केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में बिना किसी वैज्ञानिक जांच परख के बीज आलू उत्पादन बंद करना न्यायसंगत नहीं

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Central Potato Research Centre Shimla

शिमला- केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में बीज आलू के उत्पादन को बंद करने के निर्णय को किसान विरोधी ठहराते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने इसकी कड़ी निंदा की है।

पार्टी के राज्य सचिवमण्डल सदस्य और शिमला शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला में 1935 से कार्यरत है और इसने कई तरह की नई किस्मों को तैयार कर देश मे आलू की पैदावार बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूरे देश में बीज आलू की आपूर्ति के लिए यह संस्थान जाना जाता हैं।

चौहान ने कहा कि एकदम केंद्र सरकार द्वारा इस संस्थान में बीज आलू के उत्पादन पर बिना किसी वैज्ञानिक जांच परख के रोक लगाना न्यायसंगत नहीं है। इस निर्णय से न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर व उत्तर पूर्व के अन्य पहाड़ी राज्य भी प्रभावित होंगे।

उन्होंने ने आशंका जताई है कि जिस प्रकार से आज कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों का सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कहीं उसके चलते तो यह निर्णय नहीं लिया गया है। आज भी कई बीज आलू का कारोबार करने वाली निजी कंपनियां केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के कुफरी स्थित फार्म में बीज ब्रीडिंग के लिए आते हैं क्योंकि यहाँ के आलू में आने वाले फूलों के संख्या व गुणवत्ता बीज उत्पादन के लिए अन्य राज्यों से बहुत बेहतर है।

चौहान ने कहा कि प्रदेश में बागवानी के क्षेत्र में भी देखा गया है कि सरकार ने निजी कंपनियों के दबाव में आकर नौणी विश्विद्यालय की तमाम तरह के अनुसंधान व विकास(R&D) समाप्त कर व इसकी भूमि भी निजी कंपनियों को बागवानी के क्षेत्र में बढ़ावे के लिए दे दिये हैं जिसके कारण आज बागवानो को निजी व विदेशी कंपनियों के महंगे पौधे व उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर बना दिये गए हैं।

प्रदेश की आर्थिकी में बीज आलू का महत्वपूर्ण योगदान है क्योंकि इस पहाड़ी राज्य के हर जिला में ही इसका उत्पादन होता है और मैदानी क्षेत्रों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक का किसान इससे अपना गुजारा करता है। लाहौल स्पीति के बीज आलू की मांग तो आज भी देश के विभिन्न राज्यों में है और वहां के किसानों का यह मुख्य रोजगार का साधन भी है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश की कृषि पर बेहद बुरा असर पड़ेगा और किसानों की निजी कंपनियों की लूट के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव होगा। प्रदेश में कृषि का संकट और विकराल होगा।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि प्रदेश सरकार को इस निर्णय की गम्भीरता को समझते हुए इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए और केंद्र सरकार से इस किसान विरोधी निर्णय को तुरंत वापस लेने के लिए दबाव बनाना चाहिए तथा केंद्र सरकार तुरंत केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान को इस समस्या का हल निकालने के लिए दिशानिर्देश जारी करे।

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