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आईएएस अफसर और होटलों को दी नाजायज़ सुविधाओं का बोझ उठा रही जनता

शिमला- छोटा शिमला से कसुम्पटी जाने वाले रस्ते पर जनता के पैसे खर्च करके जो स्ट्रीट लाइट्स जनता के लिए लगनी चाहिए थी वो सड़क की तरफ होने के बजाये होटल्स और निज़्ज़ी मकानों की तरफ मोड़ दी गयी है!

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इस रस्ते पर चलना जान को खतरे मैं डालनें से कम नहीं है.! ऊपर से तेज़ रफ़्तार गाड़ियां और खुली पड़ी टूटी फूटी नालियां खतरा और बढ़ा देती हैं!

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रोड कई जगह तंग होने की वजह से गाड़ियां लोगों को नाली की तरफ धकेल देती हैं! जिन नालियों पर कवर लगे हैं उनमे कई बार लोगों के, खासकर बच्चों के, पैर फँस जाते हैं! राहगीर परेशान हैं पर पिछले 6 महीनो से किसी ने भी सुध नहीं ली है!

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हिमाचल परिवहन की खस्ताहाल बसें, कर्मियों की कमी, पूर्व सूचना बिना रूटों का बंद करना लोगों के लिए बन रहा आफत

Poor HRTC Bus Conditions and Services

शिमला- 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण भी बताया है। यह कहना है ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा का।

सिंघा ने प्रबंध निदेशक, हिमाचल सड़क परिवहन निगम, के माध्यम से एक ज्ञापन सौंप कर 11 जुलाई से पहले आवश्यक मुद्दों के तहत एक बैठक बुलाने के लिए सरकार को नोटिस भेजा है।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि और बस सेवाओं की संख्या में निरंतर में भारी अंतर है। इस अंतर को दूर करने के लिए निर्मित और स्वीकृत सड़कों पर न केवल अतिरिक्त बसें चलाने की आवश्यकता होती है बल्कि आवागमन के वर्तमान सार्वजनिक और निजी मोड को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी आवश्यकता होती है।

सिंघा ने कहा कि इस ज्ञापन का मसौदा तैयार करते समय, पूरे राज्य के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अगर शिमला जिले के परिवहन डिपो में से कुछ में कर्मियों की चल रही कमी की जांच की जाती है, तो यह राज्य में मौजूद गंभीर स्थिति के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण पेश करेगा।

हिमाचल प्रदेश के शिमला लोकल डिपो में अभी 240 बसें ही चल पा रही है जबकि शिमला लोकल डिपो के तहत 283 स्वीकृत बस रूट हैं, 111 चालक और 98 परिचालक कम हैं और कर्मचारियों की अत्यधिक कमी को देखते हुए 12 मार्गों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। तारादेवी डिपो के तहत ड्राइवरों की कमी 55 है और कंडक्टरों का आंकड़ा 65 पर है।

सिंघा ने ज्ञापन में कहा कि रोहड़ू डिपो में स्थिति समान रूप से दयनीय है, जहां 24 बसें शून्य मान बुक में हैं यानी तय दूरी चल चुकी है और अब और चलने की स्थिति में नही है और इन बसों को एच आर टी सी सड़को पर दौड़ा रहा है जबकि इन बसों को कबाड़खाने में होना चाहिए था। इस डिपो के तहत 16 बसें 9 साल से अधिक पुरानी हैं और अभी भी चल रही हैं और हर कोई जानता है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की स्थिति क्या है। इसके अलावा ड्राइवरों की कमी का आंकड़ा 49 है और परिचालकों की 46 है।

रामपुर डिपो के तहत जीरो वैल्यू बुक बसों की संख्या 11 है और ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी क्रमशः 60 और 42 है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की इस तरह की दयनीय स्थिति के साथ राज्य में बस सेवाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं है। HRTC प्रबंधन राज्य में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में नाकामयाब हो गया है। बार-बार होने वाली “मजिस्ट्रियल पूछताछ” दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए कोई परिणाम नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ केवल लोगो को दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए की जा रही है किसी को कभी भी चूक के लिए दंडित नहीं किया जाता और प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया जाता है।

उन्होंने आगे कहा है कि एचआरटीसी के हालिया फैसले जिसमे “बसो में क्षमता से अधिक सवारियां न बिठाए जाने का फैसला हुआ” उससे लोगों को अधिक असुविधा हुई है। हर दिन लगभग 3 लाख छात्र इन बसों से सफर करते है लेकिन नवीनतम निर्णय के बाद वे ऐसा करने में असमर्थ हुए हैं। हजारों कर्मचारी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।

