Connect with us

अन्य खबरे

अगर शहीदों के परिवारों की भावनाओं का सम्मान नहीं तो अनुराग पाकिस्तान का झंडा लेकर घूमें : वीरभद्र

Virbhadra sing on Anurag Thakur's tiranga yatra shimla

शिमला- बीसीसीआई सचिव और भाजपा सांसद अनुुराग ठाकुर की शनिवार से शिमला से शुरू होने वाली तिरंगा यात्रा पर व्यंग्य वाण चलाते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि अनुराग ठाकुर को पाकिस्तान का झंडा लेकर घूमना चाहिए।

वीरभद्र सिंह ने अनुराग ठाकुर पर तलख हो कर कहा कि उन्हें शर्मा आनी चाहिए। और उन्होंने ने यह भी कहा कि कहा कि अगर वो पाकिस्तान के साथ मैच रदद होन से खफा है तो उन्हें पाकिस्तान का झंडा लेकर चलना चाहिए। हिंदुस्‍तान का ढंडा लेकर वो यात्रा क्यों कर रहे है। वो बचपना कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि उनोहने तिरंगे का अपमान नही किया है जो ये तिरंगा यात्रा निकलने जा रहे है!

वीरभद्र सिंह का कहना है कि धर्मशाला में भारत पाक के बीच रदद हुए ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच पर सफाई देते हुए कहा कि सरकार ने ये कभी नहीं कहा कि वो सुरक्षा देने को तैयार नहीं है। वो पाकिस्तान टीम को स्टेडियम व स्टेडियम के बाहर कहीं भी सुरक्षा देने को तैयार है। मैच रदद सरकार की वजह से नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री विधानसभा परिसर में मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे थे।

अनुराग ठाकुर पर पलटवार करते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा कि भारत पाक मैच का विरोध पूर्व सैनिक और पठानकोट और पंपोर में शहीद हुए सैनिकों के परिवार कर रहे थे। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते है। क्या अनुराग ठाकुर को उनकी भावनाओं का सम्‍मान नहीं करना चाहिए। उनको क्रिकेट की पड़ी है। वो लोगों की भावनाओं की इज्जत नहीं कर रहे है।

गौरतलब हो कि भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से जेएनयू कांड के बाद शनिवार को शिमला से तिरंग यात्रा शुरू की जा रही है।इसकी शुरूआत भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर कर रहे है।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Featured

तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन, परन्तु ऑकलैंड स्कूल पर अनैतिक हथकंडे अपनाने का आरोप

PTA constituted at Tarahall shimla and auckland school

शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि ऑकलैंड स्कूल प्रबंधन ने पीटीए के गठन के दौरान कई अनैतिक हथकंडे अपनाए। पीटीए के गठन से पहले स्कूल प्रबंधन ने कई अभिभावकों को टेलीफोन करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए अनचाहा दबाव बनाया व उन्हें प्रबंधन के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। मंच ने कहा कि इस बात की पोल बॉयज स्कूल की कक्षा दो के चुनाव के दौरान खुल गयी जब एक उम्मीदवार ने अभिभावकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान साफ तौर पर बोला कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने खड़ा किया है इसलिए अभिभावक उन्हें वोट दें। इस पर विवाद हो गया व अभिभावकों ने उस उम्मीदवार के खिलाफ खुली बगावत करके दूसरे उम्मीदवार को भारी मतों से जिता दिया।

मंच ने कहा कि ऐसा ही एक उदाहरण कक्षा छः में आया जहां पर चुनाव रोस्टर को जानबूझ कर बदलकर महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस पर कक्षा छः की दोनों सेक्शनों के सभी अभिभावक खड़े हो गए व उन्होंने इसे फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि कक्षा छः से छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ही प्रतिनिधि होंगे। पूरी कक्षा ने बिना किसी चुनाव के ही विजेंद्र मेहरा को निर्विरोध चुन लिया जिसे बाद में अभिभावकों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को मानना पड़ा।

मंच ने आरोप लगाया कि यह चुनाव पूरी तरह धांधलियों से भरपूर रहा। चुनाव के बाद चुनी गई कार्यकारी कमेटी के चुनाव में स्कूल प्रबंधन के लगभग दस लोग घुस आए व उन्होंने चुनाव को जबरन पांच मिनट में ही निपटा दिया जिसमें उन्होंने पहले से ही प्रबंधन द्वारा फिक्स उनके कुछ चहेतों को अपनी योजना के तहत मुख्य जिम्मेवारी सौंप दी। मंच ने कहा कहा कि इस कमेटी के चुनाव में इन लोगों का जबरन घुसना व कमेटी सदस्यों पर अनचाहा दबाव बनाना व उन्हें प्रभावित करना गैर संवैधानिक है। कार्यकारी कमेटी के चुनाव का नामांकन भी नहीं करवाया गया व इसे केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया गया। बगैर किसी नामांकन व चुनाव के ही यह कमेटी गठित कर दी गयी।

