अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी लूट पर प्रदेश सरकार से पूछे ये सवाल

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student parents association Himachal Pradesh

शिमला- छात्र अभिभावक मंच का प्राइवेट स्कूलों की मनमानी,लूट व भारी फीसों को संचालित करने के लिए प्रदेश सरकार से कानून,पॉलिसी व रेगुलेटरी कमीशन बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है! आज दिनांक 26 मार्च को मंच ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर कानून न बना तो आंदोलन तेज होगा। मंच ने जानकारी दी कि इसी कड़ी में 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय के बाहर अभिभावकों का जोरदार प्रदर्शन होगा।

मंच ने प्रदेश सरकार से पूछे ये सवाल

मंच ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि वर्ष 2016 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में निजी संस्थानों को संचालित करने व उनकी मनमानी को रोकने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की सिफारिश की थी व तीन महीने के भीतर उस रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में जमा करने का निर्देश दिया था। उस कमेटी का क्या हुआ? उसकी रिपोर्ट कहाँ है? उस रिपोर्ट पर कहाँ तक कार्य हुआ? क्या वह रिपोर्ट बनी भी अथवा नहीं? अगर बनी तो फिर निजी स्कूलों की लूट व मनमानी पर रोक क्यों नहीं लगी? उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मंच ने कहा कि इसका मतलब है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट को कूड़ेदान में डाल दिया गया।

मंच ने कहा कि उच्च न्यायालय के इसी आदेश में प्रधान सचिव शिक्षा को आदेश दिए गए थे कि वह सभी निजी स्कूलों के रिकॉर्ड का मुआइना करें तथा मनमानी व लूट करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाएं। परन्तु ऐसा कभी नहीं हुआ। मंच ने आरोप लगाया कि किसी भी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद निजी स्कूल धड़ल्ले से नियमों व क़ानून की सरेआम धज्जियाँ उड़ाते रहे परन्तु प्रदेश सरकार,मुख्य सचिव व प्रधान सचिव शिक्षा ने इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

मंच ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेशों व निजी शिक्षण संस्थान(विनियम) अधिनियम 1997 व 2003 के नियमों की लगातार ये स्कूल उल्लंघन करते रहे हैं परन्तु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी व प्रधान सचिव शिक्षा ने इनकी मनमानी के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लायी गयी।

शिक्षा मंत्री ने दिया प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने का भरोसा

पिछले कल दिनांक 25 मार्च छात्र अभिभावक मंच का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री के निवास पर उनसे मिला था
व इस संदर्भ में उनसे बातचीत की थी। इसके बाद उन्होंने मंच के प्रतिनिधिमंडल को सचिवालय स्थित कार्यालय पर 11 बजे बैठक के लिए आमंत्रित किया था। मीटिंग में शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिया था कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल लगाई जाएगी व इन्हें संचालित करने के लिए अन्य राज्यों की तर्ज़ पर कानून बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा था कि शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों की मनमानी पर चिंता व्यक्त की व इन पर नकेल लगाने के लिए उचित कदम उठाने व इन्हें संचालित करने के लिए अन्य राज्यों की तरह कानून बनाने का आश्वासन दिया।

उन्होंने प्रधान सचिव शिक्षा को निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में सभी तथ्य इकट्ठा करने का निर्देश दिया था व इन तथ्यों को हिमाचल के एडवोकेट जनरल व हिमाचल उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया था।

उन्होंने निदेशक उच्चतर शिक्षा को निर्देश दिया था कि निजी स्कूलों से फीस सहित उनकी सभी तरह की कारगुज़ारी की रिपोर्ट तुरन्त तलब की जाए व अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

मंच ने आशा व्यक्त की है कि शिक्षा मंत्री व शिक्षा विभाग के आला अधिकारी अपने वायदे पर कायम रहेंगे व इन स्कूलों पर नकेल लगाएंगे। मंच ने प्रदेश सरकार से शिक्षा निदेशालय के 18 मार्च 2019 के आदेशों की सख्ती से पालना की मांग की है व इन निर्देशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग की है।

इससे पहले छात्र अभिभावक मंच ने रविवार को कालीबाड़ी हॉल शिमला में चल रही प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन की मीटिंग के बाहर जोरदार मौन प्रदर्शन किया भी किया था !

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