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टांडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बिना बताए निकाल दी किडनी, डेढ़ साल बाद खुली पोल

शिमला-हिमाचल के दूसरे सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में रेशे की बीमारी का इलाज कराने गए एक मरीज की डॉक्टरों ने बिना बताए किडनी ही निकाल दी।

ऑपरेशन के बावजूद बीमारी ठीक न होने पर पीडि़त ने जब करीब डेढ़ साल बाद एक प्राइवेट अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो उसे एक किडनी न होने का पता चला। मरीज अब पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल है।

दावा है कि पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें किडनी से जुड़ी कोई बीमारी न होने की बात कही है। मरीज का आरोप है कि टांडा में ऑपरेशन के दौरान किडनी निकालने के बारे में मरीज से कन्सेंट नहीं ली गई।

पीडि़त की लिखित शिकायत पर टांडा मेडिकल कॉलेज ने अब पूरे मामले की जांच आरंभ कर दी है। कॉलेज प्रशासन ने पीडि़त से उसका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड मंगवा लिया है।

किडनी निकालकर डॉक्टरों ने किया डिस्चार्ज, डेढ़ साल बाद खुलासा

हमीरपुर के जाहू निवासी जयपाल कुमार ने बताया कि वह 16 दिसंबर, 2014 को रेशे की बीमारी के उपचार को टांडा मेडिकल कॉलेज में दाखिल हुआ। 29 दिसंबर 2014 को डॉक्टरों की तीन सदस्यीय टीम ने उसका ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने यह कह कर उसे डिस्चार्ज कर दिया कि वह अब पूरी तरह से ठीक हो जाएगा।

जयपाल का कहना है कि ऑपरेशन के बावजूद बीमारी ठीक न होने पर जब उसने 11 अप्रैल 2016 को एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि उसकी दायीं किडनी ही निकाल दी गई है।

इसके बाद उसने इसकी टांडा मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उधर, जयपाल का ऑपरेशन करने वाली टीम में शामिल एक डॉक्टर ने संपर्क करने बताया कि मरीज की किडनी में ट्यूमर था और उसे कैंसर का खतरा हो सकता था।

हमीरपुर के जाहू निवासी जयपाल की शिकायत मिली है। इस मामले को लेकर जांच बिठा दी गई है। शिकायतकर्ता से हर मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई हैं। जांच के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।-डॉ. अनिल चौहान, प्रिंसिपल टांडा मेडिकल कॉलेज

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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