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आरटीआई में खुलासा: करोड़ों के क़र्ज़ में डूबे हिमाचल के मंत्री सपरिवार कर रहे विदेश की सैर

HP Cabinate

आरटीआई में खुलासा: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स को छोड़ सभी ने क्लेम किया लाखों का डीए,सपरिवार की विदेश की सैर या फिर जमे रहे हलकों में, शांडिल को छोड़ किसी को नहीं मिली सचिवालय में बैठने की फुरसत

संसाधनों की कमी से साल दर साल करोड़ों के कर्ज में दब कर गरीब होते हिमाचल प्रदेश के विकास की इबारत विश्व बैंक, नाबार्ड और भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों से उधार लेकर लिखी जा रही है। लेकिन कई मंत्री मंत्री इस हालत को जानते हुए भी समझने को तैयार नहीं हैं। हां, विद्या स्टोक्स की तरह दरियादिली कोई नहीं दिखा रहा। सचिवालय प्रशासन विभाग का 2015 में छह माह का रिकॉर्ड बताता है कि दौरों में मंत्रियों की कमाई भी मोटी हो रही है।

मंत्री सिडनी, बैंकॉक, दुबई, न्यूयार्क, बोस्टन, यूरोप, स्पेन, इंग्लैंड जैसे देशों की सैर करने में रुचि दिखा रहे हैं लेकिन शिमला सचिवालय के कार्यालयों बैठना अधिकतर को पंसद नहीं।

क्लेम किया जा रहा डीए सरकारी खजाने में लाखों की सेंध लगा रहा है। प्रदेश या अन्य राज्यों में विभागीय कार्यों की एवज में जो दैनिक भत्ते मंत्री क्लेम कर रहे हैं, उन पैसों को लेने में तो जैसे मंत्रियों में होड़ लगी हैं। अन्य राज्यों में भी जनसुनवाई के हवाले से लाखों वसूले जो रहे हैं।

एक मंत्री ने प्रदेश के बाहर अपना नियमित स्वास्थ्य चैकअप और टेस्ट जहां करवाए, उस राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान के निदेशक और दूसरे पदाधिकारियों से बैठक का हवाला डीए क्लेम करने के लिए दिया। अगले ही दिन साहब उस राज्य के निजी स्वास्थ्य संस्थान में दाखिल हुए।
कई मंत्रियों ने उडनख़टोलों में की विदेशों की सैर के लिए लाखों रुपये का डीए लिया। एक मंत्री ने देश के भीतर अपने पूरे परिवार को दिल्ली से हिमाचल की सैर उडनख़टोले में करवाई पर खर्चा पूरा सरकार से ही लिया। एक अन्य मंत्री ने जीवन संगिनी को सैर करवाई। कई ने विदेश जाकर निजी दौरे के नाम पर कई दिन सरकारी घोषित किए। वहां की योजनाएं यहां के पहाड़ पर कितनी चढ़ीं, जनता उसे जानती है और इंतजार में है। और तो और, शताब्दी में खाए खाने का भी डीए लिया। काबिले-जिक्र यह कि यह डीए, गाडिय़ों, पेट्रोल, मंत्री स्टाफ सहित अन्य के लाखों खर्च का यह मात्र चुटकी भर है।

हिमाचल मंत्रियों का चंद दिनों का दैनिक भत्ता

मंत्री का नाम दैनिक भत्ता (रुपये) अवधि
Virbhadra-Singh_ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 1,39,248 85
mukesh-agnihotri उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री 93,000 32
Thakur Singh Bharmouri वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी 2,49,802 134
Urban-Development-Minister-Sudhir-Sharma शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा 2,83,018 174
Dhani-Ram-Shandil सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग धनीराम शांडिल 1,67,335 185
panchayati raj minister Anil Sharma पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा 3,70,750 177
GS Bali परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली 2,51,637 76
Prakash-Choudhary-Minister-Of-Excise-and-Taxation-himachal आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी 2,74,627 154
Thakur Kaul Singh स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह 2,18,576 151
sujan-singh-pathania ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया 1,40,850 163
vidya-stokes आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स

