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रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश

Himachal NCC Cadets

गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।

शिमला- रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।

NCC Battalion Mandi

रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।

जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।

फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया। तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।

26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट

newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।

443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर

एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई।

रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल

एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।

सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

सवाल यह भी

रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।

मुहिम को झटका

रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।

Photo: TNS/Divya Himachal

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शिमला शहर में पानी की दरों में वृद्धि के बाद अब सीवरेज चार्जेज न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह करने से जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ

Shimla MC Sewerage Cess hike

शिमला – शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थीं तथा अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है जोकि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है।

वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था जो पूर्व नगर निगम ने इसे 30 प्रतिशत किया था। तब से लेकर अभी तक केवल 30 प्रतिशत ही सीवरेज चार्जेज लिए जा रहे थे। परन्तु इस माह जारी किए गए बिलों में यह न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह की दर से जोड़ दिए गए हैं जिससे कम पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह 100 प्रतिशत हो गया है जोकि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।

Shimla MC Water Bill Copy

आम नागरिकों के साथ-2 कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने भी बिलों में की गई इस भारी वृद्धि की कड़ी भर्त्सना की है तथा इस वृद्धि को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है।

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि जबसे बीजेपी की सरकार व नगर निगम शिमला का गठन हुआ है शिमला शहर की जनता पर पानी, बिजली, कूड़ा, बस आदि की सेवाओं की दरों में भारी वृद्धि की गई है। जिससे जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। शिमला शहर में पीने का पानी निजी हाथों में देने के लिए नगर निगम के जल विभाग को इससे अलग कर वर्ष 2018 में सरकार व नगर निगम ने एक कंपनी का गठन किया गया है। अब कंपनी पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही इसमें कोई नीतिगत हस्तक्षेप हो सकता है।

चौहान ने कहा कि कंपनी अब अपने स्तर पर निर्णय ले कर पेयजल को एक सेवा के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु के रूप में देने का कार्य कर रही है और अब मूल्य वसूली(cost recovery) के सिद्धान्त पर कार्य कर रही है जिससे स्वाभाविक रूप से जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

चौहान ने कहा कि वर्ष 2012 में भी तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था का निजीकरण लगभग कर ही दिया था। परन्तु जनता द्वारा सी.पी.एम. के महापौर व उपमहापौर चुने जाने पर इस निजीकरण के निर्णय को बदला गया तथा सरकार से एक लंबे संघर्ष के पश्चात वर्ष 2016 में पानी की पूरी व्यवस्था जिसमें पम्पिंग, लिफ्टिंग व वितरण नगर निगम ने अपने हाथों में लिया तथा नगर निगम के अधीन एक ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एवं सीवरेज सर्कल(GSWSSC) का गठन कर गुम्मा, गिरी, अश्विनी खड्ड व अन्य परियोजनाओ की पंप, पाइपलाइन को बदलने व अन्य कार्यो के लिये करीब 90 करोड़ की व्यवस्था की तथा कार्य प्रारंभ किया। जिसका परिणाम आज है कि शिमला शहर को 48-53 MLD तक रोज पानी मिल रहा है और विकराल पेयजल संकट को समाप्त किया गया। वर्ष 2015 में शहर को 65 MLD अतिरिक्त पानी व शहर में पानी की आपूर्ति व सीवरेज की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए 125 मिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक से ऋण हेतू केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग(DEA) से स्वीकृत करवाया गया था। जिसका कार्य अब आरम्भ हो रहा है।

चौहान ने कहा कि पेयजल की कंपनी के गठन के कारण आज जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में तो मार्च,2018 के पश्चात से लगभग 1 वर्ष 6 माह बीतने के पश्चात भी अभी तक बिल नहीं दिये गए हैं। अधिकांश वार्डो में कही 4 माह तो कहीं 6 माह के बाद किसी भी आधार पर बिल दिए जा रहे हैं। जबकि मार्च, 2017 में तत्कालीन नगर निगम ने निर्णय लिया था कि मई, 2017 से हर माह मीटर रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाएंगे और यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी जाएगी। परन्तु वर्तमान नगर निगम यह निर्णय तो नहीं लागू कर पाई इसके विपरीत कंपनी का गठन कर आज शहरवासियों को परेशानी में धकेल दिया है।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि पेयजल की दरों व सीवरेज चार्जेज में की गई वृद्धि को तुरंत वापिस ले। हर उपभोक्ता को मीटर रीडिंग के आधार पर हर माह बिल दिये जाए तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए। सरकार शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की व्यवस्था को बदल कर इसे पुनः नगर निगम शिमला के अधीन करें ताकि संविधान के 74वें संशोधन जिसमें शहरों में पेयजल की व्यवस्था करने का दायित्व नगर निगम को दिया गया है को लागू किया जा सके।

चौहान ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो पार्टी जनता को लामबंद कर सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन करेगी।

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100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा, साथ में स्तिथ देवस्थल का भी नहीं लिहाज़

Littering in Mandi district
  • 100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा

