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रोहड़ू के ग्रामीणों ने रात को खनन माफिया पर धावा बोल रंगे हाथों पकड़ा, पर पुलिस ने दिया भागने का मौका

Mining Mafias Rohru

लगभग 50-60 महिलाओं व पुरुषों ने रात 11 बजे खनन माफिया को रंगे हाथों पकड़ा लेकिन उक्त लोगों के अनुसार पुलिस द्वारा समय पर न पहुंचकर माफिया को भागने का मौका दिया गया।

शिमला- पब्बर नदी में अवैध खनन रोकने के लिए मैहंदली के पास सोमवार रात ग्रामीणों ने खनन माफिया पर धावा बोला तथा माफिया के वाहनों को रोका। यह वाकया रात 11 बजे का है तथा ग्रामीणों ने रात 11 बजे जब इसकी सूचना रोहड़ू पुलिस को दी तो पुलिस इसमें कोई भी गंभीरता न दिखाते हुए 2 बजे घटनास्थल पर पहुंची तथा तब तक अवैध खनन करने वाले वाहन मौके से निकल चुके थे व एक ही एल.एंड टी. मौके पर थी।

पंचायत प्रधान, वार्ड सदस्य व महिला मंडल प्रधान सहित लगभग 50-60 महिलाओं व पुरुषों ने रात 11 बजे खनन माफिया को रंगे हाथों पकड़ा लेकिन उक्त लोगों के अनुसार पुलिस द्वारा समय पर न पहुंचकर माफिया को भागने का मौका दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि रोहड़ू सब्जी मंडी से लेकर सिदौर तक पब्बर नदी में हर रोज रात के अंधेरे में प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध खनन किया जाता है जिससे तटवर्तीय लोगों की नींद हराम हो गई है।

पंचायत प्रधान व महिला मंडल प्रधान सीमा चौहान ने बताया कि खनन माफिया को पुलिस प्रशासन, खनन विभाग व नेताओं का आशीर्वाद है जिनके बलबूते पब्बर नदी में बेखौफ बड़ी-बड़ी मशीनें रात के अंधेरे में अवैध खनन में लगी है। उन्होंने कहा कि पब्बर नदी से हर रात लगभग 20 गाडिय़ां अवैध रेत व बजरी लेकर निकल रही हैं जिससे लाखों रुपए माफिया कमा रहे हैं। पंचायत प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि पब्बर नदी में हो रहे अवैध खनन बारे वह कई बार मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन को अवगत करवा चुके हैं लेकिन माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

न स्टाफ और न कोई वाहन फिर भी संभाला है 4 तहसीलों का जिम्मा : कमलेश

खनन विभाग के इंस्पैक्टर कमलेश कुमार ने कहा कि वह अकेले हैं न स्टाफ, न कोई वाहन तथा न ही कोई सुरक्षा उनके पास है फिर भी 4 तहसीलों का जिम्मा संभाले हुए हैं व चालान काटते हैं।

अवैध मार्गों को किया जाएगा बंद:शैलजा

जब इस बारे में जिला खनन अधिकारी शैलजा चौधरी ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, हम शिकायत मिलने पर तुरंत एक्शन लेते हैं व चालान काटते हैं। उन्होंने भी माना कि विभाग के पास वाहन की कमी के चलते उनके कर्मचारियों को परेशानी आ रही है लेकिन पब्बर नदी में अवैध खनन रोकने के लिए खनन माफिया द्वारा जिन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है उन अवैध मार्गों को तुरंत बंद किया जाएगा।

टिप्पर व जेसीबी का चालान काटा: विकास

इस मामले में पुलिस पर लगे आरोप बारे जब अतिरिक्त थाना प्रभारी रोहड़ू विकास से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा खनन माफिया की गाडिय़ां रोके जाने की उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं है लेकिन फोन आने के बाद पुलिस मौके पर गई थी तथा एक टिप्पर व एक जेसीबी का 45,000 रुपए का चालान काटा गया है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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