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आइजीएमसी जेनरिक सेंटर का सच: 17 दिनों से उपचाराधीन गरीब बच्चे को मिल पाई सिर्फ एक 40 रुपये की मुफ्त दवाई

Shimla IGMC

शिमला- आइजीएमसी अस्पताल शिमला के ऑर्थो वार्ड में बैड नंबर सात पर बैठी सीता के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। सीता का पति श्याम लाल डेढ़ साल के बेटे अनमोल को गोद में लेकर बैठा था। डॉक्टरों ने अनमोल को कैल्शियम की दवा लगातार खिलाने के लिए कहा है।

generic medicine shop shimla igmc

सोमवार को अनमोल का ऑपरेशन होना था जिसके लिए श्याम लाल ने रिश्तेदारों से एक लाख 65 हजार रुपये उधार लिए हैं। ऑपरेशन के सामान की लिस्ट देखकर श्याम लाल व सीता देवी दोनों चिंता में डूबे हुए थे । उन्हें चिंता थी कि ऑपरेशन के लिए पैसे कम न पड़ें, दवाइयां कहां से आएंगी और उधार पैसे कैसे चुकाएंगे। अस्पताल में 17 दिनों से उपचाराधीन अनमोल को अभी तक केवल 40 रुपये की एक ही दवाई जेनरिक सेंटर से मुफ्त मिली है। वे अभी तक 20 हजार रुपये से अधिक का खर्च दवाइयों के लिए कर चुके हैं। एक-एक इंजेक्शन 500 रुपये का पड़ रहा है। पेशे से मजदूर श्याम लाल कहते हैं कि हमें सरकार द्वारा चलाई जा रहे मुफ्त जेनरिक औषधालय का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। दवा तो यहां मिलती नहीं है। दवाइयां तो बाजार से ही खरीदनी पड़ती हैं। कोई भी केंद्र खुले, आम आदमी को कोई लाभ नहीं मिलता है। कारण यह है कि डॉक्टरों की निजी कंपनियों के साथ मिलीभगत होती है। इस कारण मुफ्त मिलने वाली दवाइयां लिखते ही नहीं हैं। ऐसे में लोगों को पैसे खर्च कर दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।

डॉक्टर ले जा रहे दवाइयों के डिब्बे

आइजीएमसी अस्पताल में मुफ्त दवा सेंटर लोगों के लिए महज दिखावा साबित हो रहा है। लोग बड़ी आस से पर्ची लेकर मुफ्त औषधालय पहुंचते हैं लेकिन वहां पर जवाब मिलता है यह दवाई नहीं है। लोगों को दवा की एक भी गोली जेनरिक औषधालय में नहीं मिल रही है। वहीं, आइजीएमसी के डॉक्टर दवाइयों के डिब्बे के डिब्बे यहां से ले जा रहे हैं। ऐसे में जेनरिक औषधालय की दवा वितरण प्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है।

अब तो उधार भी नहीं मिल रहा

मंडी के तलेली गांव की निवासी सीता कहती हैं कि एक लाख 65 हजार रुपये लोगों से उधार ले चुके हैं। लोगों ने भी अब उधार देना बंद कर दिया है। हजारों रुपये रोजना दवाइयों पर खर्च हो रहे हैं। सारा खर्च उधार के पैसे से चल रहा है। अब पैसे कैसे लौटाएंगे, इससे ज्यादा चिंता बच्चे के स्वस्थ होने की है।

दवा का नाम लिखते हैं, साल्ट नहीं

जेनरिक औषधालय के अधिकारी का कहना है कि डॉक्टर दवा का साल्ट न लिखकर दवा का नाम पर्ची पर लिख रहे हैं। वे दवाइयां बाजार में ही उपलब्ध हो पाती हैं। यदि साल्ट लिखें तो दवा उपलब्ध हो सकती है।

Photo: Tarun Sharma

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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