  • शहर के साथ लगते सन्यारड़ी गांव के लोग नहीं दे रहे स्वच्छता में सहयोग

  • अधिकतर परिवार 100 रूपए देकर घर से उठवा रहे हैं कूड़ा

  • खुले में कूड़ा फैंकने से बन रहा है बीमारियों का खतरा

मंडी- कुछ लोगों के लिए स्वच्छता से बढ़कर चंद रूपए हो जाते हैं। ऐसे लोग कभी भी समाज के लिए सही उदाहरण नहीं बन पाते हैं। कुछ ऐसी ही हरकतें कर रहे हैं सन्यारड़ी गांव के कुछ लोग। यह गांव शहर के बिल्कुल साथ सटा हुआ है। शहर के साथ सटा होने के कारण नगर परिषद मंडी ने यहां पर भी डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन स्कीम चला रखी है। गांव के अधिकतर परिवार इस स्कीम के तहत हर महीने 100 रूपए अदा करते हैं। इन परिवारों के घर से नगर परिषद के कर्मचारी खुद कूड़ा उठाकर ले जाते हैं।

garbage dumping on Mandi road side 2

लेकिन कुछ ऐसे हैं जो 100 रूपए बचाने के चक्कर में अपने घर से निकलने वाला कूड़ा सड़क किनारे खुले में फैंक रहे हैं। कूड़ा गांव के मुहाने पर सुनसान सड़क के किनारे फैंका जा रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि यहां एक देवस्थल भी है। लोग उसकी भी परवाह किए बिना यहां खुले में कूड़ा फैंकने से गुरेज नहीं कर रहे। स्थानीय निवासी डा. जीवानंद चौहान ने बताया कि कुछ लोगों के कारण गांव में गंदगी का आलम फैलता जा रहा है जिस कारा बीमारियां फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है। इन्होंने नगर परिषद व प्रशासन से इस ओर विशेष ध्यान देने की गुहार लगाई है।

garbage dumping on Mandi road side 5

वहीं जब इस बारे में नगर परिषद मंडी की अध्यक्षा सुमन ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो लोग खुले में कूड़ा फैंक रहे हैं उनके खिलाफ जल्द की कठोर कार्रवाही अम्ल में लाई जाएगी। जिस स्थान पर कूड़ा फैंका जा रहा है वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। जो भी कैमरे में कूड़ा फैंकता हुआ नजर आया उसे पांच हजार रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

उन्होंने सन्यारड़ी गांव के लोगों से स्वच्छता के क्षेत्र में नगर परिषद को सहयोग करने की अपील भी की है।

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आढ़तियों के विरुद्ध चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमें, फिर भी सरकार ने कारोबार करने की दे दी अनुमति

Apple commission agents fraud

शिमला– किसान संघर्ष समिति की बैठक 19 जुलाई को गुम्मा, कोटखाई में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सुशील चौहान की ने की तथा इसमे समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों व बागवानों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की

बैठक में बागवानों ने अवगत करवाया कि जिन आढ़तियों ने बागवानों का बकाया भुगतान करना है व उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई है, इनमें से कुछ आढ़तियों ने दुकाने खोल कर अपना कारोबार आरम्भ कर दिया है। जबकि ए पी एम सी कह रही हैं कि ऐसे आढ़तियों व कारोबारियों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। इससे ए पी एम सी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है और वह इनको कारोबार की इनको कैसे इजाजत दे रही हैं जबकि इनके विरुद्ध मुकदमे चल रहे हैं और कार्यवाही की जानी हैं।

बागवानों ने कहा कि इसके अलावा ए पी एम सी, अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xxi में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी कारोबारी होगा उसको लाइसेंस जारी करने से पहले नकद में सुरक्षा के रूप में बैंक गारंटी लेनी है परंतु ए पी एम सी के द्वारा कोई भी ऐसी व्यवस्था नहीं की है जिससे बागवानों को मण्डियों में धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। ए पी एम सी निर्देश जारी कर रही हैं कि आढ़ती खरीददार की जांच करवाएगा और पता लगाएं कि वह सही है या नहीं। जोकि ए पी एम सी अपने विधिवत दायित्व को निभाने से भाग रही हैं। क्योंकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ए पी एम सी का वैधानिक दायित्व हैं।

बागवानों ने कहा कि ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xix में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान बागवान का जिस दिन ही उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाए। परन्तु ए पी एम सी का ये बयान कि यदि 15 दिन तक आढ़ती या खरीददार भुगतान नही करता तो उसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। यह ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की खुले तौर पर अवहेलना हैं। इससे ए पी एम सी की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।

बागवानों ने बैठक में ये भी अवगत करवाया कि सरकार द्वारा मजदूरी के रूप में 5 रुपये प्रति पेटी की जो दर तय की गई है कई मण्डियों में यह 25 से 30 रुपए तक ली जा रही हैं। बागवानों ने गत वर्ष भी सरकार व ए पी एम सी से इस बारे शिकायत की थी। परन्तु इस पर भी अभी तक कोई रोक नहीं लगाई गई है।

बैठक में कुछ बागवानों ने अवगत करवाया कि SIT के माध्यम से कुछ बागवानो का आढ़तियों के द्वारा भुगतान भी किया गया है और कुछ बागवानों की बकाया राशी 20 जुलाई, 2019 तक दी जायेगी।

बैठक में कोटखाई के 4 ऐसे बागवान भी थे जिन्होंने भी आढ़तियों से और पैसे लेने है। यह कुल रकम 6,91,605 रुपये बनती हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इनकी ओर से भी दोषी आढ़तियों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार किसान संघर्ष समिति द्वारा 24 जून, 2019 को दिये गए मांगपत्र पर शीघ्र कार्यवाही करें। तथा ए पी एम सी की लचर कार्यप्रणाली को सुचारू करने के लिए सख्त आदेश करें ताकि किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और उनको मण्डियों में धोखाधड़ी व शोषण से बचाया जा सके। यदि सरकार इन माँगो पर तुरन्त ठोस कदम नहीं उठती है तो किसान संघर्ष समिति अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी

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