राहत यह है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस लिहाज से समझदार हैं। विद्या स्टोक्स ऐसा कोई पैसा नहीं लेती तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस मामले में सबसे शालीन हैं। उन्होंने सबसे कम दैनिक भत्ता क्लेम किया है। दूसरे नंबर पर ऊर्जा मंत्री व तीसरे स्थान पर धनी राम शांडिल हैं। जबकि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अधिकतर मंत्रियों ने वहां डीए क्लेम नहीं किया हैं। एक मंत्री की जानकारी देने में जीएडी ने गुरेज किया।

प्रकाश चौधरी ने की विदेश की सैर

प्रकाश चौधरी औसतन बीस प्रतिशत ही शिमला में सचिवालय में अपने स्टाफ के साथ बैठे। अस्सी फीसद दौरे उनके विदेश, दिल्ली, चंड़ीगढ़ सहित अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही रहे। 24 सितंबर को शिमला से विदेश के लिए रवाना हुए। एक दिन बाद दिल्ली एयरपोर्ट से बैंकाक के लिए निकले, फिर यहां से सिडनी पहुंचे। इतने सफर तक उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार के डॉलर खर्चे। मगर इसके बाद सिडनी में वेलिंगटन घूमे। चार से लेकर दस अक्टूबर तक उन्होंने टीए-डीए क्लेम नहीं किया और ऑकलैंड में रुके। उन्होंने यह निजी दौरा बताया है। वापस दिल्ली पहुंचे। 14 अक्टूबर को शिमला पहुंचे। धर्मशाला में शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान अपने दम पर रहे, कोई सरकारी खर्च नहीं लिया।

भरमौरी को भाता है भरमौर में रहना

प्रदेश के वन मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के बीच रहना पंसद करते हैं। अक्तूबर में तो दो दिन ही वन मंत्री शिमला आए हैं। दिल्ली और चंडीगढ़ के दौरों पर भी कम ही जाते हैं। घरेलू एयरपोर्ट से चंडीगढ़ दिल्ली में हवाई सेवाएं अगस्त महीने में बैठकों के लिए उपयोग की। मुख्यमंत्री के साथ हेलीकॉप्टर में भी घूमे, उनके साथ जनसभाओं में गए। दिल्ली दौरे के दौरान हालांकि अपने साथ एक सहयोगी को भी हवाई यात्रा सरकारी खर्च पर करवाई। अपने विधानसभा क्षेत्र में दौरे किए। 19 से लेकर 23 नवंबर 2015 तक निजी गाड़ी में घूमे, मगर डीए लेना नहीं भूले।

सचिवालय में बैठने का रिकॉर्ड शांडिल के नाम

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अधिक सचिवालय में बैठना पंसद करते हैं। अन्य मंत्रियों में सबसे अधिक सचिवालय में बैठने का उनका रिकॉर्ड रहा हैं। जुलाई महीने में 27 दिन तक वह शिमला सचिवालय में बैठे, एक साथ इतने दिनों तक सचिवालय में मौजूदगी का रिकॉर्ड उपरोक्त अवधि में अन्य किसी के नाम नही रहा हैं। अन्य महीनों में औसतन 6 माह में तीस फीसद तक सचिवालय में मौजूद रहे जबकि पचास प्रतिशत तक अपने विधानसभा क्षेत्र और शेष में बाहरी राज्यों के दौरों और मंत्रालय के साथ बैठकों में गए। नई दिल्ली और चंडीगढ़ दौरों के दौरान बोर्डिंग पास पर 5500 रुपये के लिए क्लेम सरकार से लिया। सितंबर में प्रदेश के बाहर के दौरों के लिए हवाई सेवा टिकट क्लेम किया है। विदेश दौरे पर नहीं गए।

अक्टूबर में एक ही दिन शिमला रहे सुधीर

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा अधिकतम समय शिमला से बाहर ही रहें हैं। दिल्ली चड़ीगढ़ के दौरे विभागीय बैठकों के नाम पर थे। इस दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से हिमाचल में एयरपोर्ट विस्तार, विभाग की विभिन्न योजनाओं के फॉलोअप कई मंत्रालयों में किए। अक्तूबर में तो सिर्फ एक दिन शिमला सचिवालय में बैठे। बैजनाथ में पैराग्लाइडिंग वल्र्ड कप की मेजबानी में भी व्यस्तता रही। नौ अक्टूबर को शिमला से दिल्ली रवाना हुए और फिर पूरे महीने शिमला ही नहीं आए। हां दिल्ली में मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहे।
नवंबर अंत से लेकर मध्य दिसंबर तक चंडीगढ़ दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहे। 21 नवंबर को धर्मशाला से गग्गल तक 10,955 रूपए की टिकट , फिर 22 से लेकर 28 नवंबर तक विभिन्न मंत्रालयों में योजनाओं का फीडबैक लिया और प्रदेश का पक्ष रखा। अगले दिन अपनी बेटी आध्या और पत्नी रीना के साथ दिल्ली से गग्गल पहुंचे। इस दौरान 8,027 रूपए क्लेम किए। शीतकालीन विधानसभा सत्र के बाद सात दिसंबर को परिवार सहित दिल्ली गए, 21 हजार रुपए की टिकट लगी और वापसी 13 दिसंबर को भी हवाई सेवा से की उसके टिकट भी 16000 के आसपास दिए।

दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में गए सुजान

प्राप्त जानकारी में सुजान सिंह पठानिया ने एक टुअर ऐसा भी डीए के लिए क्लेम किया हैं जिसका जिक्र अन्य मंत्रियों ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान नहीं किया हैं। 19 सितंबर को शिमला से दिल्ली सरकारी गाड़ी में रवाना हुए और बीस को वहां कैबिनेट बैठक में भाग लिया और मुख्यमंत्री के साथ रहे। उसके बाद अगले दिन शिमला पहुंचे। विदेश सैर नहीं की, शिमला सचिवालय में बैठना भी अधिक पंसद नहीं किया। मगर दिल्ली चंडीगढ़ का दौरे विभागीय कार्यो के लिए हवाई सेवाओं के जरिए खूब की। फतेहपुर में ही अधिक जमे रहे।

अपना खर्च करते हैं मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शिमला में कम बैठे, दिल्ली, चंडीगढ़ के दौरे विभागीय कार्यो के चलते अधिक किए। अन्य राज्यों में भी गए मगर, उन्होंने अन्य मंत्रियों के लिए मिसाल कायम की कि निजी दौरों के लिए सरकारी खर्च के लिए क्लेम नहीं किया। अधिकतर दौरों का स्वयं भुगतान किया, जो निजी दौरे घोषित किए हैं। 19 जुलाई को लखनऊ बाई एयर, 25 जुलाई को सड़क मार्ग से जालंधर, मगर स्वयं खर्च उठाया।

दिल्ली, चंडीगढ़ और नगरोटा में रहे बाली

परिवहन एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली इस अवधि में औसतन दस प्रतिशत ही सचिवालय में रहे। अधिकतर अपने विधानसभा क्षेत्र और दिल्ली चंडीगढ़ के दौरे पर रहे। सभी दौरों में दिल्ली चंडीगढ़ में अपनी निजी गाड़ी का प्रयोग किया, मगर डीए का लाभ लेना परिवहन मंत्री नहीं भूले हैं। सरकारी गाड़ी का प्रयोग नहीं किया।

अरे वाह पेरिस, इंग्लैंड घूम आए अनिल शर्मा

अनिल शर्मा का लंदन और पेरिस में निजी दौरे पर रहे हैं। इस दौरान उनकी पत्नी सुनीता शर्मा उनके साथ रहीं। कालका से दिल्ली शताब्दी एक्सप्रैस में नौ जुलाई को गए और 23 को दिल्ली से इसी माध्यम से वापस चंडीगढ़ पहुंचे। उसके बाद सरकारी गाड़ी में शिमला पहुंचे। टीए नियम दो सेक्शन एक के तहत दो लाख रुपये की एवज में 208500 रुपये दो सीटों के लिए क्लेम किए। 14 से 27 नवंबर तक इंग्लैंड की यात्रा पर रहे,सरकारी खर्चा नहीं मांगा।

बस दिल्ली, चंडीगढ़ में ही रहे मुकेश

उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अस्सी प्रतिशत तक दिल्ली चंडीगढ़ में ही रहे। दस प्रतिशत शिमला और इतनी ही फीसद में अपने हलके में गए। जीएडी ने उनकी जानकारी मात्र 32 दिनों की ही दी है। जून अंत से लेकर जुलाई 2015 तक की जानकारी सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में दी हैं।