उनका ये भी कहना है कि लोगों को पूर्व सूचना दिए बिना हर रोज सौ रूटों को निलंबित किया जा रहा है। यह विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, महिलाओं, बुजुर्गों व किसानों के लिए कठिनाइयों का कारण बना है जो अपने खेत का उत्पादन इस सार्वजनिक परिवहन से बाजार तक पहुंचते हैं। अकेले ठियोग में कई बस मार्गों को अभी निलंबित किया जा रहा है इन मार्गों में शिमला-सांभर, शिमला-अलवा, शिमला-गगनघट्टी, शिमला-माहीपुल वाया तल्ली, शिमला-मुंडो, ठियोग जारई, शिमला-श्यामनगर वाया कोटगढ़ व अन्य मुख्य है।

सिंघा ने कहा है कि ड्राइवरों व कंडक्टरों की नई भर्ती करके स्टाफ में चल रही कमी को पूरा करने के अलावा,
इन समस्याओं का कोई अस्थायी समाधान या “स्टॉप गैप सॉल्यूशन” नहीं हो सकता है, इसके अलावा उन बसों की कबाड़ में भेज दिया जाना चाहिए जो “शून्य बुक वैल्यू” यानी नकारा हो चुकी है और साथ ही नए वाहनों की खरीद की जानी चाहिए, यही इसका स्थाई समाधान होगा।

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विकलांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप शिक्षा संस्थानों में नहीं मिल रही मुफ्त शिक्षा व् सुविधायें

Specially able students in himachal pradesh

शिमला– हिमाचल प्रदेश राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य और विकलांगों के लिए काम कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने सरकार से मांग की है की राज्य सरकार के सभी स्कूलों और कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में विकलांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप मुफ्त शिक्षा दी जाए। इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा एक सरकारी कॉलेज में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय में कंप्यूटर एवं टॉकिंग सॉफ्टवेयर की सुविधा देने के फैसले को सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में लागू किया जाए।

विकलांगजनों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव और ट्रस्टी डॉ. सुरेंदर कुमार ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार विकलांगजनों की समस्याओं के प्रति गंभीर है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र ही विकलांगजनों की अन्य समस्याओं का समाधान कर देगी।

प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर हाईकोर्ट के 4 जून 2019 के उस फैसले की याद दिलाई है जिसमें विश्वविद्यालय स्तर तक विकलांग विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे। राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों ने ये आदेश तभी लागू कर दिए थे। लेकिन राज्य सरकार के स्कूलों, कॉलेजों, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई आदि में इसे लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि बिलासपुर जिले के घुमारवीं कॉलेज की छात्राओं की जनहित याचिका पर 14 मई को हाईकोर्ट ने चार महीनों के भीतर दृष्टिबाधित छात्राओं के लिए टॉकिंग साफ्टवेयर वाले कम्यूटर, स्कैनर, ई- बुक्स, ब्रेल बुक्स आदि सुविधाएं देने के आदेश दिए हैं। सुगम्य पुस्तकालय की यह सुविधा उन सभी स्कूलों और कॉलेजों में भी दी जाए जहाँ दृष्टिबाधित विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि संजौली कालेज, के अलावा रामपुर, घुमारवीं, कुल्लू और मंडी आदि कॉलेजों और शिमला के पोर्टमोर समेत अनेक स्कूलों में दृष्टिबाधित विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

प्रो. श्रीवास्तव और डॉ सुरेंदर कुमार ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सामाजिक न्याय मंत्री डॉ राजीव सैजल इन मुद्दों को शीघ्रता से सुलझा लेंगे। इस अवसर पर विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता मुकेश कुमार, सतीश ठाकुर, मीना शर्मा, और दृष्टिबाधित मेधावी विद्यार्थी इन्दु कुमारी, अनुज कुमार, अरुण शर्मा और अभिषेक आदि भी उपस्थित रहे।

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ऊना में नमाज़ पढ़ने वाली जगह पर हिन्दू संगठनों ने हनुमान चालीसा पढ़कर किया विरोध, कहा सरकारी जमीन हथियाने का हो रहा प्रयास

una district communal tension

शिमला – विश्व हिन्दू परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष लेखराज राणा ने आज शिमला से प्रैस को जारी एक बक्तव्य में ऊना जिला के नंगल खुर्द में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़े जाने तथा सरकारी भूमि को कब्जाने का कड़े शब्दों में विरोध किया है। तनाव की स्थिति को देखते हुए हरोली पुलिस थाना से एसएचओ, तहसीलदार हरोली और नगर पंचायत के जनप्रतिनिधि तथा पुलिस मौके पर मौजूद रही।

