पूर्व सैनिकों ने भाजपा सरकार पर लगया वन रैंक वन पेंशन के नाम पर धोखे का आरोप

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One rank one pension

शिमला: जंहा एक ओर  भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक  वन रैंक वन पेंशन को केंद्र सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि के तौर पर गिना-2 कर नहीं थक रहे, वन्ही हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव के दो दिन पहले इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट और यूनाइटेड एक्स सर्विस मैन मूवमेंट के चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार कर नरेंद्र मोदी को वन रैंक वन पेंशन में फौजियों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।

शिमला जिले में कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में सेनानिवृत्त फौजयों ने कांग्रेस को समर्थन देने का आवाहन किया ।

उन्होंने ने कहा कि मोदी सरकार ने आधी-अधूरी योजना सेनानिवृत्त फौजियों के सर जड़ दी और  जब उन्होंने शांतिपूर्वक तरीके से इसके प्रति विरोध जताने की कोशिश की तो 870 दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रर्दशन कर रहे पूर्व सैनिकों पर केंद्र सरकार के इशारे पर पुलिस ने उन पर लाठियां भांजी!
उन्होंने कहा कि 17 फरवरी 2014 को केंद्र की तत्कालीन सरकार ने 1 अप्रैल 2014 से वन रैंक वन पेंशन को स्वीकार कर लिया था। इसके तहत यह साफ़ साफ़ कहा गया था कि एक समान अवधि तक सेवाएं देने के बाद एक समान रैंक से रिटायर होने वाले सशस्त्र बलों के सैनिकों को एक समान पेंशन दी जाएगी, फिर चाहे उनकी रिटायरमेंट की तारीख कोई भी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि इसके बाद केंद्र में मोदी सरकार बनी और मोदी सरकार ने 7 नवंबर 2015 को अधिसूचना जारी करके तीनों सेनाओं के 40 प्रतिशत सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन के फायदे से वंचित कर दिया।

कांफ्रेंस में भाजपा सरकार पर सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर राजनीति कर फौजियों का अपमान करने का आरोप भी लगाया गया।

कांग्रेस प्रचारक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू की गयी योजना कांग्रेस पार्टी द्वारा तय किए गए वन रैंक वन पेंशन के प्रारूप से अलग है। कांग्रेस के अनुसार भूतपूर्व सैनिकों को सर्वाधिक वेतन के आधार पर पेंशन मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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