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तस्वीरें: रिवालसर झील में प्रदुषण और हज़ारो की संख्या में मछलियों के मरने से मचा हाहाकार

rewalsar lake pollution

मंडी- विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटक नगरी रिवालसर में झील के पानी का रंग बदलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अभी तक पानी के रंग बदलने के कारणों का पता नहीं चल सका है। इस मामले को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चांए हो रहे हैं। इस मामले को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चांए हो रहे हैं। आलम यह है कि हजारों की तादाद में मछलियां मरने लगी हैं।

Dead Fish

प्रशासनिक अमला और मत्स्य विभाग के अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं और यहां से मरी हुई मछलियों को बोट के सहारे बाहर निकाल कर डम्प करने का कार्य किया जा रहा है।

वीडियो

विभाग के अनुसार बीती शाम को मतस्य विभाग की टीम ने पानी के सैंपल ले लिए हैं और उन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है जिसकी रिपोर्ट दो से तीन दिनों में आ सकती है।

Polluted Rewalsar lake

स्थानीय लोगों ने रिवालसर झील के रखरखाव में कमी को ही इस हादसे की वजह बताया है और सरकार और प्रशासन से जल्द ही इस बारे में कडे कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि अभी भी मौत से जूझ रहीं हजारों मछलियों और झील को बचाया जा सके।

Fishes died in Rewalsar lake

तीनों धर्मों के श्रद्धालुओं में मचा हड़कंप

मंगलवार देर शाम यहां ऑक्सीजन लेने के लिए मछलियां झील के तट पर आई और देखते-देखते रिवालसर के स्थानीय लोग इन्हें बचाने के लिए आगे आए। लेकिन साफ पानी न मिलने के चलते मछलियों को समय रहते नहीं बचाया जा सका।

Rewalsar lake Mandi

चित्र जय कुमार/ ट्रिब्यून

बुधवार सुबह जैसे ही लोगों ने झील की ओर रुख किया तो वहां झील किनारे हजारों मछलियां अपने प्राण त्याग चुकी थी। इस घटना के बाद हिंदू, बौद्ध, सिख तीनों धर्मों के श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया है। बताया जाता है कि इन मछलियों के साथ इन धर्मों के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था रहती है और यहां इन मछलियों को खाद्य सामग्री खिलाकर पुण्य कमाने की परंपरा रही है।

Rewalsar lakePollution

जिंदगी और मौत से जूझ रही मछलियां

इस बार बैसाखी मेले से लेकर अभी तक देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंच चुके हैं। यह पहला मौका है जब इतनी भारी संख्या में मछलियां झील का पानी अचानक पीले रंग में बदल गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया है और जो मछलियां जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं उन्हें बाहर निकालने के लिए जद्दोजहद की जा रही है।

fishesh died in Rewalsar lake Mandi

बल्ब उपमंडल के एसडीएम सिद्धार्थ आचार्य ने भारी संख्या में मछलियों के मरने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मछलियों को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और उन्हें तुरंत किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है।

Polluted Himachal lake

Holy Lake Rewalsar

Dead Fish in Rewalar lake

Mandi Polluted lake

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दो वर्षों में अपने ऐशो आराम के लिए जनता के पैसों से फिजूलखर्ची के अलावा कुछ भी नहीं कर पाया शिमला नगर निगम:चौहान

BJP Rules Shimla MC is a complete failure

शिमला– नगर निगम शिमला में बीजेपी के दो वर्षों का कार्यकाल पूर्णतः विफल रहा है। इन दो वर्षों में पानी व कूड़े की दरों, किराया आदि में वृद्धि कर जनता के ऊपर आर्थिक बोझ डालने व सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया गया है तथा अपने ऐशो आराम के लिए नई गाड़ियां खरीद कर जनता के पैसों से फिजूलखर्ची को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह कहना है भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के नेता और शिमला शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान का।

चौहान का कहना है कि पूर्व नगर निगम के प्रयासों से वर्ष 2016 में पेयजल की सभी योजनाओ को सरकार से अपने अधीन लेने के पश्चात जो ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सिवरेज सर्कल(GSWSSC) का गठन कर इसमें सुधार का कार्य किया गया था, जिसमें मुख्यतः गिरी, गुम्मा व अश्विनी खड्ड पेयजल योजनाओं की पाइपलाइन व पम्पो को बदलने का कार्य किया गया तथा टैंकों की मुरम्मत की गई, उसका ही नतीजा है कि 20 से 28 MLD मिलने वाला पानी आज 50 MLD से उपर तक पहुंच गया है। परन्तु जिस प्रकार से शिमला शहर में गत वर्ष 2018 में नगर निगम के कुप्रबंधन के कारण पानी के त्राहि त्राहि हुई और विश्वभर में शहर की बदनामी हुई उसके लिए शहरवासी कभी भी वर्तमान बीजेपी शासित नगर निगम को मुआफ़ नहीं करेगी।

