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हिमाचल प्रदेश की वार्षिक योजना 4100 करोड़ रुपये निर्धारित

10april13

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“हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2013.14 की वार्षिक योजना 4100 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, यह गत वर्ष की वार्षिक योजना की तुलना में 400 करोड़ रुपये अधिक है”

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया के मध्य आज नई दिल्ली स्थित योजना भवन में आयोजित बैठक में हिमाचल प्रदेश की वार्षिक योजना को अंतिम रूप दिया गया।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रथम अप्रैल से आरम्भ हुए नए वित्त वर्ष की वार्षिक योजना का आकार पिछले वर्ष की वार्षिक योजना से लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2012.2013 की वार्षिक योजना 3700 करोड़ रुपये थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वार्षिक योजना में सामाजिक क्षेत्र पहली ए परिवहन एवं संचार दूसरी तथा ऊर्जा क्षेत्र तीसरी प्राथमिकता निर्धारित की गई है। कुल योजना आकार में से सामाजिक सेवा क्षेत्र के लिए 1371.40 करोड़ रुपये अर्थात 33.45 प्रतिशत ए परिवहन एवं संचार क्षेत्र के लिए 865. 14 करोड़ रुपये अर्थात 21. 10 प्रतिशत और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 624.68 करोड़ रुपये अर्थात 15. 24 प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं।

वीरभ्रद सिंह ने कहा कि 12 वीं योजना के लिए प्रदेश की आर्थिकी की वृद्धि दर 9 प्रतिशत निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति उप योजना के अन्तर्गत 1013. 52 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं ताकि अनुसूचित जाति जनसंख्या के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा सके। जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के लिए योजना आकार में 369 करोड़ रुपये अर्थात 9 प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं जबकि घोषित पिछड़े क्षेत्रों में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 37 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए 530. 84 करोड़ रुपये और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण के लिए 301. 14 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 5009 अतिरिक्त जल विद्युत का दोहन किया जाएगा। इसमें से वार्षिक योजना 2013.14 में 1918 मेगावाट जल विद्युत के दोहन का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने देश भर को ग्रिड से जोड़ने और कम कीमत पर बिजली उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि देश के विभिन्न भागों में अतिरिक्त बिजली को उचित मूल्य पर उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि मध्य हिमालय जलागम परियोजना की परियोजना लागत को संशोधित कर 596. 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पहले यह राशि 365 करोड़ रुपये थी। अब इस परियोजना के अन्तर्गत राज्य के 10 जिलों के 44 खण्डों की 704 ग्राम पंचायतों को लाया जाएगा और 272 सूक्ष्म जलागम परियोजनाएं भी तैयार की जाएंगी ताकि प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को रोका जा सके और उनकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि ऊना जिला में कृषि भूमि के संरक्षण , कृषि पैदावार में बढ़ौतरी और जलागम क्षेत्र में वन क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए ऊना जिले में चलाई जा रही स्वां नदी एकीकृत जलागम प्रबंधन योजना के लिए इस वर्ष 35 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस परियोजना की लागत को संशोधित कर 215 करोड़ रुपये किया गया है। पहले यह लागत 160 करोड़ रुपये थी। परियोजना के समाप्त होने की तिथि को भी बढ़ाकर मार्च, 2015 तक कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत पर्यटन सुविधाओं जैसे सूचना केंद्र , कूड़ा.कचरा प्रबंधन , कैंपिंग साईट , पार्किंग सुविधा , शौचालय , सौंदर्यकरण, लैंड स्केपिंग, सड़क सुधार और परियोजना क्षेत्र में पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए एशिया विकास बैंक के सहयोग से 428. 22 करोड़ रुपये की एक परियोजना चलाई जा रही है। इससे राज्य में धार्मिक, घरेलु और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आमद में बढ़ौतरी होगी।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं में सृजित बड़े जलाश्यों में हाउस बोट का परिचालन आरम्भ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आने वाले 150 लाख पर्यटकों में से अधिकांश लोकप्रिय पर्यटक स्थलों पर जाना पसंद करते हैं। राज्य सरकार पर्यटकों को नये अनछुए क्षेत्रों की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए होम.स्टे जैसी अनेक योजनाएं आरम्भ की गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि शिमला, कांगड़ा और कुल्लू सभी हवाई अड्डों पर हवाई सेवाएं आरम्भ की जाएं ताकि ग्रीष्मकालीन पर्यटन मौसम में प्रदेश में आने वाले धनाढ्य वर्ग के पर्यटकों को सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बिलासपुर.लेह वाया मनाली रेल लाईन को सामरिक दृष्टि से राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के उपरांत राज्य में केवल 44 किलोमीटर रेल लाईन का ही निर्माण हो पाया है और माल

मनरेगा के तहत कार्य निष्पादन के लिए श्रम एवं पंजी घटक के अनुपात में छूट देकर इसे 60ः40 से 50ः50 करने की मांग की। उन्होंने मनरेगा के तहत दिहाड़ी को 138 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये करने का आग्रह भी किया।

वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में औद्योगिकरण को गति देने के लिए प्रदेश के लिए औद्योगिक पैकेज को बहाल करने का आग्रह किया। उन्होंने शाहनहर परियोजना का अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के रूप में बकाया 62 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाने पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया और आग्रह किया कि केंद्रीय सहायता तुरंत जारी की जाए।

उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित कार्य दिवसों के दृष्टिगत त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम ;एआईबीपी के अन्तर्गत योजनाओं को पूरा करने की समयावधि और लागत मानकों को संशोधित करने की मांग की। उन्होंने लघु सिंचाई के लिए बनाए गए कार्यकारी समूह द्वारा दी गई संस्तुतियों को लागू करने की मांग करते हुए स्तही सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के अन्तर्गत 3.5 लाख रुपये प्रति हैक्टेयर के लागत मानक में संशोधन का आग्रह किया।

उन्होंने केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के अन्तर्गत सभी विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 90ः10 के आधार पर समान वित्तपोषण का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का वित्तपोषण भी एक समान भौगोलिक एवं पहाड़ी परिस्थितियों के आधार पर अन्य उत्तर पूर्वी राज्यों के समान किया जाना चाहिए।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन

Vocational Training Course on Horticulture Management 2019 e

सोलन-डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के
औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में
स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।

यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 11 सितंबर से विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशनों और
कृषि विज्ञान केंद्र में चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय के सात स्टेशनों में इस प्रशिक्षण कोर्स की कुल 130 सीटें
होगी। जाछ (कांगड़ा), बाजौरा(कुल्लू), शारबो (किन्नौर), मशोबरा (शिमला) में स्थित विश्वविद्यालय के
क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों और औदयानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में
20-20 सीटें होगी। सिरमौर के धौलाकुआं में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र और चंबा के कृषि
विज्ञान केंद्र में इस प्रशिक्षण कोर्स की 15-15 सीटें होगी।

इस कार्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने कम से कम दसवीं या समकक्ष स्तर की परीक्षा उतिर्ण की हो, 17 से 30 वर्ष
की आयु का हो और कृषक परिवार से संबंध रखता हो। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन पत्र साधारण कागज पर
संबंधित स्टेशनों के सह निदेशकय या कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के कार्यालय में 8 अगस्त या उससे पहले तक जमा
कर सकते हैं।

साक्षात्कार 19 अगस्त को केंद्र सह निदेशक/ प्रभारी के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे। सभी
उम्मीदवारों को यह घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाएगें। साक्षात्कार के समय
उम्मीदवारों को अपने समस्त प्रमाण पत्र तथा उसकी एक-एक प्रतिलिपि साथ लानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान कोई
भता देय नहीं होगा।

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