अभिभावक मंच ने कहा कि ऑकलैंड स्कूल का पीटीए का चुनावी रोस्टर गैर संवैधानिक था। चुनाव की प्रक्रिया नर्सरी से शुरू न करवाकर जान बूझकर प्लस टू से शुरू करवाई गई। किसी भी रोस्टर में सामान्य श्रेणी से शुरुआत होकर आरक्षित श्रेणी तक जाती है परन्तु यहां पर जान बूझ कर इस रोस्टर को बदल दिया गया ताकि प्रबंधन के चहेते चुनाव में जीतें।

मंच ने निदेशक उच्चतर शिक्षा से मांग की है कि भविष्य में निजी स्कूलों में होने वाले पीटीए के गठन को और ज़्यादा पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार कानून 2009,हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 व नियम 2003 तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ का पूर्णतः पालन हो व ऑकलैंड स्कूल की तर्ज़ पर पीटीए गठन में धांधली न हो।

अभिभावक मंच ने कहा कि 153 साल पुराने ऑकलैंड स्कूल में आज पहली मर्तबा पीटीए का गठन हुआ। यह छात्र अभिभावक मंच की पहली जीत है व इस जैसे सभी निजी स्कूलों के गाल पर करारा तमाचा है। निजी स्कूलों की तानाशाही के दी दिन अब लद रहे हैं। मंच ने कहा है कि संघर्ष जारी है और अगला पड़ाव निजी स्कूलों में भारी फीसों व अन्य विषयों को संचालित करने के लिए विधेयक लाने का है जिसका प्रारूप उच्चतर शिक्षा निदेशक ने बना दिया है। सम्भवतः इस विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश हो जाएगा।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

शिमला शहर में पानी की दरों में वृद्धि के बाद अब सीवरेज चार्जेज न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह करने से जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ

Shimla MC Sewerage Cess hike

शिमला – शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थीं तथा अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है जोकि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है।

वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था जो पूर्व नगर निगम ने इसे 30 प्रतिशत किया था। तब से लेकर अभी तक केवल 30 प्रतिशत ही सीवरेज चार्जेज लिए जा रहे थे। परन्तु इस माह जारी किए गए बिलों में यह न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह की दर से जोड़ दिए गए हैं जिससे कम पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह 100 प्रतिशत हो गया है जोकि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।

Shimla MC Water Bill Copy

आम नागरिकों के साथ-2 कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने भी बिलों में की गई इस भारी वृद्धि की कड़ी भर्त्सना की है तथा इस वृद्धि को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है।

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि जबसे बीजेपी की सरकार व नगर निगम शिमला का गठन हुआ है शिमला शहर की जनता पर पानी, बिजली, कूड़ा, बस आदि की सेवाओं की दरों में भारी वृद्धि की गई है। जिससे जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। शिमला शहर में पीने का पानी निजी हाथों में देने के लिए नगर निगम के जल विभाग को इससे अलग कर वर्ष 2018 में सरकार व नगर निगम ने एक कंपनी का गठन किया गया है। अब कंपनी पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही इसमें कोई नीतिगत हस्तक्षेप हो सकता है।

चौहान ने कहा कि कंपनी अब अपने स्तर पर निर्णय ले कर पेयजल को एक सेवा के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु के रूप में देने का कार्य कर रही है और अब मूल्य वसूली(cost recovery) के सिद्धान्त पर कार्य कर रही है जिससे स्वाभाविक रूप से जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

चौहान ने कहा कि वर्ष 2012 में भी तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था का निजीकरण लगभग कर ही दिया था। परन्तु जनता द्वारा सी.पी.एम. के महापौर व उपमहापौर चुने जाने पर इस निजीकरण के निर्णय को बदला गया तथा सरकार से एक लंबे संघर्ष के पश्चात वर्ष 2016 में पानी की पूरी व्यवस्था जिसमें पम्पिंग, लिफ्टिंग व वितरण नगर निगम ने अपने हाथों में लिया तथा नगर निगम के अधीन एक ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एवं सीवरेज सर्कल(GSWSSC) का गठन कर गुम्मा, गिरी, अश्विनी खड्ड व अन्य परियोजनाओ की पंप, पाइपलाइन को बदलने व अन्य कार्यो के लिये करीब 90 करोड़ की व्यवस्था की तथा कार्य प्रारंभ किया। जिसका परिणाम आज है कि शिमला शहर को 48-53 MLD तक रोज पानी मिल रहा है और विकराल पेयजल संकट को समाप्त किया गया। वर्ष 2015 में शहर को 65 MLD अतिरिक्त पानी व शहर में पानी की आपूर्ति व सीवरेज की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए 125 मिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक से ऋण हेतू केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग(DEA) से स्वीकृत करवाया गया था। जिसका कार्य अब आरम्भ हो रहा है।