वंही मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि इस स्थल पर वे 1984 से नमाज अता करते आ रहे हैं।

राणा का आरोप है कि ऊना के नंगल खुर्द गांव में सरकारी भूमि पर मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज के बहाने उस स्थान को कब्जाने की कोशिश कर रहा है, जिसके विरोध स्वरूप आज विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, हिन्दू एकता मंच, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा तथा स्थानीय हिन्दू समाज ने वहां पर हनुमान चालीसा का सामुहिक पाठ किया

लेख राज राणा ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में मस्जिदों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि जांच का विषय है, कुछ स्थानों पर मुस्लिम संख्या अभी न के बराबर हैं किन्तु भव्य मस्जिदों का निर्माण हो रहा है। मस्जिदों के निर्माण पर लगने वाले धन की जांच करने से चोंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते है।

लेख राज राणा ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद् पिछले लम्बे समय से बाहरी राज्यों से मजदूरी तथा रोजगार की आड़ में आने बाले लोगों की स्थाई पहचान कर उनके पंजीकरण की मॉग प्रदेश सरकार व प्रशासन के समक्ष करता रहा है। गौ हत्या, गौ तस्करी, अवैध घुसपैठ, लव जिहाद, धर्मान्तरण, मंदिरों में चोरी तथा प्रदेश की सुरक्षा के लिए खतरा बने बिना पंजीकरण के, बाहरी राज्यों से रोजगार की आड़ में अवैध रुप से यहां रहने वाले प्रवासीयों के पंजीकरण मुद्दे को प्रदेश सरकार व प्रशासन के समक्ष उठाया जाता रहा है, तो प्रदेश सरकार व प्रशासन के अधिकारी गंभीरता से कारवाई करने की बात करते है, लेकिन उनकी यह बाते केवल बोलने तक ही सीमित रह जाती हैं। जिस कारण से हिमाचल अपराधियों की शरणस्थली बनता जा रहा है।

प्रशासन की इसी उदासीनता के कारण प्रदेश में समय समय पर कुख्यात आतंकियों का यहां पाया जाना, आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन के संदिग्ध आतंकी (आबिद खान) का देव नगरी कुल्लु में चर्च में कई महीनों तक रहना, प्रदेश में अनेक स्थानों पर देश विरोधी नारों का लिखा जाना, लव जिहाद, गौ तस्करी घटानओं में बृद्धि हो रही है। ऐसे अपराधिक प्रवृति के लोगों का कोई स्थाई पंजीकरण न होने के कारण ऐसे लोग किसी भी अपराधिक घटना को अंजाम देकर आसानी से बच निकलते है।

परिषद् का आरोप है कि लेख राज राणा ने कहा की प्रदेश में बढ़ रही अपराधिक घटनाओं के पीछे अधिकतर बाहरी प्रदेशों से आने बाले ऐसे लोगों का हाथ होता है जो प्रदेश में रोजगार, व्यापार, मजदूरी की आड़ लेकर आते है, जिनका प्रशासन के पास न तो कोई आधिकारिक रिकोर्ड होता है और न ही कोई पंजीकरण, ऐसे बहुत से मामले भी सामने आए है जिसमें कई प्रवासी मजदूरों के नाम व पते फर्जी पाए जाते है, अतः पूर्ण पहचान के बाद ही उनको पुलिस प्रशासन की ओर से पंजीकरण कार्ड जारी किया जाना चाहिए।

लेख राज राणा ने कहा की हम प्रदेश सरकार व प्रशासन से फिर से मॉग करते है कि प्रदेश की सरकारी जमीनो तथा जंगलात की भूमि पर अवैध मंजारों को हटा कर उन स्थानों को कब्जा मुक्त कर सरकार अपने अधिग्रहण में लेकर कब्जा करने बालों पर कड़ी कारवाई करे, प्रदेश भर में बन रही मस्जिदों के निर्माण पर लगाए जा रहे धन की भी जांच हो, रेड़ी फड़ी, मजदूरी की आड़ में बाहरी राज्यों से आने बाले लोगों का पुलिस प्रशासन द्वारा पंजीकरण अवश्य किया जाए, जो देश तथा प्रदेश की सुरक्षा के लिए अति आवश्यक है।

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