2 वर्ष में न तो पानी के मीटर लगा पाया, न ही बिल मीटर रीडिंग के आधार पे दे पाया निगम

वर्तमान नगर निगम की विफलता इससे भी स्पष्ट हो जाती है कि पूर्व नगर निगम ने पूरे शहर के पानी के मीटर बदल कर जून, 2017 से पानी के बिल हर महीने मीटर रीडिंग के आधार पर देने का कार्य जोरो पर आरम्भ कर दिया था परन्तु आज 2 वर्ष बीतने के बावजूद न तो पूरे मीटर बदले गए न ही हर महीने पानी के बिल मीटर रीडिंग के आधार पर दिए जा रहे हैं। हद तो तब हो गई हैं कि कई वार्डो में तो मार्च, 2018 यानी तकरीबन एक साल तीन महीने बीतने के बावजूद पानी के बिल नहीं दिये गए हैं। इससे बीजेपी शासित नगर निगम की विफल कार्यशैली स्पष्ट होती है।

शहर के जीणोद्धार व आधुनिकीकरण के लिए 2906 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजना  में 2 वर्ष के पश्चात  कोई प्रगति नही

उन्होंने कहा कि पूर्व नगर निगम ने वर्ष 2016 में शिमला शहर के लिए पेयजल व सीवरेज के सुधार व सतलुज से 65 MLD अतिरिक्त पानी उपलब्ध करवाने हेतू विश्व बैंक से 125 मिलियन डॉलर की परियोजना स्वीकृत करवाई गई थी। इससे शहर में 24×7 पानी शहर में दिया जाना था। परन्तु अभी तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। इसके विपरीत वर्तमान नगर निगम ने प्रदेश सरकार के दबाव के चलते पानी को अपनी परिधि से बाहर कर कंपनी का गठन कर इसके निजीकरण का कार्य कर दिया है।

स्मार्ट सिटी परियोजना, जो कांग्रेस की राज्य सरकार व केंद्र की बीजेपी सरकार के विरोध के बावजूद एक लम्बे संघर्ष के पश्चात उच्च न्यायालय में दखल से पूर्व नगर निगम ने वर्ष 2016 में शिमला शहर को इसमें सम्मिलित किया था तथा शहर के जीणोद्धार व आधुनिकीकरण के लिए 2906 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की थी। परन्तु आज 2 वर्ष से अधिक समय बीतने के पश्चात अभी तक इसमें कोई प्रगति नही की गई है। इससे नगर निगम व प्रदेश सरकार का शिमला शहर के प्रति उदासीन रवय्या स्पष्ट होता है।

सफाई व्यवस्था पूर्णतःध्वस्थ, महीनों तक नहीं उठ रहा कूड़ा

चौहान ने कहा कि आज शिमला शहर में सफाई व्यवस्था पूर्णतः चरमरा गई है। कई वार्ड तो ऐसे हैं जहाँ महीनों तक कूड़ा नहीं उठ रहा है। पूरे शहर में गंदगी फैली है परन्तु इस ओर नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है। यहां तक कि सत्तारूढ़ बीजेपी के कई पार्षद भी इस पर कई बार प्रश्नचिन्ह लगा चुके हैं। भरयाल स्थित कूड़े से बिजली बनाने वाला प्लांट 2 वर्ष पूर्व लगाया गया है परन्तु वर्तमान नगर निगम इसे चलाने में पूर्णतः विफल रही है और आज इन कूड़े के ढेरों में कई दिनों से आग लगी है औऱ इससे पूरे शहर व इसके साथ लगते क्षेत्रों की हवा में जहर घुल रहा है तथा पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। परंतु नगर निगम इसको रोकने व सफाई व्यवस्था को सुचारू करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।

