रक्षा संस्थान डीआरडीओ ने नौणी विवि से खरीदे 30000 गुठलीदार पौधे

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DRDO planting temperate fruit plants in leh-ladakh

सोलन-हर साल डॉ वाई.एस.परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सेविभिन्न फलों की गुणवत्ता रोपण सामग्री खरीदने के लिए किसानों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। पिछले पाँच वर्षों से कृषक समुदाय के अलावाभारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डी॰आर॰डी॰ओ॰)भी विश्वविद्यालय से सेब व अन्य गुठलीदार पौधे कोजम्मू और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के सैन्य क्षेत्रोंमें लगाने के लिए खरीद रहा है।

पिछले पांच वर्षों से डीआरडीओ की एकसंघटक प्रयोगशाला,लेह स्थितउच्च उन्नतांश अनुसंधान रक्षा संस्थान (दिहार),विश्वविद्यालय से सेब एवं गुठलीदार पौधों को खरीद रहा है। इस वर्ष इस प्रतिष्ठितअनुसंधान प्रयोगशाला ने सेब,नाशपती और आड़ू के 6070 पौधे विश्वविद्यालय से खरीदेहैं। पिछले पांच वर्षों में खरीदे गए पौधों की संख्या 30,000 को पार कर गई है। इस रोपण सामग्री का उपयोग जम्मू और कश्मीर के अत्यधिक ठंड और ऊंचाई वाले सैन्य क्षेत्रोंमें किया जाता है।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ आनंद कुमार कटियारने बताया कि अत्यधिक ठंड व कठिन इलाकों में सेना के जवानों को ताजे फलों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह पौधे उन स्थानों पर रौपे गए हैं। इसके अलावा, कुछ पौधों को इन क्षेत्रों के किसानों को वितरितभी किया जाता है ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। किसानों द्वारा उनके फलों को आर्मी के काउंटर पर भी बेचा जा सकता है।

डॉ कटियार ने बताया कि परंपरागत रूप सेइन उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत कम फलदार वृक्ष थे। सेब की कुछ जंगली प्रजातियां मौजूद थींलेकिन इनकाफल खराब गुणवत्ता और जल्दी खराब होने वालाथा। विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए पौधे अच्छी किस्मों के हैंजो इन परिस्थितियों में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर के नुब्रा घाटी,लेह,कारगिल,कारू क्षेत्रों सहित अन्य स्थानों पर विश्वविद्यालय से खरीदी हुए पौधे रौपे गएहैं। इसके अलावाअरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में भीयह पौधेलगाए गए हैं।

सुरक्षा बलों को ताजे फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावासमुद्र तल से 11000 से 13000 फीट की ऊँचाई पर रौपे गए पौधों पर वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधानकिया जा रहा है जिससे अत्यंत ठंडे क्षेत्रों में किस्मों का निर्धारण करने में मदद मिल सके। इसके अलावा डीआरडीओ के वैज्ञानिक, रक्षा कर्मचारियों और किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।

नौणी विवि के फल विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्षडॉ॰ जे॰एस चंदेल ने बताया कि जिन क्षेत्रों में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा फलों के पौधों का रोपण किया हैं वहाँ विश्वविद्यालय द्वारा आपूर्ति किए पौधेविशेषरूप से सेब ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं। उन्होनें कहा कि विश्वविद्यालय न केवल पौधों की आपूर्ति कर रहा हैबल्कि उच्च उन्नतांश अनुसंधानरक्षा संस्थानके साथ मिलकर शोध कार्य भी कर रहा हैं।

विभिन्न ऊंचाई पर विभिन्न प्रकार के परीक्षणों और दिहार में शून्य ऊर्जा कोल्ड स्टोरेज सेलर जैसे अध्ययनों ने भी इन फलों के पौधों की उत्तरजीविता को बढ़ाने में मदद की है। डॉ॰ चंदेल ने कहा कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों ने संयुक्त शोध प्रत्र भी प्रकाशित किए हैं।

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