अभिभावकों का इंटरव्यू करके प्रवेश प्रक्रिया में इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है जबकि क़ानून इंटरव्यू सिस्टम पर रोक लगाता है तथा इसे बच्चों व अभिभावकों की मानसिक प्रताड़ना करार देता है।

मंच ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय वर्ष 2014 में अपनी अधिसूचना के ज़रिए स्पष्ट कर चुका है कि शिक्षा का अधिकार कानून प्राइवेट स्कूलों व भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत स्थापित अल्पसंख्यक संस्थानों पर भी लागू होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की केपिटेशन फीस,सिक्योरिटी व सेफ्टी आदि को मॉनिटर करने के लिए भी शिक्षा का अधिकार कानून में प्रावधान किया है।

मंच के सदस्यों ने सेंट एडवर्ड स्कूल के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शन को मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व हिमी देवी ने सम्बोधित किया। मंच ने फीसों के सन्दर्भ में 27 अप्रैल 2016 तथा पार्किंग व्यवस्था सहित बच्चों की सेफ्टी व सिक्योरिटी के संदर्भ में हाल ही में दिए गए हिमाचल उच्च न्यायालय के दोनों निर्णयों को लागू करने की मांग की। मंच ने घोषणा की है कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय में होने वाले विशाल धरने में सांडों लोग भाग लेंगे।

उन्होंने कहा है कि 15 अप्रैल 2018 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सेफ्टी व सिक्योरिटी को सुनिश्चित करने के लिए निजी शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधनों को जवाबदेह बनाने के लिए दिशानिर्देश दिए थे। इसके तहत माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार व प्रदेश सरकारों को निर्देशित किया था कि छः महीनों के भीतर इन संस्थानों को मॉनिटर करने के लिए नियम बनने चाहिए और ये लागू होने चाहिए। इसके साथ ही 27 अप्रैल 2016 को हिमाचल उच्च न्यायालय ने फीसों को संचालित करने,एडमिशन फीस व बिल्डिंग फंड पर रोक लगाने के संदर्भ में आदेश दिया था। इस सबके बावजूद हिमाचल सरकार ने इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया है।

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