पुरानी योजनाओं का शिलान्यास कर किया जा रहा दिखावा व प्रचार

पूर्व नगर निगम द्वारा आरम्भ की गई परियोजनाएं जिनमे पार्किंग, पार्क, फुटब्रिज, सामूदायिक भवन,रोपवे, तहबाजारियों के पुनर्वास, शहरी गरीब के लिए आवास, लेबर होस्टल, लक्कड़ बाज़ार से लिफ्ट व लिफ्ट से छोटा शिमला टनल आदि के निर्माण में वर्तमान नगर निगम कोई रूचि नहीं दिखा रही हैं। आज भी आई जी एम सी, विकास नगर, कैथू, स्नोव्यू, रामनगर, पंथाघाटी, ढली आदि स्थानों जो पार्किंग व फुटब्रिज का निर्माण कार्य होना है उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कसुम्पटी में जो शहर का आधुनिकतम रानी ग्राउंड पार्क का निर्माण जो 90 प्रतिशत वर्ष 2017 में पूर्ण हो गया था पिछले 2 वर्षों में शेष 10 प्रतिशत कार्य भी पूर्ण कर इसे जनता को समर्पित नही किया गया है। केवल पुरानी योजनाओं का शिलान्यास कर दिखावा व प्रचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित नगर निगम अपनी व शहरवासियों की बहुमूल्य सम्पत्तियों जिसमें ऐतिहासिक टाउन हॉल, टूटीकंडी क्रॉसिंग बहुउद्देश्यीय कॉम्प्लेक्स व पार्किंग, लिफ्ट, पार्क आदि को सुरक्षित रखने में पूर्णतः विफल रही है। टाउन हॉल जो शुरू से ही नगर निगम की सम्पत्ति है और इसमें नगर निगम का कार्यालय रहा है इसे हासिल करने में वर्तमान नगर निगम कोई रूचि नहीं दिखा रहा है और सरकार की मंशा में सहमति प्रदान कर इसे किसी संस्था को गुपचुप तरीके से देने के लिए कार्य किया जा रहा है। जोकि शहर की जनता के साथ एक बड़ा धोखा किया जा रहा है।

सब्जी मंडी, अनाज मंडी, टिम्बर मार्किट व ट्रांसपोर्ट एरिया को शहर से बाहर शिफ्ट करने के लिए नहीं किया कोई भी कार्य

वर्तमान नगर निगम द्वारा शहर से सब्जी मंडी, अनाज मंडी, टिम्बर मार्किट व ट्रांसपोर्ट एरिया को शहर से बाहर पूर्व नगर निगम द्वारा चिन्हित स्थानों में शिफ्ट करने के लिए कोई भी कार्य नहीं किया गया है। इससे जनता को रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात मिलनी थीं तथा कारोबारियों को भी खुले में कारोबार का अवसर प्राप्त होना था।

निगम अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में विफल

चौहान ने ये भी आरोप लगाया कि वर्तमान नगर निगम अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने में विफल रहा है। आज चाहे स्वास्थ्य विभाग में सफाई कर्मचारी हो या जल आपूर्ति विभाग का कंपनी में भेजा कर्मचारी हो वह सभी प्रताड़ित व शोषित महसूस कर रहे हैं। सैहब सोसाइटी के कर्मचारियों का काम का बोझ तो बढ़ाया जा रहा है परन्तु इनका वेतन नही बढ़ाया जा रहा है। जल आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों को जबरन कंपनी की सेवा शर्तों पर कार्य के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार द्वारा नई भर्ती पर रोक से कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे हालात पैदा कर अब पानी के साथ साथ अब सफाई भी ठेके पर देने का कार्य वर्तमान नगर निगम ने किया है।

बीजेपी शासित नगर निगम शिमला गत दो वर्षों में शहर के विकास को दिशा देने व पूर्व नगर निगम द्वारा स्वीकृत योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में भी पूर्णतः विफल रही है। शहर में विकास का चक्र ठप हो गया है। बीजेपी शासित नगर निगम ने जनविरोधी नीतियों को लागू कर जनता पर आर्थिक बोझ लादने का कार्य किया है। मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी, सफाई, बिजली, पार्किंग, सड़क आदि का निजीकरण कर जनता की जेब मे डाका डाला जा रहा है। चौहान ने कहा कि सी.पी.एम. इन जनविरोधी नीतियो को बदलने के लिए इनके विरुद्ध जनता को लामबंद कर जनआंदोलन करेगी और ये तब तक जारी रहेगा जब तक बीजेपी की सरकार व नगर निगम इनको नहीं बदलेगी तथा जनता को बेहतर सुविधाएं व राहत नहीं प्रदान करेगी।

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शिमला में दबंगों द्वारा दलित परिवार से मारपीट, न पुलिस ने एफआईआर दर्ज़ की, न डॉक्टर ने दिया उचित उपचार: दलित शोषण मुक्ति मंच

