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कोटखाई रेप व मर्डर केस की गुत्थी सुलझी, 55 घंटे में एसआईटी ने पकडे 6 आरोपी

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‌शिमला‌- शिमला कोटखाई के हलाईला के दांदी जंगल में नाबालिग छात्रा की रेप के बाद की हत्या का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है। इस मामले के लिए गठित एसआईटी ने मामला सुलझाते हुए छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र 19 से 42 वर्ष है। हिमाचल पुलिस ने छह आरोपियों को शिमला के कोटखाई से गिरफ्तार कर लिया है।

ये है आरोपियों के नाम

हिमाचल पुलिस के महानिदेशक सोमेश गोयल शाम 4:30 बजे हुए प्रेसवार्ता में इस पूरे मामले का खुलासा किया।आईजी जहूर एच जैदी (दक्षिणी रेंज ) जो इस जाँच दल के मुखिया थे ने बताया कि एक आरोपी आशीष चौहान उर्फ आशु (29), महासू के शराल गांव का रहने वाला है। जबकि पकड़े गए अन्य लोगों में पिकअप चालक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू (32), हलाइला, सुभाष सिंह बिष्ट (42) उत्तराखण्ड, सूरत सिंह (29) नेपाल, लोकजन उर्फ छोटू (19) नेपाल और दीपक उर्फ दीपू (38) पौड़ी, घड़वाल के रहने वाले हैं और ये सब हलाइला में ही रहते हैं। राजू मंडी के जंजैहली का रहने वाला है और वह हलाइला में ही रहता है। सोमेश गोयल ने कहा कि यह ब्लाइंड मर्डर केस था।

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आईजी जहूर जैदी ने कहा कि 55 घंटे में 84 लोगों से पूछताछ की और 28 काल डिटेल निकाली और फिर जांच की। जांच तकनीकी रूप से की गई और इस ब्लाइंड मिस्ट्री को क्रैक किया।एसआईटी में एएसपी भजन देव नेगी के अलावा डीएसपी मनोज जोशी, रतन नेगी, एसएचओ बाबू राम ढली, धर्म सिंह छोटा शिमला, राजेंद्र ठियोग एएसआई रजनीश समेत कई अधिकारी शामिल थे।

पुलिस को था पहले से शक, ऐसे हुआ खुलासा

पुलिस ने साफ किया कि शुरू से ही इस बात का शक था कि ये अपराध किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं किया बल्कि ऐसे लोगों ने किया जो स्थानीय थे। दूसरा जिस तरह का जघन्य अपराध हुआ उसे कोई आम इंसान नहीं कर सकता है। इसके अलावा पुलिस ने दो मोबाइल टावर के डंप भी खंगाले जिसके आधार पर पुलिस को सुबूत मिलते गए और कानून का शिकंजा आरोपियों पर कसने लगा। पुलिस ने बताया कि इस केस में टेक्निकल और साइंटिफिक एविंडेंस इक्टठा कर लिए गए हैं। साथ ही आरोपियों ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया है।

आरोपियों ने कबूला जुर्म, ऐसे अंजाम दी थी पूरी वारदात

पुलिस के अनुसार आरोपी राजेंद्र कुमार स्प्रे करने वाली मशीन लेकर कहीं जा रहा था। इसके साथ चार और दोस्त भी थे। इसी दौरान इसने छात्रा को देख लिया। गाड़ी रोककर अपने साथ लिफ्ट देने की बात की।वहीं, छात्रा भी इसे पहले से जानती थी तो इसके साथ बैठ गई। राजेंद्र ने पिकअप गाड़ी में आगे बैठे दोनों दोस्तों को भी पीछे बैठने को कहा जबकि छात्रा को अपने पास आगे बिठा लिया।

पूछताछ में युवकों ने कबूल किया कि उन्होंने एक सुनसान जगह पर गाड़ी को रोक दिया। फिर पांचों गाड़ी से नीचे उतर गए। ‌थोड़ी दूर आगे जाकर आपस में बात की कि ये फायदा उठाने का अच्छा मौका है।प्लान बनाने के बाद पांचों ने जबरदस्ती छात्रा को गाड़ी से घसीटकर बाहर निकाल लिया। इससे छात्रा के कपड़े तक फट गए। मगर दरिंदों ने कोई रहम नहीं किया। इसके बाद इसका मुंह दबाकर सड़क के पास जंगल में ले गए।

आरोपियों ने बारी बारी से किया पीड़िता से दुराचार

जांच में आरोपियों ने बताया कि जंगल में बारी बारी पांचों युवकों ने उसके साथ दुराचार किया। छात्रा रहम की भीख मांगती रही। मगर आरोपी नहीं माने। इसी दौरान उसका गला तक आरोपियों ने दबा डाला। इससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि लड़की का रेप लाश मिलने की जगह से 10 फीट की दुरी ही हुआ था।

