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बाबा रामदेव की हिमाचल मे खरीदि जमीन पर बिठाई जांच

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“सोलन के साधू पुल के पास पूर्व भाजपा सरकार ने एक रुपये की लीज पर दी बाबा राम देव को 28 एकड़ जमीन दी है जिसे हिमाचल की कांग्रेस सरकार वापिस ले सकती है”

हिमाचल में बाबा राम देव को भाजपा सरकार के समय में दी गई 96 बीघा जमीन को हिमाचल सरकार वापिस ले सकती है इसको लेकर जाँच भी बिठा दी गई है। दो सालों से इस जमीनी सौदे का विरोध कर रही कांग्रेस सरकार ने सता में आते ही पूर्व भाजपा सरकार के बाबा रामदेव को सोलन के साधू पुल के पास वर्ष 2010 में 99 साल की लीज मात्र 1 रुपये की लीज पर दी गई 96 बीघा जमीन जमीन को लेकर जांच करनी शुरु कर दी है,यह लीज बाबा राम देव के सहयोगी बाल क्रिशन के नाम है।

बाबा राम देव ने ये जमीन पतंजली योग पीठ बनाने के लिए जब ली तभी से कांग्रेस सरकार भाजपा सरकार के इस फैंसले का विरोध करती आ रही थी और प्रदेश में कांग्रेस ने सता में आते ही बाबा रामदेव को भाजपा के कार्यकाल में जमीन इतने सस्ते दामों में क्यों दी गई इस बारे में जांच प्रक्रिया आंरम्भ कर दी है।

हिमाचल के रेवन्यु मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा की हिमाचल में जहां कहीं भी धारा 118 का उलघन हुआ है उसकी जाँच होगी और पूर्व भाजपा सरकार ने बाबा राम देव को 96 बीघा जमीन जो मात्र 1 रुपये की लीज पर दी है जबकि इसकी कीमत 35 करोड़ के करीब है इस बारे में जांच की जाएगी कि भाजपा सरकार ने बाबा रामदेव को यह जमीन इतने कम दामों में क्यों दी और साथ ही इस कारण का भी पता लगाया जाएगा कि जमीन का एग्रीमेंट बाबा रामदेव के नाम पर न बना कर बाबा रामदेव के सहयोबी बाल क्रिश्न के नाम पर क्यों बनाया गया है , जो की नेपाली मूल का है और उसके नाम ये भूमि कैसे दी गई जबकि किसी भी विदेशी को जमीन नहीं दी जा सकती है , इसलिए इस बारे में भी पूरी जांच की जाएगी ।

वहीं दूसरी और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सदस्य प्रशांत भूषण ने हिमाचल के पालमपूर में टी गार्डन लगाने के उद्वेश्य से साल 2007 में 4.66 हेक्टर भूमि 35 लाख में खरिदी थी लेकिन रेवन्यू मंत्री कोल सिंह का कहना है कि ये जमीन किसी ओर उद्वेश्य को लेकर प्रयोग में आई जा रही है और इसका लैंड यूज किया जा रहा है । उन्होंने कहा कि इस बारे में जांच की जाएगी और अगर जिस उद्वेश्य को लेकर प्रशांत भूषण ने जमीन खरिदी थी उसका इस्तेमाल उसी उद्वेश्य के लिए किया गया है तो उन्हें जमीन दी जा सकती है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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नौणी विवि के स्व-रोजगार व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स के लिए 8 अगस्त से पहले करें आवदेन

Vocational Training Course on Horticulture Management 2019 e

सोलन-डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 2019-20 सत्र के लिए अपने एक वर्ष के
औदयानिकी प्रबंधन प्रशिक्षण कोर्स (स्व-रोजगार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य
कृषक परिवार से संबंध रखने वाले युवाओं को फलों,सब्जियों और मशरूम के उत्पादन और मधुमक्खी पालन में
स्वरोजगार बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है।

यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 11 सितंबर से विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण स्टेशनों और
कृषि विज्ञान केंद्र में चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय के सात स्टेशनों में इस प्रशिक्षण कोर्स की कुल 130 सीटें
होगी। जाछ (कांगड़ा), बाजौरा(कुल्लू), शारबो (किन्नौर), मशोबरा (शिमला) में स्थित विश्वविद्यालय के
क्षेत्रीय औदयानिकी अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्रों और औदयानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, नेरी (हमीरपुर) में
20-20 सीटें होगी। सिरमौर के धौलाकुआं में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र और चंबा के कृषि
विज्ञान केंद्र में इस प्रशिक्षण कोर्स की 15-15 सीटें होगी।

इस कार्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने कम से कम दसवीं या समकक्ष स्तर की परीक्षा उतिर्ण की हो, 17 से 30 वर्ष
की आयु का हो और कृषक परिवार से संबंध रखता हो। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन पत्र साधारण कागज पर
संबंधित स्टेशनों के सह निदेशकय या कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी के कार्यालय में 8 अगस्त या उससे पहले तक जमा
कर सकते हैं।

साक्षात्कार 19 अगस्त को केंद्र सह निदेशक/ प्रभारी के कार्यालय में आयोजित किए जाएंगे। सभी
उम्मीदवारों को यह घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे इसे एक व्यवसाय के रूप में अपनाएगें। साक्षात्कार के समय
उम्मीदवारों को अपने समस्त प्रमाण पत्र तथा उसकी एक-एक प्रतिलिपि साथ लानी होगी। प्रशिक्षण के दौरान कोई
भता देय नहीं होगा।

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