स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर दुबई, न्यूयार्क घूमे

स्वास्थ्य मंत्री ने विदेश दौरा किया। हालांकि इस अवधि में बीमार भी थे। विधानसभा क्षेत्र में तीस प्रतिशत तक ही जा पाए। 8 नवंबर को दुबई रवाना हुए। 14 नवंबर को वापस दिल्ली आए। इसके बाद विशाखापतनम, हैदराबाद, तिरुपति के लिए उड़ान भरी, डीए भी लिया। विशाखापटनम के लिए 11843 रुपये फ्लाइट टिकट के लिए क्लेम किया। यहां रात्रि विश्राम रहा और अगले दिन 19 नवंबर को डिजास्टर मैनेजमेंट विषय पर दूसरे विश्व सम्मेलन में पहुंचे। यहां से हैदराबाद गए, इसके लिए 5177 तथा तिरुपति के लिए 2883 रुपये क्लेम किए। रोचक यह रहा कि ट्रीटमेंट पर जाने से पहले जब चंडीगढ़ में रहे तो पीजीआई निदेशक और अन्य अथॉरिटी के साथ मैराथन बैठकें की थी। 10 से 14 जुलाई तक वे वहीं रुके। इस दौरान पांच दिन का डीए 1500 रुपये के हिसाब से लिया। अगले दिन से वह फोर्टिस में दाखिल हुए और 3 अगस्त तक वहीं रहे। इस दौरान टीए, डीए एडवांस में लिया था। दो सितंबर को शताब्दी से ट्रेन से दिल्ली गए।

स्टोक्स नहीं लेती कोई खर्च

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स सरकारी खर्चा दौरों के लिए लेती ही नहीं हैं। शिमला में अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अधिक वह सचिवालय कार्यालय में मौजूद रहती हैं। प्रदेश से बाहर दौरों पर कम ही रही है,अपने विधानसभा क्षेत्र में भी शिमला से कम दिखी है।

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शिमला शहर में पानी की दरों में वृद्धि के बाद अब सीवरेज चार्जेज न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह करने से जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ

Shimla MC Sewerage Cess hike

शिमला – शहर में अप्रैल के महीने में पानी की दरों में वृद्धि की गई थीं तथा अब सीवरेज चार्जेज के नाम पर न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है जोकि कई उपभोक्ताओं का 100 प्रतिशत बनता है।

वर्ष 2015 तक सीवरेज चार्जेज कुल बिल का 50 प्रतिशत लिया जाता था जो पूर्व नगर निगम ने इसे 30 प्रतिशत किया था। तब से लेकर अभी तक केवल 30 प्रतिशत ही सीवरेज चार्जेज लिए जा रहे थे। परन्तु इस माह जारी किए गए बिलों में यह न्यूनतम 100 रुपये प्रति माह की दर से जोड़ दिए गए हैं जिससे कम पानी इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह 100 प्रतिशत हो गया है जोकि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।

Shimla MC Water Bill Copy

आम नागरिकों के साथ-2 कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) की जिला कमेटी ने भी बिलों में की गई इस भारी वृद्धि की कड़ी भर्त्सना की है तथा इस वृद्धि को तुरन्त वापिस लेने की मांग की है।

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि जबसे बीजेपी की सरकार व नगर निगम शिमला का गठन हुआ है शिमला शहर की जनता पर पानी, बिजली, कूड़ा, बस आदि की सेवाओं की दरों में भारी वृद्धि की गई है। जिससे जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। शिमला शहर में पीने का पानी निजी हाथों में देने के लिए नगर निगम के जल विभाग को इससे अलग कर वर्ष 2018 में सरकार व नगर निगम ने एक कंपनी का गठन किया गया है। अब कंपनी पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही इसमें कोई नीतिगत हस्तक्षेप हो सकता है।

चौहान ने कहा कि कंपनी अब अपने स्तर पर निर्णय ले कर पेयजल को एक सेवा के रूप में नहीं बल्कि एक वस्तु के रूप में देने का कार्य कर रही है और अब मूल्य वसूली(cost recovery) के सिद्धान्त पर कार्य कर रही है जिससे स्वाभाविक रूप से जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