उसके गला किसने दबाया ये अभी साफ नहीं है, ऐसे में इसकी तफ्तीश की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में कोई बरामदगी नहीं हुई है।पुलिस ने कॉल डिटेल और पूछताछ के जरिए इनका सुराग लगाया। पुलिस बाकी आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सभी को पुलिस रिमांड के लिए पेश किया जाएगा।

ज्ञात रहे की इस मामले में कोटखाई थाने में धारा 302 और 376 के साथ-साथ पोक्सो एक्ट की धारा-4 में दर्ज है। 4 जुलाई को नालाबिग छात्रा घर से गायब हो गई थी और 6 जुलाई की सुबह इसका शव अर्धनग्न अवस्था में जंगल में मिला था। इस घटना के बाद से लोगों में भारी रोष व्याप्त है और वे दोषियों की गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में एसआईटी का गठन किया और अब इसने इस मामले को सुलझा दिया है।

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एच.पी.यू. के ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह न चलने से छात्र नहीं करवा पा रहे फीस जमा, तिथि बढाने की मांग

HPU Online Fee Desposit Portal

शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों को पीजी कोर्सेज की फीस जमा करते वक़्त छात्रों को पेश आ रही है। छात्रों का कहना है कि अभी तक भी फीस जमा करने का ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह से एक्टिवेट नहीं हुआ है।अभी तक केमिस्ट्री, फिजिक्स,माइक्रोबायोलॉजी, का पोर्टल एक्टिवेट नहीं हुआ है।आर्ट्स ब्लॉक के अन्तर्गत एम कॉम, एम ए इंग्लिश, एम ए लोक प्रशासन,एम ए म्यूज़िक,एम ए संस्कृत,एम ए राजनीतिक शास्त्र जैसे विभागो की फीस का पोर्टल अभी तक नहीं खुला है।

विश्विद्यालय के अधिकतर विभागो की फीस जमा नहीं हो रही है।छात्र परेशान हो रहे है क्योंकि प्रशासन ने फीस जमा करने का ऑनलाइन पोर्टल अभी तक भी एक्टिव नहीं किया है।जिन विभागों का पोर्टल एक्टिव हुआ है वहां के चालान भी संशय से भरपूर है क्योंकि विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस में फीस स्ट्रक्चर तथा चालान में फीस अलग है। ऐसे में छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंता में है तथा दुविधा में रहने को मजबूर है।

इसी समस्या को लेकर आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपकर कर फीस जमा करने में आ रही दिक्कतों से रूबरू कराया। उन्होंने फीस जमा करने की तिथि को बढाने की मांग की।कैंपस सचिव जीवन ठाकुर ने बताया कि हालांकि एस एफ आई पहले डी एस के समक्ष उठाने गई लेकिन डी एस अपने कार्यालय से नदारद थे।इसके साथ साथ 2015 बैच के यू जी के छात्रों की मांगो को लेकर भी रजिस्ट्रार के समक्ष रखा गया।

इसके साथ ही एस एफ आई ने 2015 बैच के छात्रों के लिए पासिंग परसेंटेज को 45% से घटाकर 40% करने की मांग की है। इंटरनल एसेसमेंट तथा थेओरी के अंकों को कंबाइन करके एग्रीगेट परसेंटेज बनाई जाने कि मांग भी की।

कैंपस अध्यक्ष विक्रम ठाकुर ने कहा कि प्रशासन की नलायकी तथा लेटलातीफी की वजह से छात्र फीस जमा नहीं करवा पाए हैं। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द पोर्टल को सुचारू रूप से एक्टिवेट करे और फीस जमा करने की तिथि को भी तुरंत प्रभाव से एक्सटेंड किया जाए।

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तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन, परन्तु ऑकलैंड स्कूल पर अनैतिक हथकंडे अपनाने का आरोप

PTA constituted at Tarahall shimla and auckland school

शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि ऑकलैंड स्कूल प्रबंधन ने पीटीए के गठन के दौरान कई अनैतिक हथकंडे अपनाए। पीटीए के गठन से पहले स्कूल प्रबंधन ने कई अभिभावकों को टेलीफोन करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए अनचाहा दबाव बनाया व उन्हें प्रबंधन के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। मंच ने कहा कि इस बात की पोल बॉयज स्कूल की कक्षा दो के चुनाव के दौरान खुल गयी जब एक उम्मीदवार ने अभिभावकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान साफ तौर पर बोला कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने खड़ा किया है इसलिए अभिभावक उन्हें वोट दें। इस पर विवाद हो गया व अभिभावकों ने उस उम्मीदवार के खिलाफ खुली बगावत करके दूसरे उम्मीदवार को भारी मतों से जिता दिया।

मंच ने कहा कि ऐसा ही एक उदाहरण कक्षा छः में आया जहां पर चुनाव रोस्टर को जानबूझ कर बदलकर महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस पर कक्षा छः की दोनों सेक्शनों के सभी अभिभावक खड़े हो गए व उन्होंने इसे फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि कक्षा छः से छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ही प्रतिनिधि होंगे। पूरी कक्षा ने बिना किसी चुनाव के ही विजेंद्र मेहरा को निर्विरोध चुन लिया जिसे बाद में अभिभावकों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को मानना पड़ा।

