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गरीब होने का ख़मयाज़ा भुगत रहे, महीनों से बेघर चरान खड्ड बस्ती विस्तापितों की मुख्यमंत्री से आशियाने की फरियाद

Charan Khad Slum Dharamsala 16

धर्मशाला- धर्मशाला नगर के चरान खड्ड क्षेत्र में पिछले 35 सालों से झुग्गिओं में 290 परिवारों को 16-17 जून, 2016 को नगर निगम धर्मशाला ने बिना किसी पूर्नवास नीति के चरान खड्ड बस्ती से उजाड़ दिया था। जिला प्रशाशन की निर्दयता के मारे इन गरीबों को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलकर सर के ऊपर छत की फरियाद करने का एक अवसर मिला!

मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह के स्मार्ट सिटी धर्मशाला के दौरे के दौरान चरान खड्ड बस्ती से उजड़े विस्थापितों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
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चरान खड्ड बस्ती पूर्नवास समिति व कांगड़ा नागरिक समुह के प्रतिनिधिओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करके विस्थापित समुदाय की समस्याओं के बारे में बात करी। चरान खड्ड बस्ती पूर्नवास समिति के प्रतिनिधिओं ने मुख्यमंत्री को तीन सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। जिसमें सितम्बर माह में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिये किये गये आवेदनों की प्रक्रिया की कार्यवाही को तेज करने की मांग की गई है।

पढ़ें: क्या स्मार्टसिटी धर्मशाला के पास गरीबों के लिए नहीं कोई जगह?

यदि विस्थापित समुदाय इस योजना के लिये योग्य नहीं है तो राज्य सरकार उनके पूर्नवास के लिये जल्दी ही प्रक्रिया शुरु करे। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विभिन्न रोजगार स्कीमों में विस्थापित समुदाय के लोगों को जोड़ा जाये और साथ ही चरान खड्ड बस्ती पूर्नवास समिति ने यह भी मांग की है की 35 वर्षों से धर्मशाला नगर में रहने के बावजूद राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन ने समुदाय को मतदान देने के संवैधानिक अधिकार व पीडीएस प्रणाली से वंचित किया गया है तो इन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाये व समुदाय को राशन कार्ड मुहया किये जायें।

पढ़ें:30 साल पुरानी धर्मशाला बस्ती में रहने वाले करीब 1,500 प्रवासी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर

16-17 जून 2016 को 35 साल पूरानी बस्ती के लोगों को बिना किसी पुर्नवास नीति के नगर निगम धर्मशाला ने विस्थापित कर दिया था। बस्ती को उजाड़ने के तीन माह पहले नगर निगम ने युनाइटेड नेशन डेवल्पमेंट प्रोग्राम कि टीम कि सहायता से बस्ती का एक सर्वे किया था। जिसके अनुसार कुल 290 परिवार चरान खड्ड बस्ती में रह रहे थे।

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विस्थापित हुये परिवारों में से 115 परिवारों ने 6 सित्तम्ब्र से 10 सित्तम्बर तक , प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत “सब के लिये आवास” स्कीम के अन्दर नगर निगम धर्मशाला कार्यालय में आवेदन किया। लेकिन अभी तक नगर निगम ने इस कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया है।

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एच.पी.यू. के ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह न चलने से छात्र नहीं करवा पा रहे फीस जमा, तिथि बढाने की मांग

HPU Online Fee Desposit Portal

शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों को पीजी कोर्सेज की फीस जमा करते वक़्त छात्रों को पेश आ रही है। छात्रों का कहना है कि अभी तक भी फीस जमा करने का ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह से एक्टिवेट नहीं हुआ है।अभी तक केमिस्ट्री, फिजिक्स,माइक्रोबायोलॉजी, का पोर्टल एक्टिवेट नहीं हुआ है।आर्ट्स ब्लॉक के अन्तर्गत एम कॉम, एम ए इंग्लिश, एम ए लोक प्रशासन,एम ए म्यूज़िक,एम ए संस्कृत,एम ए राजनीतिक शास्त्र जैसे विभागो की फीस का पोर्टल अभी तक नहीं खुला है।