चौहान ने कहा कि वर्ष 2012 में भी तत्कालीन बीजेपी की सरकार ने शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था का निजीकरण लगभग कर ही दिया था। परन्तु जनता द्वारा सी.पी.एम. के महापौर व उपमहापौर चुने जाने पर इस निजीकरण के निर्णय को बदला गया तथा सरकार से एक लंबे संघर्ष के पश्चात वर्ष 2016 में पानी की पूरी व्यवस्था जिसमें पम्पिंग, लिफ्टिंग व वितरण नगर निगम ने अपने हाथों में लिया तथा नगर निगम के अधीन एक ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एवं सीवरेज सर्कल(GSWSSC) का गठन कर गुम्मा, गिरी, अश्विनी खड्ड व अन्य परियोजनाओ की पंप, पाइपलाइन को बदलने व अन्य कार्यो के लिये करीब 90 करोड़ की व्यवस्था की तथा कार्य प्रारंभ किया। जिसका परिणाम आज है कि शिमला शहर को 48-53 MLD तक रोज पानी मिल रहा है और विकराल पेयजल संकट को समाप्त किया गया। वर्ष 2015 में शहर को 65 MLD अतिरिक्त पानी व शहर में पानी की आपूर्ति व सीवरेज की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए 125 मिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक से ऋण हेतू केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग(DEA) से स्वीकृत करवाया गया था। जिसका कार्य अब आरम्भ हो रहा है।

चौहान ने कहा कि पेयजल की कंपनी के गठन के कारण आज जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों में तो मार्च,2018 के पश्चात से लगभग 1 वर्ष 6 माह बीतने के पश्चात भी अभी तक बिल नहीं दिये गए हैं। अधिकांश वार्डो में कही 4 माह तो कहीं 6 माह के बाद किसी भी आधार पर बिल दिए जा रहे हैं। जबकि मार्च, 2017 में तत्कालीन नगर निगम ने निर्णय लिया था कि मई, 2017 से हर माह मीटर रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाएंगे और यह सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी जाएगी। परन्तु वर्तमान नगर निगम यह निर्णय तो नहीं लागू कर पाई इसके विपरीत कंपनी का गठन कर आज शहरवासियों को परेशानी में धकेल दिया है।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि पेयजल की दरों व सीवरेज चार्जेज में की गई वृद्धि को तुरंत वापिस ले। हर उपभोक्ता को मीटर रीडिंग के आधार पर हर माह बिल दिये जाए तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए। सरकार शिमला शहर की पेयजल व्यवस्था के निजीकरण की व्यवस्था को बदल कर इसे पुनः नगर निगम शिमला के अधीन करें ताकि संविधान के 74वें संशोधन जिसमें शहरों में पेयजल की व्यवस्था करने का दायित्व नगर निगम को दिया गया है को लागू किया जा सके।

चौहान ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो पार्टी जनता को लामबंद कर सरकार व नगर निगम की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन करेगी।

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100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा, साथ में स्तिथ देवस्थल का भी नहीं लिहाज़

Littering in Mandi district
  • 100 रूपए बचाने के चक्कर में खुले में फैंका जा रहा कूड़ा

  • शहर के साथ लगते सन्यारड़ी गांव के लोग नहीं दे रहे स्वच्छता में सहयोग

  • अधिकतर परिवार 100 रूपए देकर घर से उठवा रहे हैं कूड़ा

  • खुले में कूड़ा फैंकने से बन रहा है बीमारियों का खतरा

मंडी- कुछ लोगों के लिए स्वच्छता से बढ़कर चंद रूपए हो जाते हैं। ऐसे लोग कभी भी समाज के लिए सही उदाहरण नहीं बन पाते हैं। कुछ ऐसी ही हरकतें कर रहे हैं सन्यारड़ी गांव के कुछ लोग। यह गांव शहर के बिल्कुल साथ सटा हुआ है। शहर के साथ सटा होने के कारण नगर परिषद मंडी ने यहां पर भी डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन स्कीम चला रखी है। गांव के अधिकतर परिवार इस स्कीम के तहत हर महीने 100 रूपए अदा करते हैं। इन परिवारों के घर से नगर परिषद के कर्मचारी खुद कूड़ा उठाकर ले जाते हैं।

garbage dumping on Mandi road side 2

लेकिन कुछ ऐसे हैं जो 100 रूपए बचाने के चक्कर में अपने घर से निकलने वाला कूड़ा सड़क किनारे खुले में फैंक रहे हैं। कूड़ा गांव के मुहाने पर सुनसान सड़क के किनारे फैंका जा रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि यहां एक देवस्थल भी है। लोग उसकी भी परवाह किए बिना यहां खुले में कूड़ा फैंकने से गुरेज नहीं कर रहे। स्थानीय निवासी डा. जीवानंद चौहान ने बताया कि कुछ लोगों के कारण गांव में गंदगी का आलम फैलता जा रहा है जिस कारा बीमारियां फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है। इन्होंने नगर परिषद व प्रशासन से इस ओर विशेष ध्यान देने की गुहार लगाई है।

garbage dumping on Mandi road side 5

वहीं जब इस बारे में नगर परिषद मंडी की अध्यक्षा सुमन ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जो लोग खुले में कूड़ा फैंक रहे हैं उनके खिलाफ जल्द की कठोर कार्रवाही अम्ल में लाई जाएगी। जिस स्थान पर कूड़ा फैंका जा रहा है वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। जो भी कैमरे में कूड़ा फैंकता हुआ नजर आया उसे पांच हजार रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