मंच ने आरोप लगाया कि यह चुनाव पूरी तरह धांधलियों से भरपूर रहा। चुनाव के बाद चुनी गई कार्यकारी कमेटी के चुनाव में स्कूल प्रबंधन के लगभग दस लोग घुस आए व उन्होंने चुनाव को जबरन पांच मिनट में ही निपटा दिया जिसमें उन्होंने पहले से ही प्रबंधन द्वारा फिक्स उनके कुछ चहेतों को अपनी योजना के तहत मुख्य जिम्मेवारी सौंप दी। मंच ने कहा कहा कि इस कमेटी के चुनाव में इन लोगों का जबरन घुसना व कमेटी सदस्यों पर अनचाहा दबाव बनाना व उन्हें प्रभावित करना गैर संवैधानिक है। कार्यकारी कमेटी के चुनाव का नामांकन भी नहीं करवाया गया व इसे केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया गया। बगैर किसी नामांकन व चुनाव के ही यह कमेटी गठित कर दी गयी।

अभिभावक मंच ने कहा कि ऑकलैंड स्कूल का पीटीए का चुनावी रोस्टर गैर संवैधानिक था। चुनाव की प्रक्रिया नर्सरी से शुरू न करवाकर जान बूझकर प्लस टू से शुरू करवाई गई। किसी भी रोस्टर में सामान्य श्रेणी से शुरुआत होकर आरक्षित श्रेणी तक जाती है परन्तु यहां पर जान बूझ कर इस रोस्टर को बदल दिया गया ताकि प्रबंधन के चहेते चुनाव में जीतें।

मंच ने निदेशक उच्चतर शिक्षा से मांग की है कि भविष्य में निजी स्कूलों में होने वाले पीटीए के गठन को और ज़्यादा पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार कानून 2009,हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 व नियम 2003 तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ का पूर्णतः पालन हो व ऑकलैंड स्कूल की तर्ज़ पर पीटीए गठन में धांधली न हो।

अभिभावक मंच ने कहा कि 153 साल पुराने ऑकलैंड स्कूल में आज पहली मर्तबा पीटीए का गठन हुआ। यह छात्र अभिभावक मंच की पहली जीत है व इस जैसे सभी निजी स्कूलों के गाल पर करारा तमाचा है। निजी स्कूलों की तानाशाही के दी दिन अब लद रहे हैं। मंच ने कहा है कि संघर्ष जारी है और अगला पड़ाव निजी स्कूलों में भारी फीसों व अन्य विषयों को संचालित करने के लिए विधेयक लाने का है जिसका प्रारूप उच्चतर शिक्षा निदेशक ने बना दिया है। सम्भवतः इस विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश हो जाएगा।

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सीवरेज सेस बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर पड़ रहा अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ

Shimla sewerage cess hike

शिमला-जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहरी ने पेयजल कंपनी द्वारा पानी बिल के साथ प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपये सीवरेज सेस वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई है ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की अभी तक जो सेस शुल्क 30 फीसदी लिया जाता था उसे बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ पड़ रहा है , छोटे उपभोक्ता जो की पानी की कम खपत करते थे उस पर भी फ्लेट सौ रुपये शुल्क लगा देना तर्कसंगत नही है । निगम को इस बाबत पुनर्विचार करना चाहिए ये फ़ैसला पूरी तरह से जनविरोधी है इसे तुरंत वापस लेना चाहिए ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की पेयजय कंपनी द्वारा महीने के महीने पानी के बिल नही दिये जाते ऐसे मे यदि किसी उपभोक्ता को छ :माह या आठ माह बाद बिल दिया जा रहा है तो उसपर हर माह के हिसाब से सौ रुपए शुल्क जोड़ा जा रहा है, हर उपभोक्ता को हर माह सौ रुपये जोड़ने के इस गणित से पेयजल कंपनी खासा मुनफा कमा रही है और आम आदमी पर गैरजरूरी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है जिस पर जिला कांग्रेस कमेटी कड़ी आपत्ति जताती है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा आए दिन ही जन विरोधी व तुगलकी फैसले लिए जा रहें है, मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवा पाने मे नाकाम रहा निगम केवल आम आदमी की जेब से पैसे निकलवाने की फिराक मे रहता है , हर दूसरे माह किसी ने किसी तरह से कोई नया शुल्क लगाया जा रहा है , और कुछ नही मिला तो कूड़े का शुल्क बढ़ा दिया जाता है इस से जनता मे आक्रोश है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी ये मांग करती है की प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपए के इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए जिस से छोटे उपभोक्ताओ पर आर्थिक बोझ न पड़े अन्यथा महापौर व पेयजल कंपनी के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मोर्चा खोला जाएगा , निगम जनता पर तुगल्की फरमान लगाना बंद करें और शहर की जनता को मूलभूत सुविधाए प्रदान करने के प्रयास करे ।

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