चौहान ने कहा कि पेयजल की कंपनी के गठन के कारण आज जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में तो मार्च,2018 के पश्चात से लगभग 1 वर्ष 6 माह बीतने के पश्चात भी अभी तक बिल नहीं दिये गए हैं। अधिकांश वार्डो में कही 4 माह तो कहीं 6 माह के बाद किसी भी आधार पर बिल दिए जा रहे हैं। जबकि मार्च, 2017 में तत्कालीन नगर निगम ने निर्णय लिया था कि मई, 2017 से हर माह मीटर रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाएंगे और यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी जाएगी। परन्तु वर्तमान नगर निगम यह निर्णय तो नहीं लागू कर पाई इसके विपरीत कंपनी का गठन कर आज शहरवासियों को परेशानी में धकेल दिया है।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि पेयजल की दरों व सीवरेज चार्जेज में की गई वृद्धि को तुरंत वापिस ले। हर उपभोक्ता को मीटर रीडिंग के आधार पर हर माह बिल दिये जाए तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए। सरकार शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की व्यवस्था को बदल कर इसे पुनः नगर निगम शिमला के अधीन करें ताकि संविधान के 74वें संशोधन जिसमें शहरों में पेयजल की व्यवस्था करने का दायित्व नगर निगम को दिया गया है को लागू किया जा सके।

चौहान ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो पार्टी जनता को लामबंद कर सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन करेगी।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा, साथ में स्तिथ देवस्थल का भी नहीं लिहाज़

Littering in Mandi district
  • 100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा

  • शहर के साथ लगते सन्यारड़ी गांव के लोग नहीं दे रहे स्वच्छता में सहयोग

  • अधिकतर परिवार 100 रूपए देकर घर से उठवा रहे हैं कूड़ा

  • खुले में कूड़ा फैंकने से बन रहा है बीमारियों का खतरा

मंडी- कुछ लोगों के लिए स्वच्छता से बढ़कर चंद रूपए हो जाते हैं। ऐसे लोग कभी भी समाज के लिए सही उदाहरण नहीं बन पाते हैं। कुछ ऐसी ही हरकतें कर रहे हैं सन्यारड़ी गांव के कुछ लोग। यह गांव शहर के बिल्कुल साथ सटा हुआ है। शहर के साथ सटा होने के कारण नगर परिषद मंडी ने यहां पर भी डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन स्कीम चला रखी है। गांव के अधिकतर परिवार इस स्कीम के तहत हर महीने 100 रूपए अदा करते हैं। इन परिवारों के घर से नगर परिषद के कर्मचारी खुद कूड़ा उठाकर ले जाते हैं।

garbage dumping on Mandi road side 2

लेकिन कुछ ऐसे हैं जो 100 रूपए बचाने के चक्कर में अपने घर से निकलने वाला कूड़ा सड़क किनारे खुले में फैंक रहे हैं। कूड़ा गांव के मुहाने पर सुनसान सड़क के किनारे फैंका जा रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि यहां एक देवस्थल भी है। लोग उसकी भी परवाह किए बिना यहां खुले में कूड़ा फैंकने से गुरेज नहीं कर रहे। स्थानीय निवासी डा. जीवानंद चौहान ने बताया कि कुछ लोगों के कारण गांव में गंदगी का आलम फैलता जा रहा है जिस कारा बीमारियां फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है। इन्होंने नगर परिषद व प्रशासन से इस ओर विशेष ध्यान देने की गुहार लगाई है।

garbage dumping on Mandi road side 5

वहीं जब इस बारे में नगर परिषद मंडी की अध्यक्षा सुमन ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो लोग खुले में कूड़ा फैंक रहे हैं उनके खिलाफ जल्द की कठोर कार्रवाही अम्ल में लाई जाएगी। जिस स्थान पर कूड़ा फैंका जा रहा है वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। जो भी कैमरे में कूड़ा फैंकता हुआ नजर आया उसे पांच हजार रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

उन्होंने सन्यारड़ी गांव के लोगों से स्वच्छता के क्षेत्र में नगर परिषद को सहयोग करने की अपील भी की है।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Trending