Dalit Family in Shimla's Dhalli beaten

शिमला-हिमाचल प्रदेश दलित शोषण मुक्ति मंच शिमला के ढली थाना के अन्तर्गत आने वाले परिवार के साथ पड़ोस में रहने वाले दबंगों द्वारा जातिगत उत्पीड़न और मारपीट के मामले की कडी निन्दा शिमला है।

मंच ने आरोप लगाया है कि जब पीडित परिवार एफआईआर दर्ज करवाने के लिए ढली थाने में पहुंचा तो थाना प्रभारी ने भी एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की,जिस वजह से पीडित परिवार को ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवानी पड़ी। मंच ने कहा कि ढली थाना ने 18 घंटे तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गयी और पुलिस आरोपियों को पुलिस वैन में घुमाती रही।

उसके बाद पीडित परिवार जब उपचार के लिए आई.जी.एम.सी. पहुंचा तो उन्हें उचित उपचार नहीं मिला, पीडित लड़की कई घंटों तक स्ट्रेचर पर पड़ी खून से लतपथ दर्द से कहलाती रही। दलित शोषण मुक्ति मंच पुलिस और डॉक्टर के इस तरह की गैर जिम्मेदाराना रवैये के लिए कडी आलोचना की है और सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस कर्मियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐ।



दलित शोषण मुक्ति मंच के शहरी संयोजक विवेक कश्यप व सह संयोजक राकेश कुमार ने कहा कि जब से प्रदेश में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई है तब से दलितों पर अत्याचार बड़े है वो चाहे सिरमौर में केदार सिंह जिदान की हत्या हो,नेरवा में रजत की हत्या हो,कुल्लू घाटी के थाटीबीड़ की घटना हो या सोलन के लुहारघाट में एक दलित शिक्षक के साथ मारपीट का मामला हो,सरकार इन सब मामलों में न्याय दिलाने में विफल रही।

उन्होंने कहा कि इससे सरकार का दलित विरोधी रवैया सामने आया है। ढली मारपीट व छेडछाड मामले में ऐट्रोसिटी एक्ट लगने के बाद भी पुलिस अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई है।

‌दलित शोषण मुक्ति मंच ( हि।प्र) सरकार से मांंग की है कि अपने काम में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐऔर मारपीट और छेड़छाड़ के आरोपियों को तुरन्त गिरफ्तार किया जाऐ। मंच ने चेतवानी दी है कि अगर सरकार दोषियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं करती है तो दलित शोषण मुक्ति मंच शहर की जनता को लामबंद कर के एक उग्र आंदोलन करेगी।

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समय रहते पुलिस ने की होती मदद तो नहीं होता दुराचार, दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर भी दर्ज़ हो एफआईआर: गुड़िया न्याय मंच

Shimla Police did not help rape victim

शिमला-गुड़िया न्याय मंच ने शिमला शहर के बीचोंबीच बलात्कार के मामले में पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की है व दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मंच ने चेताया है कि अगर बलात्कार के दोषियों व जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई तो मंच जनता को लामबंद करके आंदोलन करेगा।

मंच के सह संयोजक विजेंद्र मेहरा ने पुलिस की नाक के नीचे एक और लड़की के बलात्कार पर कड़ा रोष ज़ाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि इस बेहद संवेदनशील मामले में बलात्कार के दोषियों के साथ ही जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर तुरन्त एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अगर पुलिस प्रशासन ने थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो मानवता को शर्मशार करने वाला यह घिनौना कार्य नहीं होता।

मंच ने यह सवाल उठाया है कि जब यह लड़की पुलिस के पास मदद मांगने गई तो फिर उसे मदद क्यों नहीं मिली। मंच के सह संयोजक ने कहा कि अगर पुलिस ने इस लड़की की समय रहते मदद की होती तो इस लड़की से दुराचार नहीं होता और न ही दरिंदे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते। उन्होंने इस बलात्कार के लिए पूरी तरह पुलिस जिम्मेवार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से गुड़िया प्रकरण की तरह एक बार फिर से स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल प्रदेश के थाने किसी भी तरह से आम जनता के लिए सुरक्षित नहीं हैं और न ही इन थानों में जाने पर जनता को सुरक्षा,न्याय व मदद मिलती है। यह घटनाक्रम एक बार पुनः गुड़िया प्रकरण की तरह पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की पोल खोलता है व उस पर काला धब्बा है।

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