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हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिमला एसपी पैदल चलकर पहुंचे ऑफिस

शिमला- रेलवे बोर्ड बिल्डिंग से सीटीओ वाली सड़क पर सोमवार को किसी भी गाड़ी को नहीं आने दिया गया। सभी सरकारी और निजी गाड़ियों को वहां से वापस लौटा दिया गया। मौके पर गाड़ी में मौजूद अफसर और दूसरे लोग पैदल ही गंतव्य की ओर चल दिए हालांकि इस दौरान कई अफसर मौजूद पुलिस कर्मचारियों से आगे जाने का आग्रह करते भी दिखे लेकिन पुलिस ने प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर उन्हें इस सड़क पर जाने से रोक दिया। इस दौरान बुजुर्ग लोग परेशान भी दिखे। पैदल चलने वाले राहगीरों ने राहत की सांस भी ली।

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शिमला पुलिस के अफसरों ने भी एक बेहतर मिसाल पेश करते हुए अपनी सरकारी गाड़ियां रेलवे बोर्ड बिल्डिंग के पास ही छोड़ दी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे एसपी की सरकारी गाड़ी वहां पर पहुंचीं। उनके साथ एएसपी और डीएसपी भी थे। एसपी ने तुरंत अपने ड्राईवर को लौटने को कहा, वहां व्यवस्थाओं का जायजा लेने लगे। उन्होंने मौके पर लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करने के लिए वह शिमला पुलिस का साथ दें।

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आपातकालीन वाहनों पर किसी तरह की पाबंदी से पुलिस प्रशासन ने इंकार किया है। प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का सोमवार को पूरा असर देखने को मिला। शिल्लीचौक से शिमला क्लब की ओर जाने वाली गाड़ियों को रोका गया। रेलवे बोर्ड बिल्डिंग से सीटीओ वाली सड़क पर सोमवार को कोई भी गाड़ी दाखिल नहीं हो पाई।

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उपायुक्त और एसपी कार्यालय तक पहुंचने के लिए अब केवल एक मात्र विकल्प है। विंटर फील्ड से वाया कमांड होते हुए यहां तक पहुंचा जा सकता है। लेकिन यहां गाड़ियों की काफी भीड़ रहती है। डीसी आफिस के पास दोनों तरफ गाड़ियों की पार्किंग रहती है। यहां पार्क गाड़ियों को यहां से हटाने का काम सोमवार को शुरू हो गया।

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पुलिस ने गाड़ियों में वार्निंग स्लिप लगाकर लोगों से गाड़ियों का हटाने का आग्रह किया। इसके बावजूद अगर मंगलवार को कोई गाड़ी यहां खड़ी मिलती है तो उसका चालान होगा। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि यहां यातायात सुचारु रह सके।

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एचआरटीसी की टैक्सी रेलवे बोर्ड बिल्डिंग से सीटीओ चौक नहीं आई। टैक्सी सोमवार को वाया विंटर फिल्ड-कंमाड होते हुए चली। इस बारे में यात्रियों को मालूम नहीं था, इस वजह से बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी का सामना भी करना पड़ा।
एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना की जा रही है। सभी से अपील है कि वह शिमला पुलिस का सहयोग करें। विंटर फील्ड से डीसी कार्यालय तक आने वाली गाड़ी के पास रोड परमिट होना चाहिए उन्हें ही आने की अनुमति होगी।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन

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सोलन-डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के
औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में
स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।

यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 11 सितंबर से विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशनों और
कृषि विज्ञान केंद्र में चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय के सात स्टेशनों में इस प्रशिक्षण कोर्स की कुल 130 सीटें
होगी। जाछ (कांगड़ा), बाजौरा(कुल्लू), शारबो (किन्नौर), मशोबरा (शिमला) में स्थित विश्वविद्यालय के
क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों और औदयानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में
20-20 सीटें होगी। सिरमौर के धौलाकुआं में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र और चंबा के कृषि
विज्ञान केंद्र में इस प्रशिक्षण कोर्स की 15-15 सीटें होगी।

इस कार्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने कम से कम दसवीं या समकक्ष स्तर की परीक्षा उतिर्ण की हो, 17 से 30 वर्ष
की आयु का हो और कृषक परिवार से संबंध रखता हो। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन पत्र साधारण कागज पर
संबंधित स्टेशनों के सह निदेशकय या कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के कार्यालय में 8 अगस्त या उससे पहले तक जमा
कर सकते हैं।

साक्षात्कार 19 अगस्त को केंद्र सह निदेशक/ प्रभारी के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे। सभी
उम्मीदवारों को यह घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाएगें। साक्षात्कार के समय
उम्मीदवारों को अपने समस्त प्रमाण पत्र तथा उसकी एक-एक प्रतिलिपि साथ लानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान कोई
भता देय नहीं होगा।

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