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‘हम केन्द्र के नौकर नहीं’ वीरभद्र सिंह का ऐसा बयान देना मुख्यमंत्री की गरिमा के अनुरूप नहीं:गणेश दत

शिमला-हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश दत ने कहा है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बयान की हम केन्द्र के नौकर नहीं है और केन्द्र हमारा मालिक नहीं है, ऐसा बयान 6 बार के मुख्यमंत्री की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी सरकार की मालिक जनता होती है जो सरकारों को बनाती है और हटाती है। ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बयान घमण्ड और अहंकार से भरा हुआ है और आने वाले समय में प्रदेश की जनता उनके इस घमण्ड को चूर-चूर करने के लिए बैठी है।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी जी की सरकार को जनता ने पूर्ण बहुमत के साथ विजयी बना करके देश के विकास और देश की जनता की सेवा का अवसर दिया है और मोदी जी ने ’’सबका साथ सबका विकास’’ की बात कही है। उन्होनें कभी भी नहीं कहा कि वह किसी भी प्रदेश की सरकार के मालिक है और न ही उन्होनें कभी मालिक होने का दावा किया है। उन्होनें तो अपने आप को प्रधानमंत्री न कहकर ’’प्रधान सेवक’’ कहा है और उसी के अनुरूप वह देश और प्रदेशों की विकास की योजनाऐं बना रहे हैं।

गणेश दत ने कहा कि वास्तव में वीरभद्र सिंह मण्डी जिला के थुनाग में एक प्रशिक्षण संस्थान के अधूरे भवन का उदघाटन करना चाहते थे जहां पर अभी बहुत सा कार्य पूर्ण होना बाकि है। जब केन्द्र ने अधूरे भवन का उदघाटन न करने की बात कही तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्योंकि वह उस प्रशिक्षण संस्थान के अधूरे भवन में अपने नाम की पट्टिका लगाने चाहते थे।

भारतीय जनता पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि अच्छा होता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह केन्द्र की प्रशंसा करते क्योंकि नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए 90:10 की औसत से प्रदेश को सहायता देने का कार्य शुरू किया हुआ है। कहना का अर्थ यह है कि केन्द्र सरकार विकास के लिए 90 रू0 देती है और केवल 10 रू0 ही प्रदेश सरकार को खर्च करने होते हैं।

जब केन्द्र में कांग्रेस और यूपीए की सरकार होती थी तो हिमाचल प्रदेश को विशेष श्रेणी राज्य से हटा दिया गया था और उस समय की सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कोई भी सहायता प्रदान नहीं की है और आज केन्द्र की मोदी सरकार खुले मन से प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध करवा रही है तो वीरभद्र सिंह उसका स्वागत करने की जगह केन्द्र को हम उसके नौकर नहीं है, कहकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की जनता यह बताएगी कि वीरभद्र सिंह प्रदेश के मालिक हैं या प्रदेश की जनता उनकी मालिक है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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