विश्विद्यालय के अधिकतर विभागो की फीस जमा नहीं हो रही है।छात्र परेशान हो रहे है क्योंकि प्रशासन ने फीस जमा करने का ऑनलाइन पोर्टल अभी तक भी एक्टिव नहीं किया है।जिन विभागों का पोर्टल एक्टिव हुआ है वहां के चालान भी संशय से भरपूर है क्योंकि विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस में फीस स्ट्रक्चर तथा चालान में फीस अलग है। ऐसे में छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंता में है तथा दुविधा में रहने को मजबूर है।

इसी समस्या को लेकर आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपकर कर फीस जमा करने में आ रही दिक्कतों से रूबरू कराया। उन्होंने फीस जमा करने की तिथि को बढाने की मांग की।कैंपस सचिव जीवन ठाकुर ने बताया कि हालांकि एस एफ आई पहले डी एस के समक्ष उठाने गई लेकिन डी एस अपने कार्यालय से नदारद थे।इसके साथ साथ 2015 बैच के यू जी के छात्रों की मांगो को लेकर भी रजिस्ट्रार के समक्ष रखा गया।

इसके साथ ही एस एफ आई ने 2015 बैच के छात्रों के लिए पासिंग परसेंटेज को 45% से घटाकर 40% करने की मांग की है। इंटरनल एसेसमेंट तथा थेओरी के अंकों को कंबाइन करके एग्रीगेट परसेंटेज बनाई जाने कि मांग भी की।

कैंपस अध्यक्ष विक्रम ठाकुर ने कहा कि प्रशासन की नलायकी तथा लेटलातीफी की वजह से छात्र फीस जमा नहीं करवा पाए हैं। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द पोर्टल को सुचारू रूप से एक्टिवेट करे और फीस जमा करने की तिथि को भी तुरंत प्रभाव से एक्सटेंड किया जाए।

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तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन, परन्तु ऑकलैंड स्कूल पर अनैतिक हथकंडे अपनाने का आरोप

PTA constituted at Tarahall shimla and auckland school

शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि ऑकलैंड स्कूल प्रबंधन ने पीटीए के गठन के दौरान कई अनैतिक हथकंडे अपनाए। पीटीए के गठन से पहले स्कूल प्रबंधन ने कई अभिभावकों को टेलीफोन करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए अनचाहा दबाव बनाया व उन्हें प्रबंधन के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। मंच ने कहा कि इस बात की पोल बॉयज स्कूल की कक्षा दो के चुनाव के दौरान खुल गयी जब एक उम्मीदवार ने अभिभावकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान साफ तौर पर बोला कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने खड़ा किया है इसलिए अभिभावक उन्हें वोट दें। इस पर विवाद हो गया व अभिभावकों ने उस उम्मीदवार के खिलाफ खुली बगावत करके दूसरे उम्मीदवार को भारी मतों से जिता दिया।

मंच ने कहा कि ऐसा ही एक उदाहरण कक्षा छः में आया जहां पर चुनाव रोस्टर को जानबूझ कर बदलकर महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस पर कक्षा छः की दोनों सेक्शनों के सभी अभिभावक खड़े हो गए व उन्होंने इसे फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि कक्षा छः से छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ही प्रतिनिधि होंगे। पूरी कक्षा ने बिना किसी चुनाव के ही विजेंद्र मेहरा को निर्विरोध चुन लिया जिसे बाद में अभिभावकों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को मानना पड़ा।

मंच ने आरोप लगाया कि यह चुनाव पूरी तरह धांधलियों से भरपूर रहा। चुनाव के बाद चुनी गई कार्यकारी कमेटी के चुनाव में स्कूल प्रबंधन के लगभग दस लोग घुस आए व उन्होंने चुनाव को जबरन पांच मिनट में ही निपटा दिया जिसमें उन्होंने पहले से ही प्रबंधन द्वारा फिक्स उनके कुछ चहेतों को अपनी योजना के तहत मुख्य जिम्मेवारी सौंप दी। मंच ने कहा कहा कि इस कमेटी के चुनाव में इन लोगों का जबरन घुसना व कमेटी सदस्यों पर अनचाहा दबाव बनाना व उन्हें प्रभावित करना गैर संवैधानिक है। कार्यकारी कमेटी के चुनाव का नामांकन भी नहीं करवाया गया व इसे केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया गया। बगैर किसी नामांकन व चुनाव के ही यह कमेटी गठित कर दी गयी।