उन्होंने सन्यारड़ी गांव के लोगों से स्वच्छता के क्षेत्र में नगर परिषद को सहयोग करने की अपील भी की है।

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आढ़तियों के विरुद्ध चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमें, फिर भी सरकार ने कारोबार करने की दे दी अनुमति

Apple commission agents fraud

शिमला– किसान संघर्ष समिति की बैठक 19 जुलाई को गुम्मा, कोटखाई में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सुशील चौहान की ने की तथा इसमे समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों व बागवानों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की

बैठक में बागवानों ने अवगत करवाया कि जिन आढ़तियों ने बागवानों का बकाया भुगतान करना है व उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई है, इनमें से कुछ आढ़तियों ने दुकाने खोल कर अपना कारोबार आरम्भ कर दिया है। जबकि ए पी एम सी कह रही हैं कि ऐसे आढ़तियों व कारोबारियों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। इससे ए पी एम सी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है और वह इनको कारोबार की इनको कैसे इजाजत दे रही हैं जबकि इनके विरुद्ध मुकदमे चल रहे हैं और कार्यवाही की जानी हैं।

बागवानों ने कहा कि इसके अलावा ए पी एम सी, अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xxi में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी कारोबारी होगा उसको लाइसेंस जारी करने से पहले नकद में सुरक्षा के रूप में बैंक गारंटी लेनी है परंतु ए पी एम सी के द्वारा कोई भी ऐसी व्यवस्था नहीं की है जिससे बागवानों को मण्डियों में धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। ए पी एम सी निर्देश जारी कर रही हैं कि आढ़ती खरीददार की जांच करवाएगा और पता लगाएं कि वह सही है या नहीं। जोकि ए पी एम सी अपने विधिवत दायित्व को निभाने से भाग रही हैं। क्योंकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ए पी एम सी का वैधानिक दायित्व हैं।

बागवानों ने कहा कि ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xix में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान बागवान का जिस दिन ही उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाए। परन्तु ए पी एम सी का ये बयान कि यदि 15 दिन तक आढ़ती या खरीददार भुगतान नही करता तो उसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। यह ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की खुले तौर पर अवहेलना हैं। इससे ए पी एम सी की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।

बागवानों ने बैठक में ये भी अवगत करवाया कि सरकार द्वारा मजदूरी के रूप में 5 रुपये प्रति पेटी की जो दर तय की गई है कई मण्डियों में यह 25 से 30 रुपए तक ली जा रही हैं। बागवानों ने गत वर्ष भी सरकार व ए पी एम सी से इस बारे शिकायत की थी। परन्तु इस पर भी अभी तक कोई रोक नहीं लगाई गई है।

बैठक में कुछ बागवानों ने अवगत करवाया कि SIT के माध्यम से कुछ बागवानो का आढ़तियों के द्वारा भुगतान भी किया गया है और कुछ बागवानों की बकाया राशी 20 जुलाई, 2019 तक दी जायेगी।

बैठक में कोटखाई के 4 ऐसे बागवान भी थे जिन्होंने भी आढ़तियों से और पैसे लेने है। यह कुल रकम 6,91,605 रुपये बनती हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इनकी ओर से भी दोषी आढ़तियों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार किसान संघर्ष समिति द्वारा 24 जून, 2019 को दिये गए मांगपत्र पर शीघ्र कार्यवाही करें। तथा ए पी एम सी की लचर कार्यप्रणाली को सुचारू करने के लिए सख्त आदेश करें ताकि किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और उनको मण्डियों में धोखाधड़ी व शोषण से बचाया जा सके। यदि सरकार इन माँगो पर तुरन्त ठोस कदम नहीं उठती है तो किसान संघर्ष समिति अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी

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