अभिभावक मंच ने कहा कि ऑकलैंड स्कूल का पीटीए का चुनावी रोस्टर गैर संवैधानिक था। चुनाव की प्रक्रिया नर्सरी से शुरू न करवाकर जान बूझकर प्लस टू से शुरू करवाई गई। किसी भी रोस्टर में सामान्य श्रेणी से शुरुआत होकर आरक्षित श्रेणी तक जाती है परन्तु यहां पर जान बूझ कर इस रोस्टर को बदल दिया गया ताकि प्रबंधन के चहेते चुनाव में जीतें।

मंच ने निदेशक उच्चतर शिक्षा से मांग की है कि भविष्य में निजी स्कूलों में होने वाले पीटीए के गठन को और ज़्यादा पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार कानून 2009,हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 व नियम 2003 तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ का पूर्णतः पालन हो व ऑकलैंड स्कूल की तर्ज़ पर पीटीए गठन में धांधली न हो।

अभिभावक मंच ने कहा कि 153 साल पुराने ऑकलैंड स्कूल में आज पहली मर्तबा पीटीए का गठन हुआ। यह छात्र अभिभावक मंच की पहली जीत है व इस जैसे सभी निजी स्कूलों के गाल पर करारा तमाचा है। निजी स्कूलों की तानाशाही के दी दिन अब लद रहे हैं। मंच ने कहा है कि संघर्ष जारी है और अगला पड़ाव निजी स्कूलों में भारी फीसों व अन्य विषयों को संचालित करने के लिए विधेयक लाने का है जिसका प्रारूप उच्चतर शिक्षा निदेशक ने बना दिया है। सम्भवतः इस विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश हो जाएगा।

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सीवरेज सेस बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर पड़ रहा अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ

Shimla sewerage cess hike

शिमला-जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहरी ने पेयजल कंपनी द्वारा पानी बिल के साथ प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपये सीवरेज सेस वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई है ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की अभी तक जो सेस शुल्क 30 फीसदी लिया जाता था उसे बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ पड़ रहा है , छोटे उपभोक्ता जो की पानी की कम खपत करते थे उस पर भी फ्लेट सौ रुपये शुल्क लगा देना तर्कसंगत नही है । निगम को इस बाबत पुनर्विचार करना चाहिए ये फ़ैसला पूरी तरह से जनविरोधी है इसे तुरंत वापस लेना चाहिए ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की पेयजय कंपनी द्वारा महीने के महीने पानी के बिल नही दिये जाते ऐसे मे यदि किसी उपभोक्ता को छ :माह या आठ माह बाद बिल दिया जा रहा है तो उसपर हर माह के हिसाब से सौ रुपए शुल्क जोड़ा जा रहा है, हर उपभोक्ता को हर माह सौ रुपये जोड़ने के इस गणित से पेयजल कंपनी खासा मुनफा कमा रही है और आम आदमी पर गैरजरूरी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है जिस पर जिला कांग्रेस कमेटी कड़ी आपत्ति जताती है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा आए दिन ही जन विरोधी व तुगलकी फैसले लिए जा रहें है, मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवा पाने मे नाकाम रहा निगम केवल आम आदमी की जेब से पैसे निकलवाने की फिराक मे रहता है , हर दूसरे माह किसी ने किसी तरह से कोई नया शुल्क लगाया जा रहा है , और कुछ नही मिला तो कूड़े का शुल्क बढ़ा दिया जाता है इस से जनता मे आक्रोश है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी ये मांग करती है की प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपए के इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए जिस से छोटे उपभोक्ताओ पर आर्थिक बोझ न पड़े अन्यथा महापौर व पेयजल कंपनी के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मोर्चा खोला जाएगा , निगम जनता पर तुगल्की फरमान लगाना बंद करें और शहर की जनता को मूलभूत सुविधाए प्रदान करने के प्रयास करे ।

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